14 साल पुराने केस में गवाह मुकरा: ट्रायल के दौरान लॉरेंस बिश्नोई को पहचानने से किया इंकार
- By Gaurav --
- Thursday, 26 Feb, 2026
Witness in 14-year-old case turns hostile: refuses to identify Lawrence Bishnoi during trial
करीब 14 वर्ष पुराने हिंसक छात्र झड़प और हत्या के प्रयास के मामले में अहम मोड़ तब आया, जब ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष का गवाह नवनीत सिंह अदालत में अपने बयान से मुकर गया। गवाह ने जिला अदालत में कहा कि वह लॉरेंस बिश्नोई को न तो जानता है और न ही पहचानता है।
अदालत ने गवाह के इस रुख को देखते हुए उसे ‘होस्टाइल’ घोषित कर दिया। बताया गया है कि नवनीत सिंह शिकायतकर्ता का साथी था और घटना के समय मौजूद बताया गया था।
डीएवी कॉलेज में 2012 की हिंसक झड़प
मामला वर्ष 2012 में सेक्टर-10 स्थित डीएवी कॉलेज में हुई छात्र हिंसा से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार मार्च 2012 में पंजाब विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से जुड़े दो गुटों के समर्थकों के बीच विवाद हुआ था।
शिकायतकर्ता अंकित ग्रोवर ने पुलिस को बताया था कि वह अपने साथियों के साथ विश्वविद्यालय गया था, जहां छात्र संगठन ‘पूसू’ के नेता जीवनजोत चहल को चेयरमैन घोषित किया गया था। इसके बाद सभी छात्र डीएवी कॉलेज में आयोजित ‘स्टार नाइट’ कार्यक्रम में पहुंचे।
ताला तोड़कर घुसने और हमले का आरोप
शिकायत के मुताबिक, ‘सोपु’ से जुड़े युवकों का एक समूह, जिसका नेतृत्व लॉरेंस बिश्नोई और अमनदीप सिंह मुल्तानी कर रहे थे, कॉलेज के पिछले गेट का ताला तोड़कर अंदर घुस आया।
आरोप है कि वहां मौजूद पूसू समर्थकों पर हमला किया गया। घटना के दौरान:
गोली चलने का आरोप लगा,
तेजधार हथियारों और डंडों से हमला किया गया,
कई छात्र घायल हुए।
हमले में पूसू सदस्य चरनदेव सिंह को गोली लगने का आरोप भी सामने आया था।
गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ केस
घटना के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने थाना सेक्टर-3 में मामला दर्ज किया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 148 व 149 (हथियारबंद दंगा), 452 (जबरन प्रवेश), 323 व 325 (मारपीट) तथा 506 (आपराधिक धमकी) के साथ-साथ शस्त्र अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था।
बचाव पक्ष के वकील हरीश भारद्वाज के अनुसार, आरोपी की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से करवाई गई।
गवाह मुकरने से चार आरोपी बरी
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता सहित कई गवाह अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए। सबूतों के अभाव में निचली अदालत ने अमनदीप सिंह मुल्तानी, विक्रमजीत सिंह, तरसेम सिंह और रणजोत सिंह को बरी कर दिया था।
अब इस मामले में केवल लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ ही ट्रायल लंबित है। उसे पहले भगोड़ा अपराधी घोषित किया जा चुका था। जनवरी 2022 में आरोप तय किए जाने के बाद अदालत में सुनवाई जारी है।
यह मामला उस समय पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति से जुड़ी सबसे चर्चित और हिंसक घटनाओं में गिना गया था, जिसने आगे चलकर गैंग प्रतिद्वंद्विता का रूप ले लिया।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत में चल रहे ट्रायल में आगे क्या मोड़ आता है।