लखनऊ में प्रतिबंधित मांझे से 104 घायल, मॉडिफाइड साइलेंसर पर सख्ती की मांग
104 injured by banned manjha in Lucknow
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लखनऊ में प्रतिबंधित मांझे से 104 लोग घायल हुए।
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उत्तर प्रदेश में 2017 से जानलेवा मांझा प्रतिबंधित है।
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विधान परिषद में मॉडिफाइड साइलेंसर पर कार्रवाई की मांग।
लखनऊ। विधान परिषद में सोमवार को प्रतिबंधित मांझे का मुद्दा उठा। सदस्य देवेन्द्र प्रताप सिंह के प्रश्न पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि पिछले दो वर्षों के दौरान लखनऊ में प्रतिबंधित मांझे से 104 व्यक्तियों के घायल होने के मामले सामने आए हैं। लखनऊ पुलिस ने संबंधित मामलों में कार्रवाई की है।
मंत्री ने बताया कि मांझे को लेकर पर्यावरण विभाग ने एक मई 2017 को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम-1986 की धारा-5 के तहत जानलेवा मांझे पर प्रतिबंध लगाया था। इस संदर्भ में सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, पुलिस कमिश्नरों, एसएसपी, व एसपी को निर्देश भी जारी किए गए थे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंथेटिक मांझा, सीसा लेपित मांझा, नायलान पतंग डोरी के अलावा चीन से आने वाले मांझे पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है। वहीं, भाजपा के विजय बहादुर पाठक ने माडिफाइड साइलेंसरों को लेकर सदन को सूचना देते हुए प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि राज्य में सड़क दुर्घटनाएं कम हुई हैं, लेकिन यातायात नियमों का उल्लंघन जारी है। खास तौर पर बाइक में माडिफाइड साइलेंसर लगाने का चलन समाप्त नहीं हो रहा है। साइलेंसरों से पटाखे जैसी आवाज निकालती है। इसलिए आम आदमी घबरा जाता है और ध्वनि प्रदूषण फैलता है। बाइकर गैंग और बाइकों के शौकीन नियमों को ताख पर रखकर आम लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। मोटर एक्ट के तहत माडिफाइड साइलेंसर लगाना नियम के विरुद्ध है। इसलिए इस मामले में बड़े स्तर पर कार्रवाई की जानी चाहिए।