योगी सरकार का बड़ा फैसला: पंचायत कर्मियों का वेतन रोकना अब अध्यक्षों के अधिकार में नहीं

योगी सरकार का बड़ा फैसला: पंचायत कर्मियों का वेतन रोकना अब अध्यक्षों के अधिकार में नहीं

Yogi Government's Big Decision

Yogi Government's Big Decision

Yogi Government's Big Decision: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच पंचायती राज विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए सख्त रुख अपनाया है। जिला पंचायत अध्यक्षों पर नकेल कसते हुए अधिकारियों-कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जिला पंचायत अध्यक्षों को अधिकारियों या कर्मचारियों का वेतन रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इस संबंध में पंचायती राज विभाग ने सभी जिला पंचायत अध्यक्षों को पत्र लिखकर सख्त निर्देश जारी किए हैं।

लखनऊ और कौशांबी के मामलों ने बढ़ाई सख्ती

शासन ने यह कदम विशेष रूप से लखनऊ और कौशांबी जिलों से आई गंभीर शिकायतों के बाद उठाया है। राजधानी लखनऊ की जिला पंचायत अध्यक्ष आरती रावत द्वारा पिछले करीब चार महीनों से कुछ कर्मचारियों का वेतन रोके जाने का मामला शासन के संज्ञान में आया था। इसी तरह की शिकायतें कौशांबी से भी प्राप्त हुई थीं। इन मामलों को 'अमानवीय' और 'नियम विरुद्ध' मानते हुए प्रमुख सचिव, पंचायती राज विभाग, अनिल कुमार तृतीय ने तत्काल प्रभाव से नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

नियुक्ति प्राधिकारी शासन, अध्यक्षों के पास अधिकार नहीं

पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि सेंट्रल ट्रांसफरेबल कैडर (केंद्रीय संक्रामय संवर्ग) के कार्मिकों का नियुक्ति प्राधिकारी स्वयं शासन (राज्य सरकार) है। नियमानुसार, जिस पद का नियुक्ति प्राधिकारी शासन है, उस पद पर तैनात अधिकारी या कर्मचारी का वेतन रोकने या दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार जिला पंचायत अध्यक्ष के पास नहीं है। शासन ने इसे 'गलत परंपरा' बताते हुए कहा कि जिला पंचायत अध्यक्षों द्वारा लिया गया ऐसा निर्णय पूरी तरह से विधिसम्मत नहीं है।

मानवीय दृष्टिकोण और चुनावी निष्पक्षता

शासन के निर्देशों में कहा गया है कि बिना किसी ठोस कानूनी आधार के महीनों तक वेतन रोकना मानवीय दृष्टिकोण से भी अनुचित है। पंचायत चुनाव से ठीक पहले इस तरह की कार्रवाई कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित कर सकती है। शासन ने कड़े लहजे में कहा है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कोई गंभीर शिकायत है तो जिला पंचायत अध्यक्ष उसे तत्काल साक्ष्यों के साथ शासन को भेजें। उस पर कार्रवाई का निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा, न कि स्थानीय स्तर पर वेतन रोककर उन्हें प्रताड़ित किया जाएगा।

अधिकारियों-कर्मचारियों में खुशी की लहर

पंचायती राज विभाग के इस 'एक्शन' से पूरे प्रदेश के जिला पंचायत कार्यालयों में तैनात हजारों कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अक्सर राजनीतिक द्वेष या व्यक्तिगत कारणों से उनके वेतन को निशाना बनाया जाता था, जिस पर अब लगाम लगेगी।

इस फैसले को आगामी पंचायत चुनाव से पहले शासन की एक बड़ी प्रशासनिक सर्जरी के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी बिना किसी दबाव के सुचारू रूप से कार्य कर सके।