योग साधना का माध्यम तो है ही, साथ ही अब बन रहा आजीविका का साधन भी: मंजू मल्होत्रा फूल
योग साधना का माध्यम तो है ही

योग साधना का माध्यम तो है ही, साथ ही अब बन रहा आजीविका का साधन भी: मंजू मल्होत्रा फूल

योग साधना का माध्यम तो है ही, साथ ही अब बन रहा आजीविका का साधन भी: मंजू मल्होत्रा फूल

श्रीमद्भगवद्गीता के चतुर्थ अध्याय के प्रथम एवं द्वितीय श्लोक  में श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा:

इमम् विवस्वते योगम्  प्रोक्तवान अहम् अव्ययम्।
विवस्वान् मनवे प्राह मनु : इक्ष्वाकवे अब्रवीत्।।

हे अर्जुन मैंने इस अविनाशी योग को सूर्य से कहा था, सूर्य ने अपने पुत्र वैवस्वत मनु से कहा और मनु ने अपने पुत्र राजा इक्ष्वाकु से कहा।

एवम् परम्पराप्राप्तम् इमम्  राजर्षयो विदुः।
स: कालेन इह महता योगो नष्टः परन्तप ।।

हे परंतप अर्जुन। इस प्रकार परंपरा से प्राप्त इस योग को   राजर्षियों ने जाना किंतु उसके बाद वह योग बहुत काल से इस पृथ्वी लोक में लुप्तप्राय हो गया।

श्रीमद्भगवद्गीता के श्री कृष्ण के इन वचनों से यह ज्ञात होता है कि भारत की संस्कृति धरोहर योग जो कि हमें परंपरा से प्राप्त हुआ है, वह कुछ-कुछ लुप्त होता जा रहा था या यह कहा जाए कि वैज्ञानिक पहचान को और अपने अस्तित्व एवं सम्मान को तलाश रहा था।   इसे सही पहचान  सम्मान एवं स्थान प्राप्त कराने की पहल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण से की । जिसके बाद 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया। संयुक्त राष्ट्र में 177 सदस्यों द्वारा 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। पहली बार यह दिवस  21 जून  2015  को मनाया गया। तब से आज तक 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है।
योग साधना का माध्यम तो है ही, साथ ही अब यह आजीविका का साधन भी बन रहा  है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर हाथ को हुनर और हर हाथ को रोजगार देने की बात कही थी और स्किल इंडिया पर जोर दिया था ।  आज योग स्किल इंडिया का बेहतरीन उदाहरण है, जिसमें अभ्यास और मेहनत से आज बहुत से लोगों ने इसे अपनी आजीविका का साधन बनाया है। प्रधानमंत्री पहले से ही जानते थे कि योग के प्रसार के साथ ही एक बहुत बड़ी आजीविका के क्षेत्र का मार्ग खुलेगा, जिसका सीधा फायदा भारत एवं भारत के लोगों को होगा। आज योग के प्रसार का सीधा फायदा भारत के लोगों को एवं भारत के आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स, योग प्रशिक्षण एवं आयुर्वेदिक शोध संस्थान को जिससे लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है सभी को लाभ मिल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में योग सीखने  वाले लोगों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ने से योग टीचर्स  की मांग सालाना 35% की दर से बड़ी है । कई संस्थाओं ने योग सिखाने के लिए योग आचार्य की नियुक्ति कर योगा सेंटर चला रहे है और योग टीचर भी प्राइवेट योग का  प्रशिक्षण दे कर अपनी आजीविका कमा रहे हैं। भारत के बहुत से ऐसे सरकारी संस्थान है जो योग शिक्षकों को वेतनमान पर रख रहे हैं । छात्रों का नजरिया भी  इसके प्रति बहुत सकारात्मक है। वह इसमें  उज्जवल भविष्य के साथ साथ अपनी भारतीय संस्कृति धरोहर के रक्षक बनकर नाम कमाना चाहते हैं । अस्पतालों में भी योग शिक्षकों की मांग बढ़ रही है । योग के शिक्षकों की मांग देश में ही नहीं अपितु अन्य देशों में भी बढ़ रही है। 
योग ने महिला सशक्तिकरण में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।  ऐसी महिलाएं जो घर से बाहर जाकर कार्य नहीं कर सकती ,  घर-गृहस्थी  और बच्चों की परवरिश में अपना जीवन बिता रही हैं तथा उनके पास कोई जमा पूंजी भी नहीं है, उनके लिए योग का ज्ञान हासिल कर  योगा टीचर बनना एक अच्छे विकल्प एवं सम्मानजनक काम के रूप में सामने आया है। जिस तरह से लोगों का  योग के प्रति रुझान बढ़ा है उससे जुड़े छोटे बड़े व्यवसाय  का दायरा भी बढ़ा है जैसे योगा ड्रेस, मैट, सीडी, डीवीडी इत्यादि ।
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  द्वारा अपनी दूरदर्शी सोच से  अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल के प्रथम वर्ष में ही योग के क्षेत्र में रोजगार सृजन के लिए  आधारशिला  27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण से  रख दी  गई थी। जिसके फलस्वरूप अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाने लगा  और जिससे योग के प्रति लोगों की जागरूकता  बड़ी एवं योग से संबंधित रोजगार देश में ही नही अपितु  विदेश में  भी निरंतर बढ़ रहा है।