डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, अमेरिकी संसद में ईरान के खिलाफ जंग रोकने का प्रस्ताव पारित

Major setback for Donald Trump

Major setback for Donald Trump

वॉशिंगटन: Major setback for Donald Trump: अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार (स्थानीय समय) को एक प्रस्ताव को मंजूरी दी. इस प्रस्ताव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के साथ चल रहे टकराव से अमेरिकी सेना को हटाने का निर्देश दिया गया है. यह प्रशासन के सैन्य अधिकार की एक दुर्लभ द्विदलीय आलोचना है. इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका को लेकर कांग्रेस की चिंता का भी पता चलता है.

सीएनएन के अनुसार यह प्रस्ताव 50-48 के वोट से पास हुआ. रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल, सुसान कॉलिन्स, लिसा मुर्कोव्स्की और बिल कैसिडी ने इस प्रस्ताव के समर्थन में डेमोक्रेट्स का साथ दिया. डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन फेटरमैन ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया.

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, रिपब्लिकन सीनेटर मिच मैककोनेल और डेव मैककॉर्मिक की गैर-मौजूदगी ने इस बिल को पास कराने में मदद की, इन दोनों ने पहले युद्ध से जुड़े ऐसे ही प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का विरोध किया था.

यह वोटिंग ऐसे समय में हुई है जब कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स लगातार कोशिश कर रहे हैं कि राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की मंजूरी के ईरान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन न ले सकें. रिपोर्ट के अनुसार, हाल के हफ़्तों में कुछ रिपब्लिकन नेताओं के बीच भी ऐसी कोशिशों को धीरे-धीरे समर्थन मिल रहा है.

यह प्रस्ताव पहले अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 215-208 वोटों से पास हुआ था, जिसमें डेमोक्रेट्स के साथ चार रिपब्लिकन ने भी वोट किया था. उस वोट के बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर सांसदों की आलोचना की, उन्हें 'ग्रैंडस्टैंडर्स' बताया और उनके कामों को 'देशद्रोही' कहा.

दोनों सदनों में पास होने के बावजूद, यह प्रस्ताव एक साथ पास होने वाला प्रस्ताव है और इसलिए इसके लिए राष्ट्रपति के साइन की जरूरत नहीं है. यह कानून की ताकत भी नहीं रखता.

सीनेट वोट पर प्रतिक्रिया देते हुए, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इस प्रस्ताव के महत्व को खारिज कर दिया. रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने कहा, 'साथ पास होने वाले प्रस्ताव राष्ट्रपति के पास नहीं जाते और उनमें कानून की ताकत नहीं होती.'

अधिकारी ने यह भी कहा कि यह प्रस्ताव मुख्य रूप से प्रतीकात्मक था और इसके पारित होने का कारण कई रिपब्लिकन सीनेटरों की अनुपस्थिति थी. इस प्रस्ताव में राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है कि वे ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई से अमेरिकी सेना को हटा लें.

हालाँकि, व्हाइट हाउस का कहना था कि ऐसी किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है क्योंकि 'ऐसी कोई सैन्य कार्रवाई नहीं चल रही है जिससे अमेरिकी सेना को हटाया जाए, क्योंकि 7 अप्रैल को युद्धविराम के साथ ही सैन्य कार्रवाई खत्म हो गई थी.

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में शामिल एक डेमोक्रेटिक सहयोगी ने इस व्याख्या पर असहमति जताई. उनका तर्क था कि यह प्रस्ताव बाध्यकारी होगा और इसके असर को लेकर किसी भी तरह का मतभेद कानूनी मामला बन सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की शुरुआत से अब तक सीनेट ने ईरान से जुड़े युद्ध संबंधी अधिकारों के प्रस्तावों पर दस बार मतदान किया है. सीनेट समर्थित एक प्रस्ताव पिछले महीने आगे बढ़ा था, लेकिन उस पर अभी तक अंतिम मतदान नहीं हुआ है क्योंकि डेमोक्रेटिक सांसद इसे पारित कराने के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन और तेहरान के बीच राजनयिक संपर्क जारी रहने के बावजूद कुछ डेमोक्रेटिक सीनेटर ईरान से जुड़ी किसी भी भविष्य की सैन्य कार्रवाई पर कांग्रेस की निगरानी की मांग करते रहे हैं. यह प्रस्ताव वाशिंगटन में कांग्रेस और राष्ट्रपति के बीच युद्ध संबंधी अधिकारों के संतुलन पर चल रही बहस को दर्शाता है, खासकर पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य भागीदारी के संबंध में.