विश्व अर्थराइटिस दिवस: ‘धूम्रपान, तनाव से रूमेटोइड अर्थराइटिस ओर भी नुकसानदायक - Arth Parkash
Thursday, October 18, 2018
Breaking News
Home » हेल्थ » विश्व अर्थराइटिस दिवस: ‘धूम्रपान, तनाव से रूमेटोइड अर्थराइटिस ओर भी नुकसानदायक
विश्व अर्थराइटिस दिवस: ‘धूम्रपान, तनाव से रूमेटोइड अर्थराइटिस ओर भी नुकसानदायक

विश्व अर्थराइटिस दिवस: ‘धूम्रपान, तनाव से रूमेटोइड अर्थराइटिस ओर भी नुकसानदायक

मोहाली : जिसे हम आम तौर पर ‘जोड़ों का दर्द’ के रूप में पहचानते हैं, आमतौर पर वह गठिया होता है और अब तक 100 से अधिक प्रकार के गठिया रोगों की पहचान हो चुकी है। ये बात आज फोर्टिस हॉस्पिटल, मोहाली के रूमेटोलॉजी कंसल्टेंट, डॉ. अनिल अबरोल ने आज यहां वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयोजित एक हेल्थ टॉक में कही।
‘विंडो ऑफ ऑर्पच्यूनिटी यानि सटीक अवसर’ पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जब बीमारी अपने प्रारंभिक चरण में होती है तो इस का सफल उपचार संभव है। डॉ.अबरोल ने कहा कि इस चरण में बेहतर उपचार के लिए रूमेटोइड गठिया पर नियंत्रण करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ‘‘ऐसा माना जाता है कि यदि इस तय समय के दौरान उपचार शुरू किया जाता है, (लक्षणों की शुरुआत के 12 सप्ताह के भीतर), तो जोड़ों को क्षति से बचाया जा सकता है या कम किया जा सकता है और रोग से राहत प्राप्त की जा सकती है। एंटी-रूमेटिक दवाओं का उपयोग कर बीमारी के साथ प्रारंभिक और बेहतर नियंत्रण प्राप्त किया जा सकता है और बॉयोलॉजिक्स के साथ (गठिया के लिए विशेष इंजेक्शन) से भी बेहतर इलाज प्राप्त किया जा सकता है। ये सूजन को समाप्त करती है और मरीज के कामकाज करने की क्षमता को बढ़ाती हैं और जोड़ों को होनी वाली क्षति को न्यूनतम करती है। यदि रोगी विशेषज्ञ यानि रूमेटोलॉजिस्ट से उपचार लेता है तो रोग से पूरी तरह से मुक्ति संभव है।’’
विश्व गठिया दिवस (12 अक्टूबर) की पूर्व संध्या पर बीमारी की समानता के बारे में बात करते हुए डॉ.अबरोल ने कहा कि ‘‘गठिया वाले दो तिहाई लोग 65 वर्ष से कम उम्र के हैं। लगभग 22-39 प्रतिशत भारतीय इससे प्रभावित होते हैं और यह पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक आम तौर पर देखा जाता है। इसके अलावा, समस्या उन लोगों में अधिक सामान्य रूप से पाई जाती है जो मोटापे से ग्रस्त हैं और इस प्रकार, जीवनशैली ने अनजाने में दर्दनाक स्थिति से पीडि़त लोगों में वृद्धि की है।’’
फोर्टिस मोहाली में आने वाले इस रोग के अलग अलग मामलों के बारे में ब्योरा देते हुए उन्होंने कहा कि ‘‘हमें फोर्टिस में जैसे रूमेटोइड गठिया, स्पोंडिलोआर्थराइटिस (एंकिलोजि़ंग स्पोंडिलिटिस), कनेक्टिव टिश्यूज डिजीज (एसएलई, स्क्लेरोडार्मा, स्जोग्रेन सिंड्रोम), और वास्कुलाइटिस में विभिन्न प्रकार के मरीज मिलते हैं। रूमेटोइड गठिया, स्पोंडिलोआर्थराइटिस, एसएलई के रोगी मुख्य रूप से युवा होते हैं।
डॉ.अबरोल ने विस्तार से बताया कि ‘‘एक कम ज्ञात, लेकिन अधिक दर्दनाक स्थिति रूमेटोइड गठिया की है।’’ उन्होंने बताया कि ‘‘यह एक व्यवस्थित ऑटोम्यून्यून बीमारी है जो जोड़ों की पुरानी सूजन का कारण बनती है। यह आमतौर पर शुरुआती मरीज में 20 के दशक में शुरू होता है और जोड़ों की सूजन, दर्द, कठोरता और लाली की ओर जाता है। जोड़ों के आस-पास टिश्यूज में सूजन भी हो सकती है, जैसे टेंडन, लिगामेंट्स और मसल्स आदि। यह संयुक्त, दर्द, अक्षमता, और औसत आयु को कम करने के लिए आगे बढ़ सकता है।’’
उन्होंने बताया कि ‘‘कुछ लोगों में रूमेटोइड गठिया के साथ, पुरानी सूजन से दर्द, कार्टिज, हड्डी और लिंगामेंट्स को क्षति होती है और इससे जोड़ों में विकृति होती है। जोड़ों को नुकसान बीमारी में जल्दी हो सकता है और यह लगातार आगे बढ़ता रह सकता है।’’
इसके कारणों के बारे में बात करते हुए, डॉक्टर ने कहा कि आनुवांशिक कारणों के साथ-साथ पर्यावरणीय कारकों को रूमेटोइड गठिया की ओर योगदान करने के लिए माना जाता है। रूमेटोइड गठिया से पीडि़त लोगों के लिए धूम्रपान पूरी तरह से बंद होना चाहिए, क्योंकि यह इस बीमारी के विकास के लिए सबसे स्थापित पर्यावरणीय जोखिम कारक है।
आज की तनावपूर्ण दुनिया में, कुछ स्थितियां जैसे काम पर संघर्ष, निवास में परिवर्तन, कार्यस्थल में परिवर्तन और काम पर बढ़ी जि़म्मेदारी भी समस्या को विकसित करने के जोखिम में वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहा कि ‘‘तनाव के लंबे संपर्क से प्रतिरक्षा प्रणाली में बदलाव हो सकता है, जिससे रोग में कमजोरी बढ़ जाती है।’’
चिकनगुनिया और रूमेटोइड गठिया…..
चिकनगुनिया के प्रसार को ध्यान में रखते हुए, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इन संक्रमणों से रोगियों के उप-समूह में गंभीर और लगातार जोड़ों का दर्द हो सकता है। विश्वव्यापी अध्ययनों से पता चला है कि यह लगभग 25 प्रतिशत रोगियों में सीएचआईसी क्रोनिक इन्फ्लैमेटरी रूमेटिज्म के रूप में आगे बढ़ सकता है और 14 प्रतिशत व्यक्तियों में क्रोनिक यानि पुराने गठिया का कारण बनता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share