महिला आरक्षण कानून के बाद भी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सीमित, एडीआर रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

महिला आरक्षण कानून के बाद भी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सीमित, एडीआर रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

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Women's participation in politics remains limited

नई दिल्ली। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रविधान वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के 2023 में पारित होने और इस कानून के अगले लोकसभा चुनावों से लागू करने की तैयारियों के बीच गैर सरकारी संस्था ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स’ (एडीआर) के विश्लेषण में चौंकाने वाले दावे किए गए। एडीआर के विश्लेषण के अनुसार महिलाएं अभी भी उपेक्षित हैं।

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के पारित होने के बावजूद देश की चुनावी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अभी भी काफी कम है। 2024 से लोकसभा और विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों ने केवल 10 प्रतिशत टिकट महिलाओं के दिए। ‘चुनावों में महिला उम्मीदवार: महिला आरक्षण विधेयक, 2023 के बाद पार्टी टिकट बंटवारे का विश्लेषण’ नाम की रिपोर्ट में, विधेयक के पारित होने के बाद से हुए लोकसभा और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने वाले 51,708 उम्मीदवारों का विश्लेषण किया गया।

 

 

महिलाओं की भागीदारी बेहद कम

इनमें से केवल 5,095, यानी लगभग 10 प्रतिशत ही महिलाएं थीं।रिपोर्ट में इस बारे में सवाल उठाया गया कि क्या संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण को लागू करने की पर्याप्त राजनीतिक इच्छाशक्ति है। साथ ही, इस विधेयक के इतिहास का भी जिक्र किया गया। 2023 में, 128वां संविधान संशोधन विधेयक पारित किया गया, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम कहा जाता है और जो आम तौर पर ‘महिला आरक्षण विधेयक’ के नाम से जाना जाता है।

हांलाकि यह कानून अगली परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही लागू होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2029 तक इस विधेयक को लागू करने के लिए 2026-27 की जनगणना का समय पर होना बहुत जरूरी है।रिपोर्ट में कहा गया है, भारत दुनिया का सबसे बड़ा संसदीय लोकतंत्र है, जहां 66.29 करोड़ महिला मतदाता हैं। आईपीयू1 की रैंकिंग के अनुसार, एक मार्च 2025 तक संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मामले में भारत 185 देशों में 151वें स्थान पर है। भारत की आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत है, जबकि मौजूदा संसद में महिलाओं की संख्या केवल 14 प्रतिशत है।

 

152 संसदीय क्षेत्रों में नहीं थी एक भी महिला उम्मीदवार

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2024 के लोकसभा चुनावों के विश्लेषण किये गए 8,360 उम्मीदवारों में से केवल 800 महिलाएं थीं, जबकि 543 संसदीय क्षेत्रों में से 152 में एक भी महिला उम्मीदवार मैदान में नहीं थी। भाजपा ने सबसे अधिक 16 प्रतिशत महिला उम्मीदवार उतारे। कांग्रेस और माकपा ने 13-13 प्रतिशत महिला उम्मीदवार उतारे, जबकि बसपा ने आठ प्रतिशत महिला उम्मीदवार उतारे। आम आदमी पार्टी ने अपने 22 उम्मीदवारों में किसी भी महिला को टिकट नहीं दिया।

 

विस चुनावों में 10.2 प्रतिशत महिलाओं को मिला टिकट

महिला आरक्षण विधेयक, 2023 के पारित होने के बाद, 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव हुए। चुनाव लड़ने वाले कुल 31,429 उम्मीदवारों में से केवल 3,273 (10.2 प्रतिशत) महिलाओं को टिकट दिए गए। किसी भी राज्य में महिला उम्मीदवारों का संख्या 14 प्रतिशत से अधिक नहीं रही। साल 2024 में ओडिशा में 13.9 प्रतिशत महिला प्रत्याशी थीं। 2025 में दिल्ली में 13.7 प्रतिशत और 2026 में पुडुचेरी में 13.6 प्रतिशत महिला उम्मीदवार थीं।