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मौसम से जंग : तटीय राज्यों में अम्फान तो उत्तरी राज्यों में लू

बेशक कोरोना वायरस से जंग में देश एक है, लेकिन मौसम के मामले में यहां अलग-अलग मोर्चे खुल चुके हैं। देश के तटीय राज्यों में भीषण चक्रवाती तूफान अम्फान जहां 190 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के साथ तबाही मचा रहा है, वहीं उत्तर भारत में लू के थपेड़े जनजीवन अस्त-व्यस्त कर रहे हैं। लॉकडाउन में कुछ ढील के बाद कामकाज और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ी हैं, लेकिन गर्मी का प्रकोप अब अपना रंग दिखाने लगा है। अम्फान के हालात समझें तो इसने पश्चिम बंगाल और ओडिशा में बड़ी तबाही मचाई है। पश्चिम बंगाल में तूफान से 12 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं सैकड़ों घरों को नुकसान पहुंचा है। तूफान का असर कोलकाता एयरपोर्ट पर भी पड़ा है, जहां विमान पानी के बीच खड़े हैं। कोलकाता एयरपोर्ट पर यात्री उड़ानें 25 मार्च से ही निलंबित हैं, अभी यहां से केवल कार्गो और वंदे भारत मिशन के तहत आने-जाने वाली उड़ानें चल रही थी, लेकिन उन्हें भी अब रोक दिया गया है। इस बीच सबसे ज्यादा कहर पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना, दक्षिणी 24 परगना, मिदनापुर और कोलकाता में रहा।

अम्फान का आना उस समय हुआ है, जब कोरोना संक्रमण से युद्ध जारी है। देश के तटीय राज्यों में भी संक्रमण का असर है, लेकिन उतना नहीं, जितना उत्तरी और मध्य राज्यों में। हालांकि इस दोतरफा चुनौती का सामना करने के लिए केंद्र व राज्य सरकारें पहले से तैयार थी। अम्फान के आने की सूचना मौसम विभाग ने तीन-चार दिन पहले ही जारी कर दी थी। इसके बाद राज्य सरकारों की ओर से तटीय इलाकों में रहने वाले निवासियों, मत्स्य उद्योग से जुड़े लोगों को वहां से निकालने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। रिपोर्ट हैं कि इन इलाकों से 7 लाख से ज्यादा लोगों को निकाला गया। वहीं राज्य सरकारों की मशीनरी तो जुटी ही, एनडीआरएफ ने भी युद्धस्तर पर काम संभाला हुआ है। केंद्रीय गृहमंत्री ने जहां राज्यों के मुख्यमंत्रियों को फोन कर हालात का जायजा लिया है, वहीं प्रधानमंत्री भी नजर बनाए हुए हैं। एनडीआरएफ की भूमिका ऐसे समय में ही अपने चरम पर नजर आती है, क्योंकि जहां-तहां फंसे लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर भेजना, रास्ते साफ करना इसी संगठन का काम है। बहरहाल, हालात विषम हैं, क्योंकि इस दौरान इसका भी ख्याल रखना है कि कोरोना संक्रमण न फैले, इसके लिए जहां बचाव दल सोशल डिस्टेंसिंग कायम रख रहे हंै, वहीं पीपीई किट पहनकर बचाव कार्य में जुटे हैं।

इस बीच उत्तर भारत की बात करें तो यहां मौसम विभाग लोगों को लू से बचने की हिदायत दे रहा है। विभाग का कहना है कि सड़क पर निकलना खतरनाक हो सकता है। बीते 40 दिनों के लॉकडाउन के दौरान लोगों ने जिस सुहावने मौसम का आनंद लिया है, वह अब काफूर हो चुका है। तय है कि मई के इस पखवाड़े और जून में तपिश अपने चरम को छूएगी। लू के जो हल्के थपेड़े आजकल परेशान कर रहे हैं, वे भी भयंकर होने वाले हैं। मौसम विभाग के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत पूरे इलाके में गर्मी बढ़ रही है। बुधवार को यहां का अधिकतम तापमान 39.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से चार डिग्री सेल्सियस कम है। बृहस्पतिवार को भी तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के आस-पास पहुंचा।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले चार से पांच दिन में उत्तर पश्चिम भारत में शुष्कता रहेगी एवं लू और तेज होंगी। इस बीच आसमान से राहत की बूंदें गिरने के भी आसार नहीं हैं। बेशक ताजा पश्चिम विक्षोभ इस क्षेत्र में पहुंच रहा है लेकिन इसका मैदानी इलाकों में कोई बड़ा असर नहीं होगा। गौरतलब है कि जब तापमान लगातार दो दिन तक 45 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया जाता है तो उसे लू चलना घोषित किया जाता है, वहीं अगर लगातार दो दिन तक तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए तो उसे गंभीर लू वाली श्रेणी में रखा जाता है। मार्च के आखिर में कोरोना संक्रमण को लेकर एक राय यह थी कि गर्मी की वजह से इसके फैलाव में कमी आएगी, क्योंकि यह शीत स्थितियों में ज्यादा प्रभावी होता है, लेकिन गर्मी के बावजूद इसके मामलों में किसी प्रकार की कमी नहीं आई है। इन विपरीत हालात में केंद्र और राज्य सरकारों को जरूरतमंदों की पुरजोर तरीके से मदद करनी चाहिए। तटीय इलाकों में अम्फान और उत्तर-मध्य इलाकों में लू की वजह से बेघर प्रवासियों का जीवन बेहद संकट में है। आशा है समय रहते प्रत्येक जरूरतमंद अपने ठोर तक पहुंच जाएगा।

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