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2017 स्टॉकिंग केस: विकास बराला और आशीष कुमार की फोरेंसिक जांच की मांग खारिज

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चंडीगढ़: नौ साल पुराने चर्चित स्टॉकिंग मामले में जिला अदालत ने आरोपी विकास बराला और सह-आरोपी आशीष कुमार की विवादित दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराने की मांग को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर ऐसी जांच से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा और यह सुनवाई को लंबा खींचने का प्रयास प्रतीत होता है।

बचाव पक्ष ने अर्जी दी थी कि दस्तावेज Ex.P1 और Ex.P2 को शिकायतकर्ता के अदालत में दर्ज स्वीकृत हस्ताक्षरों के साथ केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) भेजा जाए, क्योंकि उनका दावा था कि इन दस्तावेजों पर मौजूद हस्ताक्षर जाली हैं।

अदालत ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि मामला 2017 से लंबित है और इस चरण पर फोरेंसिक जांच की अनुमति देने के पर्याप्त आधार नहीं हैं। बचाव पक्ष ने पहले ही हैंडराइटिंग एक्सपर्ट को गवाह के रूप में पेश किया था, जिन्होंने हस्ताक्षरों को असली नहीं माना। वहीं अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि विशेषज्ञ की राय केवल फोटोकॉपी पर आधारित थी, मूल दस्तावेजों पर नहीं।