उत्तराखंड भाजपा ने 22 प्रकोष्ठों में नई जिम्मेदारियों के साथ सुदृढ़ किया संगठन

The Uttarakhand BJP has strengthened its organization

The Uttarakhand BJP has strengthened its organization

देहरादून। The Uttarakhand BJP has strengthened its organization, उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा ने समाज के सभी वर्गों को साधने की कवायद तेज कर दी है। सामाजिक, पेशेवर और वर्ग आधारित 22 प्रकोष्ठों के प्रदेश संयोजक व सह-संयोजकों की घोषणा कर पार्टी ने वर्गवार माइक्रो मैनेजमेंट करने का प्रयास किया है।

प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने बताया कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के निर्देश पर 22 प्रकोष्ठों में नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। पार्टी का मानना है कि ये प्रकोष्ठ सरकार की योजनाओं और संगठन के संदेश को समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

22 प्रकोष्ठों में नई जिम्मेदारियां

इसी कड़ी में डा चंडी प्रसाद भट्ट को चिकित्सा प्रकोष्ठ, नीरज पांडे को विधि प्रकोष्ठ, उमेश त्रिपाठी को सहकारिता प्रकोष्ठ, जितेंद्र सिंह मेहता को सांस्कृतिक प्रकोष्ठ, सौरभ भूषण शर्मा को व्यावसायिक प्रकोष्ठ, कर्नल सुखवीर सिंह भंडारी को पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ, प्रदीप त्यागी को शिक्षक प्रकोष्ठ, अभिषेक शाही को गोरखा प्रकोष्ठ, अरुण मित्तल को आर्थिक प्रकोष्ठ तथा ओपी कुलश्रेष्ठ को बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ का संयोजक बनाया गया है।

नूपुर गुप्ता को स्वयं सहायता समूह प्रकोष्ठ, नवीन परसाली को आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ, विशाल गुप्ता को व्यापार प्रकोष्ठ, सुशील बहुगुणा को एनजीओ प्रकोष्ठ, सचिन गुप्ता को निकाय प्रकोष्ठ, गोविंद सिंह दानू को पंचायत प्रकोष्ठ, राहुल देव को लघु उद्योग प्रकोष्ठ, अमित डोभाल को दिव्यांगजन प्रकोष्ठ, महेश नेगी को खेलकूद प्रकोष्ठ, रमेश चंद्र रमोला को सेवानिवृत्त कर्मचारी प्रकोष्ठ तथा विमल भट्ट को पर्यटन गतिविधि प्रकोष्ठ के संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है।

नए प्रकोष्ठों के पीछे भाजपा की रणनीति

भाजपा ने इस बार आपदा प्रबंधन और स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) प्रकोष्ठ को प्रमुखता देकर संगठन का दायरा बढ़ाने की कोशिश की है। आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ उत्तराखंड में राहत एवं बचाव कार्यों के दौरान संगठन की सक्रिय भूमिका को मजबूत करेगा, जबकि एसएचजी प्रकोष्ठ के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय हजारों महिला समूहों तक पार्टी और सरकार की पहुंच बढ़ाने की रणनीति है।

वहीं धर्म-संस्कृति प्रकोष्ठ के दायरे में मठ, मंदिर और धर्मशालाओं को भी शामिल किया गया है। चारधाम यात्रा और प्रदेश की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को देखते हुए यह प्रकोष्ठ प्रमुख धार्मिक संस्थाओं से समन्वय स्थापित कर संगठन की पहुंच को और व्यापक बनाने का काम करेगा।