राम मंदिर के पहले CEO के लिए 2 हजार से अधिक ऐप्लिकेशन, आवेदकों में पूर्व IPS और व्यंग्यकार भी

Ram Mandir First CEO

Ram Mandir First CEO

अयोध्या। Ram Mandir First CEO: राम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बनने के लिए सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों व निजी क्षेत्रों में कार्यरत रामभक्तों के साथ सरकारी सेवा के अंंतिम वर्ष में चल रहे अधिकारियों में होड़ मची है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से सीईओ की नियुक्ति के लिए मांगे गए आवेदन की समय सीमा भी शनिवार को समाप्त हो गई।

अब प्राप्त हुए आवेदन पत्रों की जांच के पश्चात सीईओ के चयन के लिए 22 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में विचार-विमर्श होने की संभावना है। बताया जा रहा कि ट्रस्टियों के बीच तीन नामों को रखा जाएगा।

इसके बाद सर्वसम्मति से किसी व्यक्ति के नाम पर मुहर लगेगी। सीईओ की नियुक्ति को अब लगभग तय माना जा रहा है। यह ट्रस्ट के महासचिव के प्रति उत्तरदायी होंगे और अपने स्तर से अन्य कार्मिकों की नियुक्ति कर सकेंगे।

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी उजागर होने के बाद से मंदिर की विभिन्न व्यवस्थाओं के संचालन के लिए देश के अन्य मंदिरों के समान सीईओ की नियुक्ति की चर्चा शुरू हुई थी। इस पर छह जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में विचार भी हुआ और आवेदन मांगे जाने का निर्णय लिया गया।

इसके बाद 13 जुलाई को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने वेबसाइट पर इस पद के लिए अर्हता सहित अन्य विवरण भी अपलोड किए। सूत्रों ने बताया कि आवेदन की अंतिम तिथि 18 जुलाई तक एक हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।

इनमें रिटायर्ड आईपीएस अमिताभ ठाकुर, अयोध्या में नेहरू युवा केंद्र के जिला समन्वयक रहे रामकिशोर यादव, सीतापुर के व्यंग्यकार अरुणेश मिश्र सहित बड़ी संख्या में सेवा से मुक्त हो चुके प्रशासनिक अधिकारियों व निजी क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों ने आवेदन किया है।

सूत्रों की मानें तो कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि के निर्देशन में सीईओ की नियुक्ति के लिए बनी तीन सदस्यीय समिति आवेदन पत्रों की जांच कर रही है।

इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और एनआईटी रायपुर के पूर्व चेयरमैन सुरेश हावरे शामिल हैं। इसमें उन्हीं को वरीयता दी जा रही है, जिनका रिकॉर्ड साफ-सुथरा रहा है और उन्हें बड़े धार्मिक संस्थानों, लोक प्रशासन या व्यावसायिक प्रशासन को संभालने का अनुभव रहा है।

सीईओ की नियुक्ति को लेकर अंतिम निर्णय ट्रस्ट की आगामी बैठक में ही संभावित है। इसी बैठक में ट्रस्ट के रिक्त पदों पर भी नए सदस्यों का चयन होगा। ट्रस्ट में अभी दोनों पदाधिकारियों के त्यागपत्र के बाद तीन पद खाली चल रहे हैं। एक पद पिछले वर्ष से ही अयोध्या राजपरिवार के मुखिया रहे बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन से रिक्त है।

सीईओ का मुख्य कार्य राम मंदिर में आने वाले दर्शनार्थियों की सुविधाएं, वित्तीय निगरानी व प्रशासनिक कामकाज रहेगा। एक ट्रस्टी का कहना था कि बड़ी संख्या में आवेदन आए हैं। कुछ आवेदकों ने अपने बायोडाटा सीधे हमें भी भेजा है। सीधे आए आवेदनों पर विचार नहीं किया गया। उन्हें विशेषज्ञों को ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत भेजने को कहा गया है।

बता दें कि ट्रस्ट ने सीईओ पद के लिए उम्मीदवारों की आयु सीमा 50 से 70 साल निर्धारित की है और आवेदक को हिंदू और न्यूनतम स्नातक होना अनिवार्य किया गया था।

इसके साथ किसी बड़े सार्वजनिक संगठन, संस्थान, सरकारी विभाग या कंपनी में कम से कम 20 साल का प्रबंधन का अनुभव होना चाहिए। वैष्णव परंपरा से जुड़े भगवान राम के भक्तों को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी।