अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाले की जांच तेज, एसआईटी के दूसरे चरण में SBI अधिकारियों से पूछताछ शुरू

Investigation into the Ayodhya Ram Mandir donation

Investigation into the Ayodhya Ram Mandir donation

अयोध्या: Investigation into the Ayodhya Ram Mandir donation, एसआईटी की दूसरे चरण की जांच मंगलवार से शुरू होगी। इसके दायरे में खासतौर पर स्टेट बैंक आफ इंडिया के अधिकारी और कर्मचारी रहेंगे। मंदिर में आने वाले चढ़ावा राशि की काउंटिंग व्यवस्था के साथ ही बैंक और मंदिर के बेच एमओयू होने से लेकर अब तक सभी संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों से गहन पूछताछ होगी। इसमें स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रॉसीजर (एसओपी) फालो न करने और काउंटिंग की कार्यशैली में ‘लूप होल' को भी खंगाला जा सकता है।
 

बैंक और मंदिर के बीच हुआ था एमओयू

बैंक और मंदिर के बीच फरवरी 2024 में चढ़ावा राशि की गिनती से लेकर जमा करने को लेकर एमओयू हुआ था। दान पात्रों से चढ़ावा निकालने, गिनती से लेकर जमा करने तक की जिम्मेदारी बैंक को सौंपी गई थी। इसके लिए पहले केवल दस कर्मचारी ही लगाए गए थे। समय के साथ चढ़ावा राशि प्रति माह 14 से 15 करोड़ रुपये तक पहुंचने के बाद गिनती के लिए कर्मचारी कम पड़ने लगे।

कर्मचारियों की संख्या की गई थी 40

ऐसे में बैंक ने एजेंसी के मध्यम से कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर 40 कर दी। बताया जा रहा है कि सारा खेल आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने ही किया। हालांकि बैंक ने अब तक यह साफ नहीं किया है कि आउटसोर्सिंग एजेंसी को किसी टेंडर के जरिए काम सौंपा गया था या कर्मचारियों की बैकडोर से भर्ती कर दी गई।
 

बिना पुलिस वैरिफिकेशन रखा

सूत्रों ने बताया कि आउट सोर्सिंग कर्मचारियों को बैंक ने बिना पूरी जांच पड़ताल किए तैनात कर दिया। कई लोगों को मंदिर के महासचिव चंपत राय और टिन्नू की सिफारिश पर रखा गया था। बैंक की तरफ से भेजी गई सूची के आधार पर कर्मचारियों को मंदिर ट्रस्ट ने प्रवेश कार्ड जारी कर दिए। बताया जा रहा है कि तैनाती से पहले कर्मचारियों का पुलिस वैरिफिकेशन तक नहीं करवाया गया था। सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने अपनी जांच में इस तथ्य को गंभीरता से लिया है।

 

कर्मचारियों की भर्ती में भी खेल

मंदिर परिसर में लगभग 850 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से करीब 650 ठेके पर रखे गए है और बाकियों को ट्रस्ट ने सीधे रखा हैं। इन सबका भी पुलिस सत्यापन नहीं करवाया गया है। भर्तियों में खूब खेल भी हुआ। पहले ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने अपने लोगों को भर्ती किया, फिर तैनाती पाने वाले अपने चहेतों को नौकरी दिलवाने में जुट गए। मंदिर के हर प्रभावशाली पदाधिकारियों ने अपने-अपने चहेतों को भर्ती करवाया।
 

सुरक्षा में बदलाव की तैयारी

मंदिर में हुई चोरी को सुरक्षा में बढ़ी चूक माना गया है। एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट में सुरक्षा खामियों का जिक्र है। इसके साथ ही बड़े बदलावों की सिफारिश की गई है। सुरक्षा में लगे अधिकारी और कर्मचारी बदले जाएंगे। निगरानी तंत्र को मजबूत करने की कवायद चल रही है।

पुलिस ने ताले खुलवा खंगाले आरोपियों के घर

चढ़ावा राशि की चोरी के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके 8 आरोपियों के घरों पर रविवार सुबह पुलिस की टीमों ने एक साथ छापे मारे। इस दौरान ज्यादातर के घरों पर ताले लटकते मिले, जिन्हें खुलवाकर पुलिस ने तलाशी ली। पुलिस के अनुसार दस्तावेज आदि कब्जे में लिए गए है। चर्चा है कि कुछ जगह से जेवर और नकदी भी मिली है। हालांकि पुलिस ने इससे इनकार किया है।

पुलिस कई आरोपियों के गई घर

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नूः राम मंदिर से 2 किमी दूर स्वर्गद्वार मौहल्ले में टिन्नू के दो मंजिला मकान पर ताला लगा मिला। कुछ देर बाद पहुंची टिन्नू की मां ने ताला खोला। इसके बाद पुलिस ने तलाशी के साथ ही परिवारजनों से पूछताछ की।


मनीष यादवः टिन्नू के घर के पास ही उसके भतीजे मनीष यादव के घर पर भी ताला लटकता मिला। पुलिस ने मकान में रहने वाले किराएदारों से मनीष के बारे में जानकारी जुटाई।

लवकुश मिश्राः रुदौली स्थित आवास पहुंची टीम को बाहर ही लवकुश के बुजुर्ग दादा जगदंबा मिश्रा बैठे मिले। टीम ने उनसे पूछताछ की।

सुभाष चंद्र श्रीवास्तवः अंजनीपुरम स्थित घर पहुंची पुलिस को भी ताला लटका मिला। पुलिस ने आसपास रहने वालों से सुभाष के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया।

अनुकल्प मिश्राः पुलिस के कौशलपुरी स्थित घर पहुंचने पर अनुकल्प की मां ने दरवाजा खोला। इसके बाद पुलिस टीम ने अंदर पहुंच संपत्तियों के दस्तावेज के साथ ही खातों का ब्योरा जुटाया। इस दौरान पड़ोसियों से भी जानकारी ली गई।


अविनाश शुक्लाः कौशलपुरी में घर पहुंची पुलिस को कोई नहीं मिला। पास ही किराना दुकान चलाने वाले राहुल ने बताया कि अविनाश किराए पर रहता है।

रमाशंकर मिश्राः नया घाट निवासी रमाशंकर के पिता छन्नूलाल ने बताया कि पुलिस आई थी। बक्से से लेकर अलमारी तक खंगाली और फिर लौट गई। घर में कुछ नहीं मिला, हालांकि कुछ कागजों पर साइन करवाए।

 

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को बैंकिंग सुविधाएं राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय से ही दी जा रही है। मंदिर के दान पात्रों से मिले चंदे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए यूपी सरकार ने एसआईटी का गठन किया है। एसबीआई ने जांच में अब तक पूरा सहयोग किया है और आगे भी सहयोग करती रहेगी।

दीपेश राजू, मुख्य महाप्रबंधक, SBI प्रधान कार्यालय, लखनऊ

 

चंपत, अनिल को क्लीन चिट नहीं

राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने इस्तीफा भले ही दे दिया हो, लेकिन एसआईटी ने अब तक दोनों को क्लीन चिट नहीं दी है। मंडलायुक्त लखनऊ विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में एसआईटी मंगलवार से अगले चरण की जांच शुरू करेगी। इस दौरान दोनों की भूमिका की गहराई से छानबीन होगी। एसबीआई के साथ हुए एमओयू पर अनिल मिश्रा ने ही हस्ताक्षर किए थे। वहीं, चेकों पर भी चपत राय और अनिल मिश्रा के साइन होते थे।
 

सिफारिश से हुई भर्तियां

बैंक में लगाई गई आउटसोर्सिंग एजेंसी में कई भर्तियों की सिफारिश भी चंपत राय और अनिल मिश्रा ने की थी। प्राथमिक रिपोर्ट में भी इसका उल्लेख है। कई भर्तियां कुछ स्थानीय विहिप, बीजेपी, संघ के नेताओं की सिफारिश से हुई थीं। एसआईटी ने अपनी विस्तृत जांच में करीब 40 लोगों को दोषी पाया है। इनमें कंट्रोल रूम प्रभारी, वहां तैनात कर्मी और गणना कक्ष के बाहर के सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। इसके दायरे में निजी सुरक्षाकर्मियों के साथ ही पुलिस और पीएसी के जवान भी शामिल हैं।