जेपीएनआईसी घोटाले की जांच में तेजी, एलडीए के दो पूर्व मुख्य अभियंता 7 जुलाई को तलब

JPNIC Scam Probe

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 लखनऊ। JPNIC Scam Probe: समाजवादी पार्टी की सरकार में बने जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआइसी) परियोजना की वित्तीय अनियमितताओं की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। शासन के निर्देश पर चल रही विभागीय जांच को गति देने के लिए एलडीए के तत्कालीन मुख्य अभियंता डीपी सिंह और अधिशासी अभियंता पूरन कुमार को सात जुलाई को लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए तलब किया गया है।

आरोप है कि जेपीएनआइसी का निर्माण वर्ष 2013 से 2016 के बीच अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए 864 करोड़ रुपये से किया गया था। 18 मंजिल के जेपीएनआइसी के निर्माण में अनियमितताओं की शिकायत पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने वर्ष 2017 में परियोजना की जांच कराने का निर्णय किया गया था। जेपीएनआइसी के मूल डीपीआर की जगह बार-बार बजट बढ़ाने से इसकी लागत बढ़ गई। अब भी करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये की जरूरत बंद पड़े जेपीएनआइसी को शुरू करने के लिए है।

अखिलेश यादव ने भाजपा पर कई बार साधा निशाना

जेपीएनआइसी को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कई बार भाजपा पर निशाना साध चुके हैं। लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर 11 अक्टूबर 2023 को माल्यार्पण करने जा रहे अखिलेश यादव को रोकने के लिए एलडीए ने गेट में ताला जड़कर टिन की चादर खड़ी कर दी थी। तब अखिलेश यादव समर्थकों के साथ करीब 15 फीट ऊंचा गेट फांदकर भीतर प्रवेश कर गए थे।

जेपीएनआइसी निर्माण की जांच कर रहे शासन ने दो साल पहले डीपीआर गायब होने पर एलडीए को पत्र भेजकर एफआइआर कराने को कहा था। अब जिन दो इंजीनियरों के समय में डीपीआर में बदलाव किया गया है, उनको पूछताछ के लिए सात जुलाई को बुलाया गया है।

अधिशासी अभियंता रहे पूरन कुमार के विरुद्ध उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण केंद्रीकृत सेवा नियमावली और सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता डीपी सिंह के विरुद्ध सीएसआर के अनुच्छेद-351ए के तहत कार्रवाई हो रही है। दोनों को अपना पक्ष रखने के लिए अंतिम अवसर दिया गया है। इसकी रिपोर्ट जांच अधिकारी शासन को सौंपेंगे।

850 करोड़ की है महत्वाकांक्षी परियोजना

  • 22 एकड़ क्षेत्र में कन्वेंशन सेंटर, आडिटोरियम, प्रदर्शनी हाल, संग्रहालय, पुस्तकालय, वीआईपी सुविधाएं, फूड कोर्ट, व्यावसायिक क्षेत्र और बहुस्तरीय पार्किंग जैसी सुविधाएं हैं।
  • 617 करोड़ रुपये था प्रारंभिक लागत का अनुमान
  • 850 करोड़ रुपये बढ़कर हो गई संशोधित लागत
  • 2017 में सरकार बदलने के बाद परियोजना की समीक्षा शुरू हुई
  • 2026 में जांच फिर तेज हुई, मंडलायुक्त ने निर्माण अवधि में तैनात रहे तत्कालीन मुख्य अभियंता डीपी सिंह और अधिशासी अभियंता पूरन कुमार को 7 जुलाई को तलब किया है।
  • 2013 से 2016 के बीच किया गया है जेपीएनआइसी का निर्माण
  • 150 करोड़ रुपये की और जरूरत है सेंटर को पूरा करने के लिए