यूपी के विकास प्राधिकरणों में 'वन कैडर' की तैयारी: अकेंद्रीयत कर्मचारियों का भी हो सकेगा पूरे प्रदेश में तबादला; 42% पद खाली
UP's development authorities prepare for a 'one cadre' approach
लखनऊ। शहरों के सुनियोजित विकास के लिए गठित विकास प्राधिकरणों के कार्मिकों का अब एक समान कैडर करने की तैयारी है। अब तक अलग-अलग केंद्रीयत व अकेंद्रीय दो कैडर हैं जिसे समाप्त कर सभी कार्मिकों के लिए एक ही कैडर किया जाएगा। ऐसे में लिपिक आदि अकेंद्रीयत सेवा के कार्मिकों का तबादला प्रदेश के किसी भी प्राधिकरण में किया जा सकेगा।
इस संबंध में बुधवार को प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन पी गुरू प्रसाद ने विभिन्न विकास प्राधिकरणों के कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनसे सुझाव मांगे। एक समान कैडर करने के साथ ही जरूरत के मुताबिक नयी भर्तियां भी प्राधिकरणों में की जाएंगी।
प्रदेश में 29 विकास प्राधिकरण व चार विशेष क्षेत्र प्राधिकरण हैं। प्राधिकरण के दायरे में जहां लगभग 23 हजार वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र हैं वहीं पिछले वित्तीय वर्ष में इनकी आय लगभग 16 हजार करोड़ रुपये रही है।
इन प्राधिकरणों के 6835 कार्मिकों में जहां 2910 केंद्रीयत सेवा के हैं वहीं 3925 अकेंद्रीयत सेवा के हैं। गौर करने की बात यह है कि इनमें से लगभग 42 प्रतिशत पद रिक्त हैं।
प्राधिकरणों में 4002 कार्मिक ही कार्यरत हैं। चूंकि केंद्रीयत सेवा के कार्मिकों का तो कहीं भी तबादला हो सकता है लेकिन अकेंद्रीयत कार्मिक नौकरी में आने से लेकर रिटायर होने तक एक ही प्राधिकरण में कार्यरत रहते हैं। ऐसे में जिन अकेंद्रीयत कार्मिकों की तमाम शिकायतें होती हैं उनका तबादला भी दूसरे प्राधिकरण में नहीं हो सकता है।
राज्य सरकार अब केंद्रीयत व अकेंद्रीयत कार्मिकों के अलग-अलग कैडर को समाप्त कर सभी के लिए एक समान कैडर बनाने जा रही है। जानकारों का कहना है कि एक समान कैडर होने पर वेतन विसंगतियां दूर होने के साथ ही पदोन्नति के लिए सभी को समान अवसर संभव होगा।
एक समान सेवा नियमावली होने पर सभी प्राधिकरणों के कार्मिकों के लिए एक जैसी ही व्यवस्था होगी। एक प्राधिकरण से दूसरे में किसी का भी तबादला किया जा सकेगा। हालांकि, कर्मचारी संगठनों द्वारा व्यवस्था में बदलाव को लेकर विरोध जताया जा रहा है।