योगी सरकार में गोरक्षा बनी शासन की सख्त प्राथमिकता, यूपी बना देश का सबसे कठोर कानून वाला राज्य

योगी सरकार में गोरक्षा बनी शासन की सख्त प्राथमिकता, यूपी बना देश का सबसे कठोर कानून वाला राज्य

Under the Yogi government cow protection has become

Under the Yogi government, cow protection

योगी राज में गोरक्षा केवल भावनात्मक मुद्दा नहीं, शासन की प्राथमिकता

योगी सरकार में यूपी है देश का सबसे सख्त गोरक्षा कानून वाला राज्य

सरकार ने 1955 के कानून को बनाया इतना कठोर कि गोहत्यारों और गोतस्करी का बच निकलना कठिन

बीते 9 साल में कैसे बदली गोरक्षा और संरक्षा में यूपी की स्थिति 

गोवध/गोतस्करी में लिप्त अबतक 36 हजार लोग गिरफ्तार, 83.32 करोड़ की संपत्तियां जब्त

लखनऊ। Under the Yogi government, cow protection, उत्तर प्रदेश में गोसंरक्षण और गोवंश सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जो कानूनी और प्रशासनिक ढांचा खड़ा किया है, उसे देश में सबसे कठोर माना जा रहा है। 11 जून 2020 को लागू हुआ उत्तर प्रदेश गो-वध निवारण (संशोधन) अध्यादेश, 2020 केवल एक कानून नहीं, बल्कि गोरक्षा को लेकर योगी सरकार की स्पष्ट राजनीतिक और वैचारिक प्रतिबद्धता का प्रमाण माना जाता है। 

प्रदेश में एक समय ऐसा भी था जब गोतस्करी, अवैध गो-कटान और गोवंश की दुर्दशा को लेकर लगातार सवाल उठते थे। सीमावर्ती जिलों से लेकर पश्चिमी यूपी तक गोतस्करी के बड़े नेटवर्क सक्रिय थे। लेकिन 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार आने के बाद गोरक्षा को केवल भावनात्मक मुद्दा नहीं बल्कि शासन की प्राथमिकता बनाया गया। यही वजह है कि सरकार ने कानून को इतना कठोर बनाया कि अब गोवध और गोतस्करी में शामिल लोगों के लिए बच निकलना आसान नहीं है।

क्या कहता है यूपी को गोवध निवारण अधिनियम (संशोधन) 2020 कानून

10 साल तक जेल, 5 लाख तक जुर्माना
यूपी में सन् 1955 में गोवध निवारण अधिनियम लागू किया गया था, किंतु इसकी लचर व्यवस्था और शासन-प्रशासन की उदासीनता के चलते प्रदेश में गोवध और गोतस्करी पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा सकता था। 2017 में प्रदेश की कमान संभालने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोवध निवारण अधिनियम को संशोधित करते हुए 2020 में नया अधिनियम लागू की। इस संशोधन के बाद गोवध से जुड़े मामलों में सजा को बेहद कठोर कर दिया गया। कानून के तहत गोवध करने या उसका प्रयास करने पर 3 साल से लेकर 10 साल तक की कठोर कारावास और 3 लाख से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।  इतना ही नहीं, यदि कोई व्यक्ति दोबारा उसी अपराध में पकड़ा जाता है तो उसके लिए सजा दोगुनी तक हो सकती है।

गोवंश को भूखा रखना भी अपराध
योगी सरकार ने पहली बार गोवंश के प्रति क्रूरता को भी गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा। यदि कोई व्यक्ति गायों को भोजन-पानी नहीं देता, उन्हें घायल करता है या ऐसी स्थिति में छोड़ता है जिससे उनके जीवन पर संकट आए, तो उसे 1 से 7 साल तक की जेल और 1 से 3 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। यानी सरकार ने केवल गोवध रोकने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि गोवंश के संरक्षण और सम्मानजनक देखभाल को भी कानूनी सुरक्षा दी।

वाहनों की जब्ती और फरार आरोपियों की फोटो सार्वजनिक
कानून के तहत गोवंश के अवैध परिवहन में इस्तेमाल वाहनों को जब्त करने का प्रावधान किया गया। यदि वाहन मालिक यह साबित नहीं कर पाता कि अपराध उसकी जानकारी के बिना हुआ, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा फरार आरोपियों की फोटो सार्वजनिक स्थानों पर लगाने की व्यवस्था भी की गई। अपराधों को गैर-जमानती बनाया गया ताकि आरोपी आसानी से छूट न सकें। 

बीते 9 साल में 36 हजार लोग हुए गिरफ्तार, 83.32 करोड़ की संपत्तियां भी जब्त
योगी सरकार ने गोतस्करी और गोवध के खिलाफ केवल कानून बनाकर ही नहीं छोड़ा, बल्कि जमीनी स्तर पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई भी की। वर्ष 2017 से 2025 के बीच प्रदेश में गो हिंसा और गोतस्करी से जुड़े मामलों में लगभग 36 हजार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 13,793 आरोपियों पर गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई हुई, जबकि 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट लगाया गया। इसके अलावा 178 आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) तक लगाया गया। सरकार ने आर्थिक चोट पहुंचाने की रणनीति अपनाते हुए 83 करोड़ 32 लाख रुपये से अधिक की संपत्तियां भी जब्त कीं। इन आंकड़ों को योगी सरकार इस बात के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करती है कि उत्तर प्रदेश में गोवध और गोतस्करी के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति केवल भाषणों तक सीमित नहीं, बल्कि कठोर प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में जमीन पर दिखाई भी देती है।

यूपी में गोसंरक्षण का बड़ा मॉडल
योगी आदित्यनाथ की व्यक्तिगत पृष्ठभूमि भी गोरक्षा नीति में साफ दिखाई देती है। गोरक्षपीठ से  जुड़े होने के कारण उन्होंने गाय को केवल धार्मिक प्रतीक नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भारतीय जीवन पद्धति का केंद्र माना। यही वजह है कि सरकार ने कानून के साथ-साथ गोसंरक्षण के लिए प्रशासनिक और आर्थिक मॉडल भी विकसित किए। 20वीं पशुगणना की रिपोर्ट के आधार पर उत्तर प्रदेश में इस समय लगभग 1 करोड़ 88 लाख गोवंश हैं। सरकार करीब 7,500 गोसंरक्षण केंद्रों के माध्यम से लगभग 13 लाख गोवंश का संरक्षण कर रही है। वहीं मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत अब तक सवा लाख से अधिक पशुपालकों को 1.80 लाख से ज्यादा गोवंश सौंपे जा चुके हैं। सरकार प्रति गोवंश 1500 रुपये प्रतिमाह डीबीटी के माध्यम से सीधे पशुपालकों के खाते में भेज रही है। दुग्ध उत्पादन में भी बड़ा उछाल दर्ज हुआ है। वर्ष 2016-17 में जहां उत्पादन 277 लाख मीट्रिक टन था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 388 लाख मीट्रिक टन के पार पहुंच गया है। 

अब योगी सरकार गोशालाओं को गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल से जोड़कर उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनाने की दिशा में काम कर रही है। जैविक खाद, प्राकृतिक कीटनाशक और गो आधारित उत्पादों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और खेती की लागत घटाने की रणनीति तैयार की गई है।