लालगंज (बस्ती) में दर्दनाक घटना: बोर्ड रिजल्ट से पहले 14 वर्षीय छात्रा ने की आत्महत्या
Tragic incident in Lalganj (Basti)
लालगंज (बस्ती)। यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित होने से पहले ही हाई स्कूल कि छात्रा ने कमरे से फंदे से लटक कर अपना जान दे दी। घटना लालगंज कस्बे की है। छोटेलाल प्रजापति अपने घर से कुछ दूर एक टंकी में किराने की दुकान चलाते हैं और उनकी पत्नी पुष्पा देवी कुदरहा ब्लाक में आशा बहू के पद पर कार्यरत हैं।
दो घंटे पहले लगाया फंदा
वह अपने लड़के के साथ मीटिंग में गई हुई थीं। घर पर उनकी 14 वर्षीय बेटी ज्योति अकेले ही थी। यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम आने से लगभग दो घंटा पहले ही अज्ञात कारणों से वह अपने मकान के एक कमरे में दुपट्टे के सहारे लटक कर अपनी जान दे दी।
हलांकि, परीक्षा परिणाम आने के बाद घर वालों को पता चला कि वह हाई स्कूल कि परीक्षा में उसे 63 प्रतिशत अंक से पास हुई है। पुलिस ने शव का पंचायत नामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एसएचओ लालगंज विनय कुमार पाठक ने बताया कि मृत्यु के कारणों की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर मृत्यु की वजह का पता चल सकेगा।
मनोचिकित्सको की बड़ी भूमिका
रिजल्ट से पहले और बाद में छात्रों में होने वाले तनाव से बचाने के लिए मनोचिकित्सक परिवार की बड़ी भूमिका मानते हैं। उनका कहना है कि अभिभावक बच्चों को बताएं कि परीक्षा में आए कम अंक या असफलता भी सीखने की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है।
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा. रवि राणा के अनुसार रिजल्ट से पहले और बाद में बच्चों का तनाव कम करने में अभिभावकों की बड़ी भूमिका है। उन्हें बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि रिजल्ट चाहे जो भी हो, उनके लिए सदा नए अवसर हैं। बच्चों के साथ मिलकर भविष्य की नई योजनाएं बनाएं।
बच्चों को बताएं कि परीक्षा या किसी भी क्षेत्र में असफलता भी हमारे सीखने का एक हिस्सा है। अगर रिजल्ट उम्मीदों के हिसाब से नहीं आता तो उन्हें हिम्मत दें और आगे बढ़ने और बेहतर करने के लिए प्रेरित करें। तनाव को कम करने के लिए योग और मेडिटेशन बहुत अच्छा तरीका है। इससे बच्चों का मन शांत रहेगा और रिजल्ट को लेकर होने वाली नेगेटिव सोच से दूर होगी।
बच्चों की दूसरों से तुलना करने से बचें
डा. रवि राणा कहते हैं कि कई बार माता-पिता या शिक्षक अनजाने में ही बच्चों की तुलना दूसरों से कर देते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास कम होता है। बच्चों को समझाएं कि हर व्यक्ति की अपनी अलग योग्यता होती है और किसी दूसरे से तुलना करना उचित नहीं है। उन्हें उनकी खुद की प्रोग्रेस पर ध्यान करने के लिए प्रोत्साहित करें।