Apple

अबकी बार हिमाचली सेब का 15 दिन पहले चखने को मिलेगा स्वाद, देखें कैसे जल्दी आई फसल

शिमला। हिमाचली सेब (Himachali apple) इस बार 10 से 15 दिन पहले तैयार हो जाएगा। सेब को पसंद करने वाले लोगों के लिए यह अच्छी खबर है। इन दिनों देशभर के बाजारों में विदेशों से आयात किया जा रहा बीते साल का कोल्ड-स्टोर में रखा हुआ सेब बिक रहा है। ऐसे में हिमाचल का सेब जल्दी मंडियों में आने के बाद देशवासियों को ताजा सेब खाने को मिलेगा।

आमतौर पर हिमाचल प्रदेश के 5000 फीट से कम ऊंचे क्षेत्रों में टाइड मैन किस्म का सेब 15 जून के बाद तैयार होता है। इस बार पहले सप्ताह में मंडियों में दस्तक देना शुरू हो जाएगा। इसी तरह रेड जून, अर्ली-रेड, स्पर किस्में भी जून के पहले पखवाड़े में ही मंडियों में आ सकती है। फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने बताया कि गर्म मौसम के कारण सब फल जल्दी तैयार हो रहे हैं, लेकिन सूखे से फलों को नुकसान हो रहा है।

इस वजह से जल्दी तैयार हो रहा सेब
इस बार मार्च और अप्रैल महीने में गर्मियों ने पिछले कई दशकों के रिकार्ड तोड़े है। इसी वजह से सेब की दो सप्ताह पहले फ्लावरिंग हुई है। अर्ली फ्लावरिंग की वजह से ही सेब जल्दी तैयार हो रहा है। इन दिनों सेब का दाना काफी बड़ा आकार ले चुका है।

दूसरे फल भी जल्दी हो रहे तैयार
सेब के साथ साथ नाशपाती, प्लम, खुमानी, बादाम, आड़ू, चैरी इत्यादि फल भी जल्दी तैयार हो रहे हैं। इन पर भी गर्म मौसम का असर पड़ा है।
मौसम चक्र के कारण सेब जल्दी तैयार होने से बागवानों को फायदा मिलेगा, क्योंकि अक्तूबर महीने में कश्मीर का सेब मंडियों में आने से प्रदेश के बागवानों को कई बार अच्छे दाम नहीं मिल पाते हैं। ऐसे में प्रदेश के अधिक ऊंचे क्षेत्रों में जो सेब सीजन 15 अक्तूबर तक खत्म होने की और बढ़ता था, वह इस बार अक्तूबर के पहले पखवाड़े में ही खत्म हो सकता है।

सूखे से हो रहा नुकसान
लंबे ड्राई-स्पेल ने बागवानों को जरूर चिंता में डाल दिया है। सूखे की वजह से विभिन्न फलों को 65 करोड़ से अधिक का नुकसान पहले ही आंका जा चुका है। इससे किसी भी फल का अच्छा साइज नहीं बना पा रहा है क्योंकि 26 फरवरी के बाद सेब बहुल कई स्थानों पर अच्छी बारिश नहीं हो पा रही है। इससे बगीचों में नमी पूरी तरह सूख गई है।

हिमाचल के बागवान 4500 करोड़ रुपए से अधिक का हर साल सेब उत्पादन करते हैं। राज्य के अढ़ाई लाख से अधिक परिवारों की रोजी-रोटी सेब पर निर्भर करती है लेकिन इस बार ज्यादातर बागवानों पर सूखे की भयंकर मार पड़ी है। इससे बागवान चिंतित है।