चंडीगढ़ में सजी देवभूमि की सांस्कृतिक छवि, उत्तरायणी कौतिक–2026 भव्यता के साथ संपन्न

चंडीगढ़ में सजी देवभूमि की सांस्कृतिक छवि, उत्तरायणी कौतिक–2026 भव्यता के साथ संपन्न

Uttarayani Kautik-2026

Uttarayani Kautik-2026

चंडीगढ़, 4 जनवरी, 2026: Uttarayani Kautik-2026: देवभूमि दानपुर घाटी वेलफेयर सोसायटी (रजि.), चंडीगढ़ द्वारा आयोजित पंजाब कला भवन, सेक्टर–16, चंडीगढ़ में आयोजित उत्तरायणी कौतिक–2026 अत्यंत भव्यता, अनुशासित प्रबंधन एवं व्यापक जनसहभागिता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस सांस्कृतिक महोत्सव ने चंडीगढ़ की धरती पर उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपरा, संगीत, नृत्य एवं पारंपरिक खान-पान की सजीव और प्रभावशाली झलक प्रस्तुत की, जिससे पूरा वातावरण उत्तराखंडमय हो उठा।संस्था के मीडिया प्रभारी शशि प्रकाश पांडे ने बताया कि
कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के मंत्री माननीय श्री शिव सिंह बिष्ट, मुख्य अतिथि तथा विधायक कपकोट एवं कार्यक्रम अध्यक्ष श्री सुरेश गढ़िया की गरिमामयी उपस्थिति रही। दोनों अतिथियों ने आयोजन की भव्यता, अनुशासन और सांस्कृतिक स्तर की बहुत ही प्रशंसा करते हुए कहा कि चंडीगढ़ में उत्तराखंड की संस्कृति का ऐसा सजीव और सशक्त स्वरूप प्रस्तुत होना अत्यंत सराहनीय है तथा संस्था के प्रति आभार व्यक्त किया।
वही अति विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री सतनाम सिंह संधू, (राज्यसभा सांसद एवं चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के संस्थापक), तथा श्री संजय टंडन, (पूर्व भाजपा अध्यक्ष चंडीगढ़ एवं वर्तमान सह-प्रभारी हिमाचल प्रदेश) व एरिया पार्षद भाजपा सौरव जोशी, भाजपा चंडीगढ़ महिला मोर्चा अध्यक्ष हीरा नेगी, भाजपा चंडीगढ़ उत्तराखंड प्रकोष्ठ अध्यक्ष भूपिंदर शर्मा , पूर्व डिप्टी मेयर भाजपा चंडीगढ़ अनिल दुबे, व भाजपा पार्षद गुरबख्श रावत उपस्थित रहे। उन्होंने उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक व्यंजनों और सांस्कृतिक परिवेश की खुले मन से सराहना की। अतिथियों ने विशेष रूप से मडुए की रोटी, भट की चुटकानी ,गडेरी की सब्जी, गेठी के गुटके एवं पारंपरिक पहाड़ी चटनियों का स्वाद लिया और बहुत ही प्रशंसा की। इस वर्ष आयोजन का प्रमुख आकर्षण अल्मोड़ा की प्रसिद्ध बाल मिठाई रही, जिसने सभी का मन मोह लिया।
इसके साथ ही उत्तराखंड के पारंपरिक आभूषणों—गलोबंद, नथ एवं अन्य लोक आभूषणों की प्रदर्शनी ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। इन स्टॉलों पर दिनभर भारी भीड़ रही और लोगों ने उत्साहपूर्वक खरीदारी की।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार आनंद सिंह कोरंगा ने घूंगराली धातूली, फकीरा चंद चिनियाल ने छणां छण आंसू आए , कुंदन सिंह कोरंगा ने भी अपने गानों से दर्शकों का मन खूब मोहा, कमल मेहरा ने आजा मेरा दानपुरा, हेमा ध्यानी ने घास काटुला इजू , गंगा सिंह कोश्यारी  ने उत्तरायणी कौतिक लागी र एवं दुर्गा सागर  ने मेरी माई हे भगवती द्वारा प्रस्तुत लोकगीतों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे  दर्शको को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकधुनों और पारंपरिक गीतों पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे। कार्यक्रम में बाल कलाकारों की आत्मविश्वासपूर्ण एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं । नन्हे कलाकारों की कला, मंचीय आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की अतिथियों एवं दर्शकों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
सोसायटी के पदाधिकारियों ने बताया कि ट्राई-सिटी में आयोजित यह उत्तरायणी कौतिक न केवल प्रवासी उत्तराखंडियों को एक सूत्र में जोड़ने में सफल रहा, बल्कि इससे देश-विदेश तक उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और विरासत का सशक्त संदेश भी गया है।
आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, कलाकारों, बाल कलाकारों, सहयोगियों, स्वयंसेवकों एवं उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तरायणी कौतिक–2026 उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने की दिशा में एक स्मरणीय एवं प्रेरणादायी आयोजन सिद्ध हुआ है और भविष्य में भी होते रहेंगे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संस्था के  पदाधिकारी कुंदन सिंह कोरंगा, आनंद सिंह कोरंगा, शशि प्रकाश पांडे, नंदन सिंह कोरंगा, दर्शन सिंह कोरंगा, दान सिंह गढ़िया, हरीश सिंह कोरंगा, चंचल सिंह कपकोटी, रमेश कोरंगा, बलवंत मेहता, सुरेन्द्र सिंह कोरंगा, विशाल कोरंगा, प्रताप सिंह कोरंगा, कुंवर सिंह कोरंगा, राजेंद्र सिंह, टीका मेहता, उमेद ओली, दीवान सिंह ऐठानी, राम सिंह मेहता, चंचल सिंह कोरंगा, दीपक कोरंगा, कुंदन सिंह दफोटी, दयाल कोरंगा, हीरा सिंह माकुनी, सहित अन्य सदस्यों की भूमिका सराहनीय रही, कुमाऊं सभा, गढ़वाल सभा व सभी उत्तराखंडी संस्थाओं के पदाधिकारी गण व सभी उत्तराखंडी कीर्तन मण्डली के पदाधिकारी गण मौजूद रहे,