भागवत केवल भगवान की कथा नहीं, बल्कि भक्तों की कथा है: भागवत भास्कर श्रीकृष्ण चंद्र शास्त्री (ठाकुर जी)
Bhagavat is not merely the story of God
भगवान से मत मांगो, भगवान को मांगो तो जीवन सफल हो जाएगा: श्री कृष्ण चंद शास्त्री (ठाकुर जी)
बघौला में श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन
पलवल। दयाराम वशिष्ठ: Bhagavat is not merely the story of God: बघौला में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के अंतिम दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर वृंदावन से पधारे परमपूज्य विश्वविख्यात भागवत भास्कर श्रीकृष्ण चंद्र शास्त्री (ठाकुर जी) ने अपने आशीर्वचनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उनके आगमन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर उमड़ पड़े।

भागवत भास्कर श्रीकृष्ण चंद्र शास्त्री (ठाकुर जी) ने अपनी मधुर वाणी में श्रीमद् भागवत कथा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत केवल भगवान की कथा नहीं, बल्कि भक्तों की कथा है। परमात्मा के मुख से भक्तों की महिमा का जो वर्णन हुआ है, वही भागवत का सार है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि भगवान की भक्ति अवश्य करें, लेकिन उस भक्ति के बदले कुछ मांगें नहीं। भगवान से मांगकर हम उन्हें अपनी दृष्टि में सीमित कर देते हैं, जबकि भगवान सर्वज्ञ हैं। उन्होंने कहा कि पूजा, आरती, स्तुति और भजन अवश्य करें, लेकिन निस्वार्थ भाव से। निस्काम भक्ति सर्वोत्तम है, और यदि वह संभव न हो तो सकाम भक्ति भी श्रद्धा से करनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि यदि मनुष्य भगवान को ही मांग ले, तो संसार की सभी वस्तुएं स्वतः प्राप्त हो जाती हैं।
इस कथा का आयोजन बघौला गांव की पूर्व सरपंच स्वर्गीय मूर्ति देवी के आशीर्वाद से उनके पुत्र मदन मोहन, घनश्याम, लीलांत व दिनेश द्वारा कराया गया। कथा समापन के उपलक्ष्य में मंगलवार को भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
भागवत भास्कर ने आयोजकों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि जिस घर में भागवत कथा होती है, वहां समृद्धि और प्रतिष्ठा दोनों बढ़ती हैं तथा पूरे गांव का विकास होता है।
कथा के अंतिम दिन बाल व्यास चिरंजीव गोपाल भारद्वाज ने श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रोता भावुक हो उठे। उन्होंने इस प्रसंग के माध्यम से सच्ची मित्रता, समर्पण और भक्ति का संदेश दिया।