श्रीमद्भागवत कथा में राजा हरिश्चंद्र के प्रसंग को सुन भाव विभोर हुए श्रोतागण, छलके आंसू
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श्रीमद्भागवत कथा में राजा हरिश्चंद्र के प्रसंग को सुन भाव विभोर हुए श्रोतागण, छलके आंसू

Shrimad Bhagwat Katha

Shrimad Bhagwat Katha

राजा ने बिना शुल्क अपने ही पुत्र के दाहसंस्कार करने से किया पत्नी से इंकार

पलवल। दयाराम वशिष्ठ: Shrimad Bhagwat Katha: बघौला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को राजा हरीश्चंद्र की कथा का सुंदर वर्णन किया। कथा व्यास पंडित बृजभूषण ने सुंदर तरीके से राजा हरिश्चंद्र के प्रसंग को सुनाते हुए भक्तों को सत्य और धर्म का मार्ग अपनाने का संदेश दिया।

Shrimad Bhagwat Katha

बघौला में देवी सहाय परिवार की ओर से आयोजित इस कथा में व्यास पंडित बृजभूषण ने श्रोताओं को कथा सुनाते हुए कहा कि सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने महर्षि विश्वामित्र को स्वप्न में अपना सारा राज्य दान कर दिया था। गुरु दक्षिणा (ऋण) चुकाने के लिए राजा को अपनी पत्नी रानी तारा और पुत्र रोहित के साथ अपने ही राज्य को छोड़ना पड़ा। राजा को अपनी पत्नी और बेटे को अलग-अलग बेचना पड़ा। वे खुद श्मशान में चांडाल के सेवक बने ताकि सत्य और वचन की रक्षा हो सके।

अपने पुत्र के निधन पर रानी जब दाहसंस्कार के लिए कफन माँगने श्मशान आईं, तब भी राजा ने बिना शुल्क (कर) कफ़न देने से मना कर दिया। इस कथा को सुन श्रोतागण भाव विभोर हो उठे। इस दौरान श्रोतागण अपने अश्रुओं को थाम नहीं सके। अंत में, उनकी सत्यनिष्ठा से प्रसन्न होकर भगवान प्रकट हुए। व्यास ने कहा कि ईश्वर सत्य की राह पर चलने वालों की कठिन परीक्षा तो लेते हैं, लेकिन कभी हारने नहीं देते। कथा के दौरान मां गंगा की महिमा का सुंदर बखान किया।