रिश्वत केस में निलंबित डीआईजी Harcharan Singh Bhullar और सह आरोपी Krishan Sharda ने संज्ञान आदेश वापस लेने की लगाई अर्जी
- By Gaurav --
- Monday, 16 Mar, 2026
Suspended DIG Harcharan Singh Bhullar
सीबीआई मामलों की विशेष अदालत में चल रहे रिश्वत मामले में निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर और सह आरोपी व कथित बिचौलिए कृष्ण शारदा ने अदालत द्वारा 13 मार्च 2026 को पारित संज्ञान आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए अलग-अलग अर्जियां दाखिल की हैं। अर्जी में सज्ञान आदेश को चुनौती दी गई है l अर्जी पर सीबीआई को 27 मार्च के लिए नोटिस जारी किया गया है l इसी दिन दोनों आरोपियों की वी सी पेशी भी होगी l
आरोपी हरचरण सिंह भुल्लर की ओर से उनके वकील एस.पी.एस. भुल्लर ने अदालत में अर्जी दायर करते हुए कहा है कि अदालत ने 13 मार्च को मामले में संज्ञान ले लिया, जबकि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किया गया चालान अभी अधूरा है। बचाव पक्ष के अनुसार मामले से संबंधित सीएफएसएल (केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला) की रिपोर्ट और उससे जुड़े दस्तावेज अभी तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जबकि अदालत के आदेश में भी इसका उल्लेख किया गया है।
अर्जी में यह भी कहा गया है कि अभियोजन स्वीकृति (प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन) भी वैध नहीं है। बचाव पक्ष का कहना है कि हरचरण सिंह भुल्लर पंजाब सरकार के कर्मचारी रहे हैं, इसलिए अभियोजन चलाने से पहले राज्य सरकार की सहमति आवश्यक थी, जो नहीं ली गई। इसके अलावा अर्जी में मामले के अधिकार क्षेत्र (जूरिस्डिक्शन) को भी चुनौती दी गई है। इस संबंध में पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक सिविल रिट याचिका दायर की गई थी, जिसे बाद में बेहतर तथ्यों के साथ नई याचिका दाखिल करने की अनुमति लेकर वापस ले लिया गया था, क्योंकि उस समय तक चालान पेश नहीं हुआ था।
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि अभी तक मामले में आरोप तय नहीं हुए हैं और सीएफएसएल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, इसलिए इस चरण में संज्ञान आदेश को वापस लिया जाना न्यायहित में होगा।
वहीं सह आरोपी और कथित बिचौलिए कृष्ण शारदा की ओर से उनके वकील मतविंदर सिंह ने भी संज्ञान आदेश को वापस लेने की अर्जी दाखिल की है। अर्जी में कहा गया है कि अदालत ने 13 मार्च को संज्ञान आदेश पारित करते हुए अभियोजन पक्ष के तथ्यों का उल्लेख करते हुए यह कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपियों के खिलाफ अपराध बनता है।
बचाव पक्ष का कहना है कि संज्ञान आदेश पारित करने से पहले न तो सीबीआई के वकील और न ही बचाव पक्ष के वकील की दलीलें सुनी गईं। इसके अलावा आदेश में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की किस धारा के तहत यह आदेश पारित किया गया है।
अर्जी में यह भी कहा गया है कि आदेश में अभियोजन के तथ्यों और दस्तावेजों पर विस्तृत चर्चा करते हुए प्रथम दृष्टया मामला बनना बताया गया है, जिससे आगे चलकर आरोप तय करने के चरण में निष्पक्ष सुनवाई की संभावना प्रभावित हो सकती है।
बचाव पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि अभी तक मामले में आरोप तय करने की सुनवाई भी निर्धारित नहीं हुई है, क्योंकि अभियोजन के दस्तावेजों की प्रतियां अभी भी आरोपियों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। ऐसी स्थिति में यदि संज्ञान आदेश वापस नहीं लिया गया तो आरोपियों को गंभीर नुकसान हो सकता है।
दोनों आरोपियों ने अदालत से अनुरोध किया है कि 13 मार्च 2026 को पारित संज्ञान आदेश को न्यायहित में वापस लिया जाए।