जयपुर में अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
Supreme Court's Strict Remarks on Illegal Construction in Jaipur
Supreme Court's Strict Remarks on Illegal Construction in Jaipur: जयपुर में अवैध निर्माण और जमीन के गलत इस्तेमाल के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के रवैये पर सख्त नाराजगी जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शहर में विकास और भवन निर्माण की निगरानी करने वाली एजेंसी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती. सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट के न्याय मित्र अजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि JDA ने अब तक न तो कोर्ट में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, और न ही कोई शपथ-पत्र दाखिल किया है. उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें जयपुर के लोगों से अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन से जुड़ी कई शिकायतें मिली हैं.
इस पर न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने साफ कहा कि शहर में भवन निर्माण योजनाओं को मंजूरी देने, भूमि उपयोग को नियंत्रित करने और भवन नियमों को लागू कराने की जिम्मेदारी जिस प्राधिकरण की है, उसे कोर्ट के सामने जवाब देना ही होगा.
JDA से मांगा जवाब
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि JDA यह बहाना नहीं बना सकता कि मामले में गलती से नगर निगम को पक्षकार बनाया गया है. विकास और निर्माण गतिविधियों की निगरानी करने वाली एजेंसी को हर हाल में जवाब देना पड़ेगा. कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे नया शपथ-पत्र दाखिल करें और बताएं कि अवैध निर्माणों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है. इसमें सीलिंग, ध्वस्तीकरण और अन्य कानूनी कदमों की पूरी जानकारी देनी होगी. यह शपथ-पत्र विभागों के प्रमुख अधिकारियों को स्वयं देना होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में भवन निर्माण नियमों और भूमि उपयोग कानूनों के बड़े पैमाने पर हो रहे उल्लंघनों पर भी चिंता जताई. कोर्ट को बताया गया कि कई जगहों पर स्वीकृत नक्शों से हटकर निर्माण किए गए हैं और नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है.
इसके साथ ही कोर्ट ने अवैध निर्माण से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे अपीलीय और अर्ध-न्यायिक प्राधिकरणों को भी निर्देश दिया है कि लंबित मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर करने का प्रयास किया जाए.
अगली सुनवाई में कोर्ट देखेगी आदेशों का पालन
अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी. तब सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि JDA समेत देशभर की संबंधित एजेंसियों ने उसके आदेशों का कितना पालन किया है. जयपुर में लगातार सामने आ रहे अवैध निर्माण और भू-उपयोग नियमों के उल्लंघन के मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती JDA के लिए बड़े संदेश के रूप में देखी जा रही है.