Wednesday, September 18, 2019
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किसान धान की बजाए फलों, फूलों, दलहन और तिलहन की खेती की ओर दें विशेष ध्यान : विज

कम जमीन में अधिक आय लेने के प्रयासों से मजबूत होगी किसानों की आर्थिक स्थिति

खेत स्वस्थ रहेंगे तो प्राणी मात्र का स्वास्थ्य भी रहेगा स्वस्थ

अंबाला। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि जमीन के स्वास्थ्य का प्राणियों के स्वास्थ्य से सीधा संबध है। जब खेतों की तासीर स्वस्थ होगी तो प्राणी मात्र का स्वास्थ्य भी सही रहेगा। देसी भाषा में कहा जाए तो पेट को ठीक रखने के लिए खेत को भी स्वस्थ रखना होगा। जमीन के नीचे के जल स्तर को संरक्षित एवं संर्वधित रखना हम सबकी सांझी जिम्मेदारी है। सभी को चाहिए कि वे पानी का सदुपयोग करें। व्यर्थ में जाया नहीं जाने दें। जमीन के नीचे का जल स्तर न केवल किसानों के लिए बल्कि आम लोगों के लिए भी एक गम्भीर विषय बन चुका हैं। तथ्य यह भी हैं कि गिरता भू-जलस्तर वर्तमान दौर में एक चिंतन का विषय लेकर आया है, इस पर गौर करने की जरूरत है। घटते जल स्तर को संतुलित करने के लिए सरकार के विभागों ने रूपरेखा तैयार करके काम करना शुरू कर दिया है। इन दिनों कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को धान की सीधी बिजाई करने की सलाह दे रहे हंै, क्योंकि धान रोपाई की पारम्परिक विधि में पानी की अधिक जरूरत पड़ती हैं, जो गिरते जलस्तर की समस्या को और अधिक गंभीर बना देती है। इसके अलावा सरकार और कृषि विभाग किसानों को मक्का की खेती के लिए भी प्रोत्साहित कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि फसलों के विविधिकरण से जमीन की उर्वरा ताकत मे वृद्घि होती है। किसानों को चाहिए कि वे धान की बजाए फसलों के विविधिकरण के दृष्टिïगत फलों, फूलों, सब्जियों, दलहन और तिलहन की खेती की ओर विशेष ध्यान दें। खूम्बी उत्पादन भी किसानों के लिए फायदे का सौदा है। सरकार द्वारा किसान हितैषी कई योजनाएं और परियोजनाएं चलाई गई है। किसानों को इनका फायदा उठाना चाहिए। उन्होने यह भी कहा कि किसान मिट्टïी के स्वास्थ्य की भी समय-समय पर जांच करवाते रहें।

ऐसे होती हैं धान की सीधी बिजाई

कृ षि विशेषज्ञों के अनुसार धान की सीधी बिजाई पारम्परिक धान की रोपाई से अलग हैं। जहां आमतौर पर खेत में पानी भरकर धान की पौध की रोपाई की जाती है वहीं इस विधि में सूखे खेत में ही मशीन की सहायता से बीज बोया जाता है। समय-समय पर पानी से सिंचाई की जाती हैं। इस विधि से काफी मात्रा में पानी की बचत की जा सकती हैं। प्रति वर्ष विभाग के प्रयास व किसानों की जागरूकता के कारण धान की सीधी बिजाई का रकबा बढ़ रहा हैं। विभाग के अधिकारियों के अनुसार सीधी बिजाई करने वाले किसानों को विभाग की ओर से अनुदान राशि देने का भी प्रावधान है। अनुदान राशि सीधे किसानो के बैंक अकांउट में जाएगी। इसके लिए किसान को सरकारी दुकान से ही बीज लेना होगा। वहीं बीज व फसल में प्रयोग करने वाले खाद दवाईयों का बिल भी किसान को विभाग के कार्यालय में जमा करवाना होगा।

नहीं खलेगी मजदूरों की कमी

कृषि क्षेत्र में किसानों के समक्ष इस समय मजदूरों की कमी सबसे प्रमुख समस्या हैं। आए दिन मजदूरों की कमी के कारण किसानों की खेती प्रभावित होती देखी जा रही हैं, लेकिन धान की सीधी बिजाई में मजदूरों की जरूरत भी नहीं पड़ती। केवल एक किसान ही मशीन की सहायता से धान की बिजाई कर सकता हैं। ऐसा करने से प्रति एकड़ उत्पादन के साथ-साथ प्रति एकड़ आय में भी वृद्घि होगी।

लागत में आएगी कमी

अगर किसान पारम्परिक विधि से हटकर सीधी धान की बिजाई करें तो इससे धान की फसल पर आने वाली लागत भी करीब आधी रह जाती हैं। वहीं दूसरी ओर कृषि विभाग से दी जाने वाली अनुदान राशि से किसानों को दोहरा लाभ होता हैं, जिससे उनकी लागत और अधिक कम हो जाती हैं। इससे किसानों को प्रति एकड़ लागत के मुकाबले अधिक मुनाफा होगा। धान की सीधी बिजाई करने वाले किसान अब इसकी बिजाई कर सकते हैं। इस विधि में पानी कम मात्रा में लगता हैं। जबकि धान रोपाई की तिथि सरकार की ओर से जल संकट को देखते हुए 15 जून के बाद की निर्धारित की गई है। रोपाई विधि में पानी अधिक मात्रा में लगता हैं। धान की सीधी बिजाई से भी किसान को उतनी ही पैदावार प्राप्त होती है, जितनी की रोपाई विधि द्वारा वहीं किसानों को सीधी बिजाई से मुनाफा अधिक होता है क्योंकि इस विधि पर लागत कम आती है। अब किसान इस बारे में जागरूक होते जा रहे हैं। इसलिए प्रतिवर्ष धान की सीधी बिजाई का रकबा बढ़ रहा है।

 

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