बस्तर में 'शांति' के बाद सुरक्षा ऑडिट शुरू: 60 हजार जवानों की वापसी का रोडमैप तैयार; जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा घटने पर छिड़ी सियासी जंग

बस्तर में 'शांति' के बाद सुरक्षा ऑडिट शुरू: 60 हजार जवानों की वापसी का रोडमैप तैयार; जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा घटने पर छिड़ी सियासी जंग

Security Audit Begins in Bastar Following Peace

Security Audit Begins in Bastar Following 'Peace

रायपुर। Security Audit Begins in Bastar Following 'Peace, छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा की समाप्ति के साथ ही अब सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा होगी। बस्तर में अभी लगभग 60 हजार सुरक्षाबलों के जवान तैनात हैं, जो कि एक साल तक स्थिति सामान्य होने तक बस्तर में ही रहेंगे। इनमें 40 हजार अकेले केंद्रीय सुरक्षा बल हैं। इसके बाद उनकी वापसी शुरू हो जाएगी।

वहीं, 300 से अधिक जनप्रतिनिधियों के लिए सुरक्षा में तैनात करीब 1,200 अतिरिक्त जवानों को भी हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस प्रश्न उठा रही है कि जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दावा कर रहे हैं कि सशस्त्र माओवाद खत्म हो गया है तो बस्तर में फोर्स और जनप्रतिनिधियों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत क्यों पड़ रही है?

इस पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने पलटवार कर कहा कि उनकी सरकार बस्तर में शांति लाने की दिशा में कार्यरत है। हम चाहते हैं कि किसी भी व्यक्ति को अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत ही न पड़े। इन विधायकों की सुरक्षा वापसी की चर्चा राज्य सरकार ने सुरक्षा घेरे का रिव्यू शुरू कर दिया है।

प्राथमिक चरण में राजिम के भाजपा विधायक रोहित साहू, बिंन्द्रानवागढ़ के कांग्रेस विधायक जनक ध्रुव और पूर्व विधायक डमरुधर साहू की सुरक्षा से अतिरिक्त बल हटाने की बात सामने आई है। राज्य के 13 अति-विशिष्ट व्यक्तियों (मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री) को वर्तमान में जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त है।

इसके अलावा 38 को जेड, 35 को वाई प्लस और 121 नेताओं को एक्स श्रेणी का सुरक्षा कवर मिला हुआ है। बस्तर संभाग के नेताओं को हाल ही में विशेष कमांडो सुरक्षा दी गई थी।

ऐसे तय होती है सुरक्षा की श्रेणी

राज्य में सुरक्षा का निर्धारण प्रोटेक्शन रिव्यू ग्रुप (पीआरजी) की बैठक में होता है। रेंज के आइजी, संबंधित जिले के कलेक्टर और एसपी सुरक्षा की अनुशंसा करते हैं। गृह विभाग को प्रस्ताव भेजने के बाद खुफिया विभाग (आइबी) की रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा श्रेणी तय की जाती है।