Breaking News
Home » धर्म / संस्कृति » संतों-महापुरुषों ने हमेशा सहनशीलता का पाठ पढ़ाया: निरंकारी बाबा

संतों-महापुरुषों ने हमेशा सहनशीलता का पाठ पढ़ाया: निरंकारी बाबा

16 नवम्बर का दिन संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा सहनशीलता दिवस घोषित किया गया है और हम सहनशीलताकी बात कर रहे हैं। लेकिन हम चारों ओर असहनशीलता ही देख रहे हैं। आज कितनी ज्यादा असहनशीलता है और इसीलिए हम इतना ज्यादा उत्पीडऩ देख रहे हैं, इसीलिए हम इतना अधिक रक्तपात देख रहे हैं। इसलिए हम परिवारों में इतना ज्यादा बिखराव देख रहे हैं क्योंकि यदि परिवार के लोग एक-दूसरे के प्रति सहनशील नहीं होंगे तो परिवार का ताना-बाना ही बिखर जायेगा और इसके कारण खुशियां भी इसी तरह बिखर जाएगी जिस तरह एक पक्षी अपने पंखों के सहारे उड़ जाता है और हम इससे वंचित रह जाते हैं।

सन्तों-महापुरुषों ने हमें हमेशा सहनशीलता का पाठ पढ़ाया है। हमें शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के साथ रहना है। हमें मतभेदों को समझना चाहिए। सन्तों ने एकता की बात की है एकरुपता की बात नहीं की है। सन्तों ने हमें एकता के महत्व की शिक्षा दी है लेकिन क्या हुआ है और क्या हो रहा है? समाज के कुछ लोग, भले ही वो धार्मिक समूहों के रुप में हों या स्थापित धर्म हों या वो जो अभी भी कुल, जाति और सम्प्रदाय में बंटे हुए हैं, वो अभी भी असहनशील हैं। लेकिन सन्त सहनशील हैं। स्थापित धर्मों वाले दूसरों पर धर्म परिवर्तन के लिए ताकत का इस्तेमाल करते हैं, भय का वातावरण बनाते हैं ताकि वे उनका धर्म स्वीकार कर लें। वे एकरुपता लाना चाहते हैं कि मैं पगड़ी पहनता हूँ इसलिए तुम भी पकड़ी पहनो वरना तुम्हारा नामो निशान भी नहीं रहेगा।

जिस पैगम्बर को मैं सम्मान देता हूँ तुम भी उसका सम्मान करो। मैं जिस धर्मग्रन्थ को पढ़ता हूँ तुम भी उसी धर्मग्रन्थ को पढ़ो, तभी तुम सुरक्षित रहोगे। तो हम क्या देख रहे हैं, यही असहनशीलता का रुप देख रहे हैं और दूसरी ओर जागरुक लोग हैं जो सत्य के प्रति जाग्रत हैं, जागृत आत्माएं जो सन्तों-महापुरुषों की शिक्षाओं को समझ चुके हैं इसलिए वो अनेकता में एकता को स्वीकार करते हैं, एकरुपता को नहीं । तो साध संगत हमें इस विषय में बार बार कहा गया है कि हमें सहनशील रहना है।

Check Also

कर्ण और कृष्ण के बीच के रिश्तों के महत्वपूर्ण रहस्य

महाभारत कालीन रिश्ते और उनके द्वंद्व, जिसमें छल, ईर्ष्या, विश्वासघात और बदले की भावना का …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share
See our YouTube Channel