भागीरथी का बढ़ता जलस्तर बना खतरा, हर्षिल-धराली क्षेत्र में फिर मंडराया आपदा का साया

भागीरथी का बढ़ता जलस्तर बना खतरा, हर्षिल-धराली क्षेत्र में फिर मंडराया आपदा का साया

Rising water levels of the Bhagirathi pose a threat

Rising water levels of the Bhagirathi pose a threat

 उत्तरकाशी। Rising water levels of the Bhagirathi pose a threat, भागीरथी नदी का जलस्तर बढ़ने से पर्यटन स्थल हर्षिल फिर आपदा के साए में है। यहां हर्षिल और धराली के बीच बनी झील ने करीब दो हजार की आबादी को संकट में डाल दिया है।

तीन दिनों से भागीरथी नदी का जलस्तर बढ़ने से बनी आपदा की स्थिति बन गई है। बीते वर्ष गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के गेस्ट हाउस की सुरक्षा को लगाए गए पुश्ते पर दरारें पड़ने के साथ कटाव भी बढ़ गया है।

आर्मी कैंप की ओर भी कटाव की स्थिति बनी हुई है। सोमवार को भी सिंचाई विभाग के अफसरों की टीम ने स्थिति का जायजा लिया। साथ ही एक्सावेटर मशीन उतारकर चैनलाइजेशन का काम तेज किया गया।

शनिवार रात नदी का जलस्तर बढ़ने से आपदा का खतरा उत्पन्न हो गया था। ग्लेशियरों के पिघलने से बढ़े नदी के जलस्तर के चलते पूर्व में चैनलाइजेशन कर किनारे लगाया गया मलबे का टीला बह चुका है।

इस कारण वर्तमान में नदी का प्रवाह जीएमवीएन गेस्ट हाउस के पीछे तक पहुंच रहा है। नदी के कटाव के चलते देवदार के पेड़ बहकर आ रहे हैं। इससे आर्मी कैंप भी खतरे की जद में है।

सोमवार को सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता दरबान सिंह सरियाल ने अपनी टीम के साथ यहां स्थिति का जायजा लिया।

लोगों की चिंता इसलिए बढ़ी हुई है क्योंकि अभी केवल ग्लेशियरों के पिघलने से ही नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, मानसून सीजन की वर्षा तेज हुई तो भागीरथी के साथ इसकी सहायक नदियां उफान पर आएंगी।

इससे पहले से बनी झील का जलस्तर भी बढ़ेगा और ऐसे में यदि झील अचानक खुलती है तो यह नदी के किनारे बसे हर्षिल के लिए बड़ा खतरा हो सकती है।

पूर्व प्रधान बगोरी भवान सिंह व सुंदर सिंह ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ने से पूर्व में लगाए वायरक्रेट भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। जीएमवीएन के नीचे लगाए गए पुश्ते पर दरारें उभर आई हैं।

पिछले वर्ष आपदा ने बरपाया था कहर

बीते वर्ष खीरगंगा नदी में विनाशकारी बाढ़ आने से धराली कस्बा मलबे में दब गया था। आपदा में सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई। 68 लोग लापता हुए थे।

तेलगाड़ नदी के उफान पर आने से हर्षिल कैंप में नौ जवान लापता हुए थे। इनमें से दो जवानों के शव बरामद हुए हैं। हर्षिल व धराली के बीच भागीरथी नदी का प्रवाह बाधित होने से विशालकाय झील बन गई थी।

इस झील में करीब 18 से 20 दिनों तक गंगोत्री हाईवे का भी बड़ा हिस्सा जलमग्न रहने से गंगोत्री धाम व उत्तरकाशी के बीच संपर्क कट गया था।

हालांकि बाद में गंगोत्री हाईवे को किसी तरह बहाल किया गया। साथ ही झील को भी चैनलाइज कर इसका थोड़ा-बहुत पानी निकाला गया था, लेकिन अब भी झील पूरी तरह खाली नहीं हो पाई है।

हर्षिल-धराली के बीच झील नहीं है, वह तो सिल्ट भरी हुई है। पहले नदी नीचे बहती थी, अब वह सिल्ट के कारण छह-सात मीटर ऊंचा हो गया है, इस वजह से वह झील प्रतीत होती है। इसके निदान के लिए तो डि-सिल्टिंग करनी पड़ेगी। सिंचाई विभाग के एई व जेई की टीम ने हर्षिल में स्थिति का जायजा लिया है, जहां सुरक्षात्मक कार्य को प्राथमिकता देते हुए एक एक्सावेटर मशीन उतारकर आर्मी कैंप की ओर से चैनलाइजेशन का काम तेज किया जा रहा है। तटवर्ती क्षेत्र की सुरक्षा के लिए बाढ़ सुरक्षात्मक के कार्य किए जा रहे हैं।

-सचिन सिंघल, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग