ओबीसी वोटबैंक पर फिर फोकस, भाजपा ने तेज की सामाजिक पहुंच
Renewed Focus on OBC Vote Bank
लखनऊ। Renewed Focus on OBC Vote Bank, वर्ष 2014 से ओबीसी वोटों की चाल से सत्ता की चौखट पार करने वाली भाजपा एक बार फिर उनके बीच सामाजिक टोलियों के माध्यम से पहुंच रही है। सपा के पीडीए की धार से सतर्क भाजपा ओबीसी समाज की 75 में से 30 से ज्यादा जातियों को साधने पर विशेष होमवर्क कर रही है, जिनके वोटों की संख्या पांच हजार से ज्यादा है।
2024 लोकसभा चुनाव में सपा के पीडीए दांव से शिकस्त खाने के बाद भाजपा मौर्य, कुर्मी, कुशवाहा, कश्यप, निषाद, राजभर, सैनी, पाल एवं प्रजापति के बड़े वोटबैंक की गठरी कसने में जुटी है।
पांच अप्रैल को कश्यप जयंती के बहाने बड़ा संदेश देने का प्रयास है। छह मार्च को गाजियाबाद में भाजपा केे ओबीसी मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष एवं मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कश्यप-निषाद राष्ट्रीय अधिवेशन कर पार्टी के एजेंडे को धार दिया है।
भाजपा की सामाजिक टोलियां गांवों में पहुंचकर बताएंगी कि वर्ष 2014 से 2022 के बीच सभी चुनावों में ओबीसी वोटबैंक जीत की कुंजी बना।
इन्हीं समीकरणों की नींव पर पार्टी ने 2017 विधानसभा एवं 2019 लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में सपा के पीडीए की छतरी के नीचे ओबीसी जातियों के पहुंचने से भाजपा 62 से 33 सीटों पर अटक गई। भाजपा ने ओबीसी वोटों को रिझाने के लिए केंद्रीय मंत्री एवं कुर्मी समाज के पंकज चौधरी को कमान दी।
पिछड़े समाज के चेहरों को समायोजित करने का प्रयास
प्रदेश सरकार में पहले से ही उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के रूप में बड़े ओबीसी चेहरे हैं। जिला, क्षेत्र एवं प्रदेश इकाई में बड़ी संख्या में पिछड़े समाज के चेहरों को समायोजित करने का प्रयास है।
पिछले दिनों लखनऊ में केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह एवं तेलंगाना के विधायक टी राजा समेत कई बड़े लोध चेहरों के एक मंच पर आने से भाजपा की अंदरुनी राजनीति गरमाई।
प्रजापति, कश्यप, निषाद समेत कई अन्य समाज के लोगों ने भी अलग-अलग मंचों से राजनीतिक हिस्सेदारी मांगा है। जातियों में राजनीतिक चेतना बढ़ने से हिस्सेदारी मांगने की रेस तेज हुई है।
नरेंद्र कश्यप का कहना है कि पिछड़े समाज की आबादी 50 प्रतिशत से ज्यादा है। इसमें से चुनाव परिणामों पर असर डालने वाली तीस से ज्यादा जातियों पर फोकस किया जा रहा है।