Seat Belts Mandatory
Seat Belts Mandatory

rear seat belt requirement

पिछली सीट बेल्ट की अनिवार्यता

Seat Belts Mandatory   : उद्योगपति साइरस मिस्त्री की कार दुर्घटना में मौत के बाद गाड़ी के अंदर सेफ्टी उपकरणों की जरूरत और पहले से मौजूद सेफ्टी बेल्ट एवं अन्य उपकरणों को कानूनी जामा पहनाना केंद्र सरकार का उचित कदम है। चारपहिया वाहन हो या फिर दोपहिया, ट्रैफिक पुलिस की यह सिरदर्दी है कि वह सीट बेल्ट और हेलमेट पहनने के नियम को लागू कराए। हालांकि वाहन चालक के लिए यह जैसे जरूरी नहीं है और वह इसे गैर जरूरी समझता है। लेकिन जब दोपहिया चालक का एक्सीडेंट होता है तो यही कारण निकलता है कि उसने हेलमेट नहीं पहना था, काश पहना होता तो वह बच जाता। ऐसे ही ज्यादा चार पहिया वाहनों के एक्सीडेंट में भी यह सामने आता है कि टक्कर के बाद पिछली सीट पर बैठी सवारियां भी आगे की तरफ गिरी, जिससे और ज्यादा चोट आईं। मोटर व्हीकल एक्ट में एक कार की पिछली सीट पर बैठी सवारी के लिए भी सीट बेल्ट लगाने का नियम है, लेकिन देशभर में शायद ही कहीं इस नियम के उल्लंघन पर किसी का चालान कटा हो। कहा जा रहा है कि अगर साइरस मिस्त्री और उनके साथ बैठे शख्स ने भी सीट बेल्ट लगाई होती तो संभव है आगे बैठी महिला ड्राइवर और उनके साथ बैठे उनके पति की तरह सभी की जान बच जाती।  

केंद्रीय सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी हाईवेज बनाने और यातायात नियमों में भारी जुर्माना लगाकर लोगों को ट्रैफिक रूल्स के प्रति संजीदा बनाने के अपने प्रयासों के लिए सराहना भी पाते हैं और उन्हें आलोचना का भी शिकार होना पड़ता है। हालांकि उनकी वजह से आज देश में ट्रैफिक नियमों के प्र्रति संजीदगी काफी हद तक बढ़ चुकी है और अब साइरस मिस्त्री के साथ हुए हादसे ने एकबार फिर देश में उन नियमों को सख्त बनाने की जरूरत को समझा दिया है, जिनके अभाव में जानें जा रही हैं। कार की अगली सीट पर बैठने के दौरान भी अनेक लोग बेल्ट नहीं लगाते, ऐसा वे न जाने किस सनक में करते हैं, लेकिन सीसीटीवी कैमरों की भारी उपलब्धता की वजह से अब जहां शहरों में वाहन चालकों में सतर्कता बढ़ी है, वहीं सीट बेल्ट, जेब्रा क्रॉसिंग और ट्रैफिक लाइट्स का भी उन्हें बखूबी ज्ञान हो गया। बावजूद इसके पीछे की सीट पर बैठे लोगों का बेल्ट पहनना अभी नहीं हो सका है। लगभग सभी गाडिय़ों में पीछे की सीट पर बैठा सवार इसकी जरूरत ही नहीं समझता कि एकाएक ब्रेक लगने की स्थिति में वह जब आगे की तरफ जाकर गिरता है और अपने आप को किसी तरह सीट पर हाथ लगाकर रोकता है तो यह कितना खतरनाक साबित हो सकता है।
 

दरअसल, साइरस मिस्त्री की दुर्घटना में मौत के बाद विशेषज्ञों ने परिवहन और यातायात नियंत्रण प्रणाली में खामियों की ओर इशारा किया। भारत में नियम और कायदे पहले से होते हैं, लेकिन उनका पालन करना जरूरी नहीं समझा जाता, लेकिन फिर किसी हादसे का इंतजार किया जाता है और उसके बाद उन्हें लागू करने के लिए भागदौड़ शुरू होती है। चंडीगढ़ की ही बात करें तो यहां वर्ष 2002 में पिछली सीट पर बेल्ट लगाना अनिवार्य है, लेकिन ट्राईसिटी में आजतक एक भी चालान नहीं हुआ है। स्थिति ऐसी है कि बीते वर्ष 14885 चालान आगे की सीट बेल्ट न करने के हुए वहीं 2019 में यह संख्या 19536 थी। वहीं वर्ष 2001 के बाद कार निर्माता कंपनियां अपनी हर गाड़ी में पिछली सीट पर बेल्ट का प्रावधान कर रही हैं। गौरतलब है कि गाड़ी के अंदर सीट बेल्ट न लगाने पर बीप की आवाज आने लगती है। लेकिन ऐसे उपकरण भी बाजार में हैं, जोकि सीट बेल्ट अलार्म को डिसेबल यानी काम करने से बंद कर देते हैं। ऐसे उपकरण ऑनलाइन बिक रहे हैं, अब  सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय से ई-कॉमर्स कंपनियों को ऐसे उपकरणों की ऑनलाइन बिक्री को रोकने के लिए कहने का आग्रह किया है।  यह भी अपने आप में अहम कदम है। देश में इस समय सभी वाहन की आगे की सीट पर बैठे यात्रियों के लिए सीट बेल्ट रिमाइंडर देना वाहन निर्माताओं के लिए अनिवार्य है। हालांकि सीट बेल्ट नहीं पहनने वाले पिछली सीट के यात्रियों को केंद्रीय मोटर वाहन नियम (सीएमवीआर) के नियम 138 (3) के तहत 1,000 रुपये का जुर्माना लगता है। ज्यादातर लोग या तो इस नियम से अनजान होते हैं या इसकी अनदेखी करते हैं। ट्रैफिक पुलिस भी शायद ही कभी पीछे की सीट पर बैठे यात्रियों को सीट बेल्ट न लगाने के लिए जुर्माना करती है।  सडक़ मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में सीट बेल्ट नहीं पहनने के कारण 15,146 लोगों की मौत हो गई थी और 39,102 लोग घायल हुए थे।
 

यह अपने आप में अनोखी बात लगती है कि किसी को अपने जीवन को बचाने के लिए भी नियमों का डर दिखाया जाए। लेकिन यही हो रहा है। गाडिय़ों की इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं होती, वहीं ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करके गाडिय़ां दौड़ाई जाती हैं। लोग हेल्मेट पहनना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं, ऐसे सीन अक्सर देखने को मिल सकते हैं कि किसी ने दोपहिया चलाते हुए हाथ में हेल्मेट पकड़ा होता है। क्या हेलमेट सिर्फ दिखाने की वस्तु है। चंडीगढ़ में महिलाओं के लिए अब हेलमेट पहनना जरूरी किया गया है, इसका असर भी दिखने लगा है। ऐसे ही अब कारों में पिछली सीट बेल्ट लगाना भी जरूरी हो गया है तो समझा जाना चाहिए कि लोग इन बातों को सकारात्मक तरीके से लेंगे। कहा गया है कि जब तक जान है, जहान है। यानी जीवन रहते ही आप सबकुछ कर सकते हो, जीवन खत्म होते ही सबकुछ खत्म हो जाता है। चाहे वह कोई सामान्य व्यक्ति हो या फिर एक अरबपति कारोबारी, सभी का जीवन अनमोल है। उसे हर हाल में महफूज रखने की जरूरत है।