राजस्थान में बढ़ सकती हैं लोकसभा सीटें, परिसीमन रिपोर्ट में 25 से 38 सीटें करने का सुझाव

Lok Sabha seats in Rajasthan could increase

Lok Sabha seats in Rajasthan could increase

Lok Sabha seats in Rajasthan could increase, राजस्थान में लोकसभा सीटों की संख्या 25 से बढ़ाकर 38 तक हो सकती है. प्रदेश की 7 लोकसभा सीटों को कई हिस्सों में बांटे जाने की संभावना है. देशभर में परिसीमन के लिए प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने स्टडी रिपोर्ट पेश की है. इस रिपोर्ट में परिसीमन के लिए मापदंडों को बताया गया है. सभी सीटों के लिए एक नियम लागू ना करने की बजाए सीटवार डेमोग्राफी के हिसाब से परिसीमन करने का सुझाव दिया गया है. रिपोर्ट में देश की लोकसभा सीटों को 543 से 824 करने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके लिए 59 सीटों को दो भागों में और 111 सीटों को तीन भागों में विभाजित कर नई सीटें बनाने का प्रस्ताव दिया गया है. 

7 सीटों को 2-3 हिस्सों में बांटने की सिफारिश

रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में लोकसभा सीटों की संख्या 25 से बढ़ाकर 38 करने की सिफारिश की गई है. 13 नई लोकसभा सीटें बनाने के लिए मौजूदा 7 सीटों को दो और तीन हिस्सों में बांटने का सुझाव दिया गया है, जबकि 18 सीटों को यथावत रखने की बात कही गई है. रिपोर्ट में चूरू लोकसभा सीट को दो भागों में विभाजित कर एक नई सीट बनाने का प्रस्ताव है. जबकि जयपुर, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर, सीकर, उदयपुर और बांसवाड़ा लोकसभा सीटों को तीन-तीन हिस्सों में बांटने की सिफारिश की गई है.

एसटी आबादी की भी अहम भूमिका 

सीटों को दो या तीन में विभाजित कर नई लोकसभा सीटें बनाने के लिए कई मानकों का निर्धारण किया गया है. इसके तहत शहर का प्रकार, अधिक वोटर्स वाली लोकसभा सीटें, वोटर्स के जेंडर और हाई पोलराइजेशन सीटें जैसे मानक स्टडी किए गए हैं. 28% से अधिक एसटी आबादी वाली सीटों का भी अध्ययन किया गया है. इसका उद्देश्य सभी समुदाय और क्षेत्र को समुचित प्रतिनिधित्व प्रदान करना है. 

विभाजित होने वाली 7 सीटों पर किनका है दबदबा 

राजस्थान की जिन 7 सीटों को विभाजित करने का प्रस्ताव है, उनमें से 4 पर बीजेपी और 3 पर विपक्षी दलों के सांसद हैं. जोधपुर से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, उदयपुर से मन्नालाल रावत, जयपुर से मंजू शर्मा और जयपुर ग्रामीण से राव राजेंद्र सिंह बीजेपी के सांसद हैं. बांसवाड़ा से बीएपी के राजकुमार रोत, सीकर से सीपीएम के अमराराम और चूरू से कांग्रेस के राहुल कस्वां सांसद हैं. 

क्षेत्रफल के लिहाज से देश की सबसे बड़ी सीट बाड़मेर में भी विभाजन की बात नहीं कही गई है. जबकि 18 लोकसभा सीटों में कोई बदलाव न करने का प्रस्ताव दिया गया है. इन सीटों में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की सीट कोटा-बूंदी, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का लोकसभा क्षेत्र अलवर, अर्जुन राम मेघवाल का बीकानेर और भागीरथ चौधरी की अजमेर लोकसभा सीट शामिल है. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल की सीट नागौर और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह की सीट झालावाड़-बारां में भी कोई बदलाव करने का प्रस्ताव नहीं दिया गया है. पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी की संसदीय सीट चित्तौड़गढ़ में भी कोई बदलाव का प्रस्ताव नहीं दिया गया है. 

2 ST रिजर्व सीटों के लिए सिफारिश

बीकानेर, श्रीगंगानगर, भरतपुर और करौली-धौलपुर SC के लिए आरक्षित हैं. अनुसूचित जाति (SC) के लिए रिजर्व किसी भी सीट को विभाजित नहीं करने की सिफारिश की गई है. जबकि उदयपुर, बांसवाड़ा-डूंगरपुर और दौसा सीटें ST के लिए आरक्षित हैं. इनमें से दो सीटों को पुनर्गठित करने का सुझाव दिया गया है. 

महिलाओं की भागीदारी को लेकर भी प्रस्ताव

महिलाओं के समुचित प्रतिनिधित्व को बढ़ाने को लेकर के भी सुझाव दिए गए हैं. इसके तहत महिला के लिए खास बूथ, शाम के वक्त पोलिंग के घंटे बढ़ाने, महिलाओं को बूथ तक लाने के लिए साधनों की व्यवस्था और महिलाओं को ध्यान में रखते हुए वोटर रोल अपडेट बनाने का प्रस्ताव भी दिया गया है.

परिसीमन आयोग लेगा अंतिम फैसला

आर्थिक सलाहकार परिषद की रिपोर्ट पर आखिरी फैसला परिसीमन आयोग ही लेता है. रिपोर्ट में संभावित गणितीय मॉडल पेश किया गया है, जिसे मानना या न मानना आयोग पर निर्भर करेगा. इसमें सीटों के पुनर्गठन के लिए आयोग से अलग मापदंड भी प्रस्तावित किए गए हैं. परिसीमन के दौरान आम तौर पर सभी लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों में जनसंख्या का संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाता है. साथ ही क्षेत्रफल और प्रशासनिक इकाइयों- जैसे उपखंड, तहसील और विधानसभा क्षेत्र की अखंडता भी सुनिश्चित की जाती है, ताकि किसी तहसील या विधानसभा क्षेत्र को अलग-अलग लोकसभा सीटों में विभाजित न करना पड़े.