अमृतसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

42nd anniversary of Operation Blue Star in Amritsar

42nd anniversary of Operation Blue Star in Amritsar

अमृतसर। 42nd anniversary of Operation Blue Star in Amritsar, अमृतसर में श्री हरिमंदिर साहिब स्थित श्री अकाल तख्त साहिब पर आज ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी मनाई जा रही है। 8 बजे श्री अकाल तख्त साहिब पर शुरू हुए अखंड पाठ का भोग डाला जाएगा। जिसके बाद श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज समाज के नाम संदेश पढ़ेंगे। 

वहीं, गर्म ख्याली दल खालसा की तरफ से अमृतसर बंद की कॉल दी गई है। जिसके चलते स्थिति तनावपूर्ण होने की आशंका बनी हुई है। आपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी को लेकर पुलिस और अर्द्ध सैनिक बल की पांच कंपनियों शहर में तैनात है और चप्पे चप्पे पर पुलिस की नजर है। श्री हरिमंदिर साहिब के आसपास के इलाकों दो हजार से ज्यादा पुलिस कर्मी और तीन कंपनियों को तैनात किया गया है।

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हाल गेट के बाहर तैनात सुरक्षा बल।

पुलिस मुस्तैत, रिजर्व फोर्सेस तैनात

हेरिटेज स्ट्रीट के चप्पे चप्पे की निगरानी पुलिस अफसर सीसी कैमरों के जरिए कर रही है। गुरुनगरी के मुख्य प्वाइंट्स पर 65 से ज्यादा जगहों पर नाकाबंदी लगए गए है। इंट्री प्वाइंट गोल्डन गेट, पठानकोट-अमृतसर मार्ग और तरनतारन - अमृतसर मार्ग पर नाकाबंदी की गई है।

रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, श्री दुर्ग्याणा मंदिर, श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पिछले दिनों से लगातार चैकिंग अभियान चल रहे हैं। यात्रियों के सामान की तलाशी ली जा रही है। इसके साथ ही यात्रियों को लावारिस दिखने वाली वस्तु में विस्फोटक होने के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है।

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श्री अकाल तख्त साहिब के नीचे श्रद्धालुओं में 1984 ब्लू स्टार ऑपरेशन के बाद के पोस्टर व तस्वीरें बांटते हुए विभिन्न संगठनों के सदस्य।

जाने क्या था ऑपरेशन ब्लू स्टार

ऑपरेशन ब्लू स्टार भारतीय इतिहास की सबसे चर्चित और विवादित सैन्य कार्रवाइयों में से एक माना जाता है। भिंडरावाले ने 1983 में अकाल तख्त पर कब्जा कर लिया। उसने सिखों के लिए अलग संप्रभु राष्ट्र की मांग की। उस समय पंजाब में खालिस्तान समर्थक उग्रवाद बढ़ रहा था और जरनैल सिंह भिंडरांवाले सहित कई हथियारबंद उग्रवादी अमृतसर स्थित श्री हरिमंदिर साहिब परिसर और अकाल तख्त में मौजूद थे।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने सैन्य अभियान चलाने का फैसला लिया। इसकी शुरुआत 1 जून 1984 को श्री हरिमंदिर साहिब परिसर की घेराबंदी के साथ हुई। 3 जून को पूरे पंजाब में कर्फ्यू लगा दिया गया और संचार व यातायात पर भी प्रतिबंध लगाए गए। 5 और 6 जून की रात सेना ने मुख्य कार्रवाई शुरू की, जिसमें भारी गोलीबारी और संघर्ष हुआ।

6 जून को जरनैल सिंह भिंडरांवाले की मौत की खबर सामने आई और पूरे पंजाब में कर्फ्यू लगा दिया गया। 8 जून 1984 तक अभियान समाप्त घोषित कर दिया गया। इस कार्रवाई में सैनिकों, उग्रवादियों और श्रद्धालुओं सहित बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। ऑपरेशन ब्लू स्टार आज भी पंजाब, सिख समुदाय और भारतीय राजनीति के इतिहास की सबसे संवेदनशील घटनाओं में गिना जाता है। 

तस्वीरों में देखें ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी

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श्री हरिमंदिर साहिब में जरनैल सिंह भिंडरांवाला का पोस्टर थामे हुए श्रद्धालु। 

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श्री अकाल तख्त साहिब के नीचे एकत्रित भीड़।

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श्री हरिमंदिर साहिब में उमड़ी भीड़।

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श्री अकाल तख्त साहिब पहुंची संगत।

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श्री हरिमंदिर साहिब पहुंचे बुड्ढा दल के जत्थेदार बाबा बलबीर सिंह।

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श्री अकाल तख्त साहिब पर चल रहा पाठ व मौजूद जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज।