चम्बा में मजदूरों का 'काला दिवस': चार लेबर कोड के खिलाफ काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन; 'बंधुआ मजदूरी' का लगाया आरोप
Protest Staged with Black Armbands Against
चंबा। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और राष्ट्रीय फेडरेशन के संयुक्त मंच के आह्वान पर बुधवार को सीटू के बैनर तले मजदूरों ने मजदूर विरोधी चार लेबर कोड के खिलाफ काला दिवस मनाया।इस अवसर पर विभिन्न कार्यस्थलों पर श्रमिकों ने काली पट्टी और काले बिल्ले लगाकर अपना विरोध प्रकट किया। साथ ही, केंद्र सरकार से इन चार लेबर कोड को रद्द करने की मांग की गई।
सीटू के जिला अध्यक्ष नरेंद्र और जिला महासचिव सुदेश ठाकुर ने कहा कि लेबर कोड लागू होने से 70 प्रतिशत उद्योग और 74 प्रतिशत मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। हड़ताल करने पर श्रमिकों के लिए कड़ी सजाएं और जुर्माने का प्रविधान किया गया है। स्थायी रोजगार के बजाय ठेका प्रथा और फिक्स टर्म रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। काम के घंटे आठ के बजाय 12 करने से बंधुआ मजदूरी की स्थिति उत्पन्न होगी।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा लागू की जा रही चार श्रम संहिताएं देश के श्रमिक वर्ग के अधिकारों पर गंभीर आघात हैं। इन संहिताओं के माध्यम से दशकों के संघर्ष से प्राप्त श्रम कानूनों को कमजोर किया जा रहा है, जिससे श्रमिकों की नौकरी की सुरक्षा, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और ट्रेड यूनियन अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
आंगनबाड़ी यूनियन की जिला अध्यक्ष सरोज, सचिव अंजू देवी, मिड-डे मील यूनियन के अध्यक्ष विपिन कुमार, सचिव सरोज कुमारी, कौशल्या देवी, सविता, जिला उपाध्यक्ष विपिन शर्मा और जिला कमेटी सदस्य प्रेम, चम्पा देवी ने मांग की है कि चारों श्रम संहिताओं को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा श्रम कानूनों को मजबूत किया जाए, न्यूनतम वेतन को राष्ट्रीय स्तर पर सुनिश्चित किया जाए, ठेका प्रथा पर नियंत्रण लगाया जाए और सभी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।