Home » संपादकीय » इलाज से एहतियात भला
editorial news
editorial news

इलाज से एहतियात भला

चीन में जिस घातक कोरोना वायरस ने 106 लोगों की जान ले ली है, उसका भारत सहित कई देशों में प्रसार समूचे विश्व के लिए चिंताजनक और चुनौती पूर्ण समस्या है। चीन से कुछ वक़्त अरसा पहले यहाँ लौटे कई लोग इस वायरस से पीडि़त मिल रहे हैं। इस असाध्य रोग की आशंका को लेकर मोहाली, जयपुर, पटना इत्यादि शहरों में में ऐसे मरीजों का इलाज चल रहा है। जाहिर है, चीन में इस वायरस के शिकार लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वहां सरकार ने उनके बाहर जाने पर रोक लगा दी है। एक पड़ोसी देश के नाते भारत की चिंता और भी गम्भीर और जायज़ है। चीन में भारतीय बड़ी तादाद में रह रहे हैं। हालात बिगड़ते देख कर अनेक प्रवासी स्वदेश वापसी कर रहे हैं। केंद्र सरकार चीन में फंसे भारतीयों को निकालने की तैयारी में तो है लेकिन मुश्किल यह है कि ऐसे लोगों की आधिकारिक संख्या का पता नहीं लग पा रहा। इसकी वजह यह है कि चीन जाते वक़्त भारतीय दूतावास में अपना दर्ज नहीं करवाते हैं।किसी भी देश में जाने वाले या जाकर बसने वाले सभी लोगों की पहचान का कड़ा नियम क़ानून ऐसे समय की माँग है।

इस बीच सामने आ रहा है कि चीन के सेंट्रल हुबेई प्रांत में 24 और लोगों की मौत वायरस से हो चुकी है, यहां 1,291 अधिक लोग संक्रमित हुए हैं। अभी तक 4000 से अधिक पीडि़त सामने आ चुके हैं। राजधानी बीजिंग में भी इस वायरस के संक्रमण से एक मौत हो चुकी है, वहीं सबसे प्रभावित शहर वुहान में भी अनेक मौतें हो चुकी हैं। हालात ऐसे हैं कि चीन से निकलकर कोरोना वायरस दूसरे देशों में पांव पसार रहा है। अमेरिका, हांगकांग, मकाऊ, ताईवान और भारत के बाद अब श्रीलंका में भी इस वायरस के संदिग्ध रोगी देखने में आ रहे हैं। चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग ने असाध्य रोग की रोकथाम और नियंत्रण की गंभीर स्थिति पर ध्यान देने और नागरिकों की जान की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के आदेश दिए हैं।

हालांकि चीन में वुहान समेत 13 अन्य शहरों से लोगों को बाहर निकालने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसके बाद भारत सरकार सक्रिय हुई है और चीन के अधिकारियों से संपर्क साधा जा रहा है। चंडीगढ़ पीजीआई समेत देश के सभी प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज करने के लिए आइसोलेट वार्ड तैयार किए गए हैं। इससे पहले जानलेवा स्वाइन फ्लू ने दस्तक दी थी जिसके चलते अस्पतालों में ऐसे विशेष वार्ड तैयार कराए गए थे। डॉक्टरों के अनुसार कोरोना वायरस जानवरों में पाया जाने वाला कॉमन वायरस है। इसके लक्षणों में नाक का लगातार बहना, कफ, बुखार और सांस लेने में दिक्कत होना है।कमजोर आंतरिक प्रतिरोध क्षमता वाले लोगों, छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए तो यह और भी खतरनाक साबित होता है। इस वायरस का फैलाव भी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के जरिए होता है, जिसमें छूने या हाथ मिलाने के अलावा छींक और खांसने से निकले वायरस का हवा में फैलना है।

कोरोना वायरस के संबंध में सामने आ रहा है कि अभी तक इसके इलाज की कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसका सर्वोत्तम इलाज इसके फैलाव को रोकना ही है। डॉक्टर इसकी नसीहत दे रहे हैं कि वे तमाम उपाय करें जोकि इस रोग के वायरस को फैलने से रोक सकें। गौरतलब है कि मोहाली निवासी जिस युवक को पीजीआई में आइसोलेट वार्ड में रखा गया है, उसके परिजनों को भी विशेष वार्ड में भर्ती कराया गया है। हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है कि वह वास्तव में इस वायरस से पीडि़त है, लेकिन इस वायरस की टेस्टिंग के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे ही नियत है, इसलिए वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही यह प्रमाणित हो सकेगा कि यह कोरोना वायरस ही है या फिर मामला सामान्य है। गौरतलब है कि चंडीगढ़ का स्वास्थ्य विभाग इसकी एडवाइजरी जारी कर चुका है कि कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों की जानकारी तुरंत विभाग को दी जाए। मोहाली एयरपोर्ट पर चीन से आ रहे यात्रियों की जांच के लिए भी प्रबंध किए गए हैं।

इस बीच ऐसी रिपोर्ट भी सामने आई हैं, जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस बात को स्वीकार किया है कि कोरोना वायरस के वैश्विक जोखिम के आकलन में गलती हुई है। यानी इस वायरस के आतंक को समझने में देरी हुई है, अब संगठन जोखिम का स्तर मध्यम से उच्च कर दिया है, वहीं चीन में यह बेहद उच्च है। मालूम हो, चीन के अलावा थाईलैंड में 7, ऑस्ट्रेलिया में 5, जापान, अमेरिका, फ्रंास और मलेशिया में अभी तक 3-3 ऐसे मामले सामने आए हैं। यानी पूरी दुनिया में इस रोग का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। वैसे यह संतोषजनक है कि भारत में अभी तक कोरोना वायरस के किसी भी केस की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। अब बाकी देश भी चीन से अपने नागरिकों को बाहर निकालने में जुट गए हैं।

भारत में मुंबई, बेंगलूरू और कोच्चि एयरपोर्ट पर सख्ती बरती जा रही है। यहां चीन से लौटे यात्रियों की जांच की जा रही है। जैसा कि डॉक्टर बता रहे हैं इस रोग के संक्रमण से बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है तो आम नागरिकों को भी चाहिए कि वे उन उपायों को जरूर आजमाएं जोकि सामान्य जुकाम आदि के दौरान हम अपनाते हैं। बेशक किसी से हाथ न मिलाना अशिष्टता कहलाए लेकिन ऐसे समय में यह अशिष्टता भी अच्छी कहलाएगी। देश के अंदर चिकित्सा संस्थान अपनी जिम्मेदारी को निभाने में जुटे हैं, ऐसे में आम नागरिकों को भी सहयोग करना होगा।

Check Also

नई शिक्षा नीति से बदलेगा देश, जो आज की जरूरत

बदलते दौर में शिक्षा में बड़ा बदलाव अब वक्त की मांग है। केंद्र सरकार ने …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share
See our YouTube Channel