जोहड़जी मेले की तैयारियां शुरू, श्रद्धालुओं ने चलाया सड़क सफाई अभियान

जोहड़जी मेले की तैयारियां शुरू, श्रद्धालुओं ने चलाया सड़क सफाई अभियान

Preparations for Johadji Fair Begin

Preparations for Johadji Fair Begin

जोहड़जी मेल को लेकर नालागढ़, दूंन ,कसौली व पट्टा मह लोग की जनता ने शुरू किया सड़क सफाई अभियान।

हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं ने हरिपुर से शुरू किया सड़क सफाई का कार्य  जिला सोलन ही नहीं पंजाब व हरियाणा के श्रद्धालु भी हुए शामिल

बद्दी 21 मार्च (ठाकुर ); Preparations for Johadji Fair Begin, हिंदू सिख एकता की मिसाल माने जाने वाला जिला सोलन का सुप्रसिद्ध जोहड़जी मेले को लेकर हर साल की तरह इस बार भी पूरे जिले के श्रद्धालुओं ने हरिपुर से लेकर जोहड़जी  तक सड़क सफाई अभियान शुरू कर दिया है।  इस सड़क सफाई अभियान में न केवल जिला सोलन बल्कि पंजाब हरियाणा व अन्य राज्यों के लोग भी शामिल होते हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह है कि बाहरी राज्यों से जोहड़जी में माथा टेकने आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की सड़क संबंधी समस्या का सामना न करना पड़े।खासकर जोहड़ जी में पैदल यात्रा कर पहुंचने वाले श्रद्धालु आराम से अपनी यात्रा संपूर्ण कर सके। इस मेले के इतिहास के बारे में बताते हुए समाजसेवी एवं हरिपुर बाबा जी के भक्त विक्रम ठाकुर ने बताया कि


सोलन जिले के  दून नालागढ़ के पट्टा बड़िया क्षेत्र में स्थित जोहड़जी मेला हिंदू-सिख एकता का एक प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक प्रतीक है । जो अप्रैल माह में आयोजित होता है। यह मेला गुरु नानक देव जी की चरण स्पर्श स्थली पर आयोजित किया जाता है। 19वीं सदी के आसपास शुरू हुए इस मेले में स्थानीय पहाड़ी और पंजाब क्षेत्र की संगतें भाग लेती हैं ।  जिसमें लंगर का आयोजन सबसे मुख्य विशेषता है। 

उन्होंने बताया कि

इस मेले के पीछे यह इतिहास है कि यह स्थल गुरु नानक देव जी की पवित्र यात्रा से जुड़ा है,। जो इसे सिख समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। यह ऐतिहासिक मेला हिंदू-सिख एकता की अनूठी मिसाल है।  यह मेला हर तीन साल बाद अप्रैल के शुरुआत में शुरू होकर करीब दो सप्ताह (2 से 14 अप्रैल तक) तक चलता है। इस मेले में पहले 2-5 अप्रैल तक देशी संगत, फिर 6-7 अप्रैल को नालागढ़ क्षेत्र, और 8-14 अप्रैल तक अर्की, महलोग, कुठाड़, बेजा और पटियाला सहित पहाड़ी क्षेत्रों की संगत भाग लेती है। इस मेले का व्यापारिक महत्व यह है कि यह स्थल समुद्र तल से 4800 फुट की ऊंचाई पर है। यहाँ लोग न केवल पूजा करने आते हैं, बल्कि यह मेला अपने साथ स्थानीय स्तर पर गर्म कपड़े, कृषि औजार और अन्य घरेलू सामानों की खरीदारी का अवसर भी लाता है।  मेले के दौरान हजारों श्रद्धालुओं के लिए पुलिस बल (जैसे- कसौली, गढ़खल पुलिस) द्वारा कड़े सुरक्षा और यातायात इंतजाम किए जाते हैं।  यह मेला न केवल आध्यात्मिक रूप से समृद्ध है, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक बड़ा माध्यम भी है। उन्होंने बताया कि जोहड़जी में आने वाले श्रद्धालुओं की जो भी मन्नत होती है वह पूरी होती है और यह स्थान अपने आप में एक ऐतिहासिक स्थान है।

 जोहड़जी मेले को लेकर सड़क सफाई अभियान में हिस्सा लेते जिला सोलन  के श्रद्धालु