चुनावों में राजस्थान का 'दम': असम में संगठन तो बंगाल में 'मारवाड़ी' कार्ड, सीएम भजनलाल की रणनीति से खिला कमल
Organization in Assam, the 'Marwari' Card in Bengal
पश्चिम बंगाल, असम और केरल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में राजस्थान के नेताओं की भी अहम भूमिका रही है. राजस्थान के कई नेताओं ने इस चुनाव में “टारगेटेड इम्पैक्ट” के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को दो अलग-अलग राज्यों में बीजेपी ने जिम्मेदारी दी थी. दोनों ही राज्यों में चुनावी रणनीति भी बेहद अलग दिखीं. उन्होंने गुवाहाटी (असम) में संगठनात्मक बैठकों, प्रवास कार्यक्रमों और कार्यकर्ता संवाद पर जोर दिया. उन्होंने सीधे वोट मांगने से ज्यादा संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने पर जोर दिया. जबकि पश्चिम जबकि बंगाल में उनका अभियान ज्यादा राजनीतिक रूप से दिखाई दिया.
मारवाड़ी वोट साधने के लिए उतरे थे सीएम
वहीं, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) में उनका रोड शो बहुत प्रभावी रहा था. कोलकाता के कालीघाट मंदिर से शुरुआत कर जनसभा और मारवाड़ी समाज के बीच संवाद के जरिए उन्होंने खास तौर पर प्रवासी वोट बैंक को टारगेट किया. रूझानों में प्रवासी और शहरी वोट में झुकाव भाजपा की ओर दिख रहा, जिसे भजनलाल शर्मा के टारगेटेड कैंपेन से प्रवासी राजस्थानी समुदाय से जोड़ा जा रहा है.
यहां बीजेपी के लिए बेहतर नतीजे
सिलीगुड़ी में बीजेपी प्रत्याशी शंकर घोष 47 हजार वोटों से आगे चल रहे हैं. सीएम ने कोलकाता में मंदिर दर्शन और जनसभाओं से भी पार्टी के लिए माहौल बनाया. बताया जा रहा है कि प्रवासी राजस्थानी वोटर्स पर मुख्यमंत्री की अपील का असर दिखा है.इसके अलावा, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार में रुझानों के मुताबिक भाजपा का स्ट्राइक रेट 2021 की तुलना में बेहतर नजर आ रहा है.