अमरोहा में कार्रवाई के आदेश ठंडे बस्ते में, अफसरों की लापरवाही उजागर

अमरोहा में कार्रवाई के आदेश ठंडे बस्ते में, अफसरों की लापरवाही उजागर

Orders for Action in Amroha Put on Back Burner

Orders for Action in Amroha Put on Back Burner

जिन पर कार्रवाई के आदेश दिए, उन पर भी अब तक नहीं हुई कार्रवाई

अमरोहा। अधीनस्थों के कारनामों को दबाने के लिए अफसरों का टालमटोल रवैया चलता रहता है। ऐसे ही तीन गड़बड़ी और फर्जीवाड़े के प्रकरणों की जांच में हुआ है। तत्कालीन डीएम निधि गुप्ता वत्स ने तीनों को गंभीरता से लिया था और अधीनस्थों को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया था लेकिन, अफसर 15 दिन से मामले को लटकाए रहे।

न जांच कर रिपोर्ट भेजी और न ही प्रस्तावित कार्रवाई से उनको अवगत कराया। नतीजतन डीएम जांच रिपोर्ट का इंतजार करती रहीं और जिम्मेदार बेपरवाह हो गए। स्थिति ये है कि अब उनका तबादला हो गया है। उन प्रकरणों के बारे में कोई पूछने वाला नहीं रहा है। नए डीएम नितिन गौड़ ने चार्ज संभाला है। लेकिन वह उन पर ध्यान देंगे या नहीं, इसका अभी कुछ पता नहीं है।

केस एक : फर्जीवाड़े में फंसे बाबू पर नहीं की कार्रवाई, न ही रिपोर्ट भेजी

बीती 24 फरवरी को मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अश्विनी कुमार मिश्रा ने गंगेश्वरी ब्लाक का निरीक्षण किया था। जिसमें उन्होंने कर्मचारियों की पत्रावलियों की भी जांच की थी। इनमें कुछ संदिग्ध मिलीं थी, जिनके परीक्षण का कार्य उन्होंने पीडी डीआरडीए अम्बरीश कुमार को सौंप दिया था। पीडी ने जांच की तो फर्जीवाड़े का राजफाश हो गया।

वरिष्ठ सहायक सचिन कुमार ने तत्कालीन डीडीओ सरिता द्विवेदी के फर्जी हस्ताक्षर कर खुद ही अपना प्रमोशन प्रधान सहायक के पद पर कर दिया था। फर्जी हस्ताक्षर का आदेश अपनी पत्रावली में बनाकर रख लिया था। जिस पर पीडी ने उसका स्पष्टीकरण तलब किया था लेकिन, अभी तक उसने जवाब नहीं दिया है।

मामला संज्ञान में आने पर तत्कालीन डीएम निधि गुप्ता वत्स ने बाबू के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जिस पर सीडीओ ने मामले की जांच बीडीओ अमरोहा नीरज गर्ग को सौंपी थी। उनकी जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई। उनके की ओर से उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई। लेकिन उच्चाधिकारियों ने डीएम तक उसे नहीं पहुंचाया। अपने पास ही दबाकर बैठ गए। जिसकी वजह से प्रकरण में कार्रवाई लंबित है।

केस दो : वीडीओ की जांच को दबाकर बैठे डीडीओ, नहीं की कार्रवाई प्रस्तावित

कुछ दिन पहले तत्कालीन डीएम निधि गुप्ता वत्स के आदेश पर पंचायत सचिवों के कलस्टर बदल दिए गए लेकिन, वीडीओ की ओर से चार्ज नहीं छोड़ा गया। सात दिन तक सचिव पुरानी पंचायतों में ही काम को अंजाम देते हुए धनराशि निकालते रहे। दूसरे सचिवों को उन्होंने कलस्टर का कोई भी दस्तावेज नहीं सौंपा।

इसकी शिकायत सचिवों ने तत्कालीन डीएम से की थी। जिस पर उन्होंने एडीपीआरओ से मामले की जांच कराई थी। जिसमें पंचायत सचिव कावेंद्र सिंह और रामनिवास पर करीब 18 लाख रुपये निकालने की पुष्टि हुई थी। एडीपीआरओ ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा था कि दोनों सचिवों ने आदेश की जानकारी होते हुए भी जानबूझकर गलत मंशा व कपटपूर्ण तरीके से धनराशि आहरित की है।

इसमें एडीओ पंचायत की संलिप्तता भी सामने आई है क्योंकि उनके की ओर से आदेश का पता होने के बाद भी पूर्व साथियों के डीएससी अनरजिस्टर नहीं किए गए। एडीपीआरओ की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम ने दोनों सचिवों पर कार्रवाई के आदेश डीडीओ को दिए हैं लेकिन, डीडीओ की ओर से उन पर कार्रवाई प्रस्तावित नहीं की गई। जांच को ही दबाकर बैठ गए हैं। न ही डीएम को कुछ अवगत कराया।

केस तीन : विभागीय कार्रवाई को भूल गए जिम्मेदार

मनरेगा योजना के तहत हसनपुर ब्लाक के तत्कालीन बीडीओ नीरज गर्ग ने चार लोगों के व्यक्तिगत कृषि तालाब खोदवाए थे। इसमें गलसुआ गांव निवासी अबरार के खेत में कृषि तालाब (फार्म पाण्ड) निर्माण कार्य पर 387490, फुरकान के खेत में तालाब निर्माण कार्य पर 365553, इस्तेकार के खेत में तालाब निर्माण कार्य पर 261648, ढक्का गांव में हरीश के खेत में तालाब निर्माण पर 373426 रुपये खर्च किए थे, जबकि प्रत्येक कृषि तालाब के लिए अनुमन्य धनराशि दो-दो लाख रुपये थी।

आठ लाख रुपये में चारों तालाब खोदे जाने थे लेकिन, 13,88,117 लाख खर्च कर दिए। 5,88,117 रुपये कार्यों पर अधिक व्यय किए गए थे। तत्कालीन डीएम ने मामले का संज्ञान लेते हुए सीडीओ को जांच कराकर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जिस पर सीडीओ अश्वनी कुमार मिश्र ने पीडी डीआरडीए को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी थी।

जांच में तत्कालीन बीडीओ अलावा गलसुआ के ग्राम प्रधान नौशाद अली, पंचायत सचिव रामनिवास, रोजगार सेवक कोमल सिंह व ढक्का गांव के प्रधान शहरोज इकबाल, पंचायत सचिव स्वपनिल, रोजगार सेवक नसीम अहमद व तकनीकी सहायक हरविंदर सिंह, एपीओ सौरभ कुमार दोषी पाए गए थे।

जांच रिपोर्ट पर डीएम ने गलसुआ पंचायत सचिव, प्रधान व तकनीकी सहायक से 4,14,691 रुपये तथा ढक्का पंचायत के सचिव, प्रधान, तकनीकी सहायक से 1,73,426 रुपये की रिकवरी करने के आदेश दिए थे और अन्य के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए कहा था। कई दिन बीतने के बाद भी अफसरों ने अभी तक दोषियों के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की है।