1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए श्रम संहिता नियम: आपके काम और वेतन पर बड़े बदलाव
New Labour Code Rules Effective from April 1, 2026
New Labour Code Rules Effective from April 1, 2026, देश में नए वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा समेत सरकारी नियम कायदों में बड़े बदलाव हो रहे हैं. केंद्र सरकार के स्तर पर नई श्रम संहिता (New Labour Codes) को लागू किया जा रहा है. इसमें 29 पुराने कानूनों को मिलाकर 4 नए कोड बनाए गए हैं. इसका सीधा असर आपकी सैलरी स्लिप, काम के घंटों और रिटायरमेंट फंड में बदलाव देखने को मिलेगा. सरकारी कर्मचारियों, प्राइवेट कर्मचारियों के साथ गिग वर्कर्स पर भी इसका असर दिखाई देगा. कामकाज का तरीका बदलेगा और उद्योगों के लिए कर्मचारियों को बेहतर सेवाएं और सुविधाएं देना जरूरी होगा.
1. सैलरी स्ट्रक्चर: कम इन-हैंड सैलरी, ज्यादा बचत
1 अप्रैल से बड़े बदलाव के तहत श्रम संहिता के नए 'वेतन कोड' (Code on Wages) के अनुसार, आपकी बेसिक सैलरी (Basic Pay) आपके कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50% होनी चाहिए.अभी तक कंपनियां बेसिक सैलरी कम रखती थीं और अलाउंस (HRA, बोनस आदि) ज्यादा, ताकि PF कम काटना पड़े. अब बेसिक सैलरी बढ़ने से आपका PF (Provident Fund) और ग्रेच्युटी का योगदान बढ़ जाएगा.आपकी हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी (Take-home salary) थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन रिटायरमेंट के समय मिलने वाला पैसा (Corpus) काफी बड़ा होगा.
2. कामकाज के घंटों में लचीलापन
सरकार ने काम के घंटों में लचीलापन दिया है, लेकिन कुल साप्ताहिक घंटों को सीमित रखा है. हफ्ते में अधिकतम 48 घंटे ही काम लिया जा सकता है.कंपनियां 12 घंटे की शिफ्ट के साथ 4-दिन वर्किंग वीक का विकल्प दे सकती हैं. हालांकि इसके बदले कर्मचारी को हफ्ते में 3 छुट्टियां देनी होंगी. यदि आप तय घंटों से ज्यादा काम करते हैं, तो नियोक्ता (Employer) को सामान्य मजदूरी से दोगुना तक ओवरटाइम का भुगतान करना होगा.
3. छुट्टियां और लीव एन्कैशमेंट
पहले साल में 240 दिन काम करने के बाद ही अर्जित अवकाश (Earned Leave) का अधिकार मिलता था. अब इसे घटाकर 180 दिन कर दिया गया है. यानी नए कर्मचारियों को जल्दी छुट्टियां मिलने लगेंगी.साल के अंत में यदि आपकी छुट्टियां बचती हैं, तो उन्हें कैश कराने के नियमों को सरल बनाया गया है.
4. ग्रेच्युटी में अब 5 साल का इंतजार नहीं
कर्मचारियों को अभी तक ग्रेच्युटी पाने के लिए एक ही कंपनी में लगातार 5 साल काम करना अनिवार्य था. लेकिन अनुबंध वाले कर्मचारियों के लिए यह समय सीमा खत्म कर दी गई है। अब 1 साल की नौकरी के बाद भी आनुपातिक (Pro rata) आधार पर ग्रेच्युटी मिल सकेगी.
5. गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स
डिलिवरी ब्वॉय जैसी सेवाएं देने वाले गिग वर्कर्स (Gig Workers) को इस दायरे में लाया गाय है. पहली बार Zomato, Swiggy, Uber जैसे प्लेटफॉर्म के लिए काम करने वाले इस दायरे में काम करेंगे. इनके लिए एक सोशल सिक्योरिटी फंड बनाया जाएगा. कंपनियों को अपने टर्नओवर का 1-2% इस फंड में देना होगा, जिससे इन कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और पेंशन जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी.
6. महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट
नए लेबर कोड के अनुसार, अब महिलाएं रात की शिफ्ट (शाम 7 से सुबह 6 बजे) में भी काम कर सकेंगी, बशर्ते कंपनी उनकी सुरक्षा के साथ उनकी सहमति ले. महिला या पुरुष होने के आधार पर वेतन में भेदभाव अब नहीं चलेगा.