HCS अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका, नहीं बन सकते आईएएस, जाने पूरा मामला
Major Setback for HCS Officers as Supreme Court of India
Haryana सिविल सेवा (HCS) के करीब एक दर्जन अधिकारियों के लिए Indian Administrative Service में पदोन्नति का रास्ता फिलहाल रुक गया है। Supreme Court of India ने Punjab and Haryana High Court के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR और चार्जशीट को रद्द कर दिया गया था।
यह मामला 2001–2002 बैच के HCS अधिकारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। Haryana Vigilance Bureau ने इन अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों में FIR दर्ज की थी। फरवरी 2026 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अधिकारियों को राहत देते हुए कहा था कि 18–20 साल पुराने मामले में बिना ठोस जांच के चार्जशीट दाखिल करना अवैध है और FIR को रद्द कर दिया था। इससे उनके IAS प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया था।
हालांकि राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत का मानना है कि ऐसे गंभीर मामलों में मेरिट के आधार पर विस्तृत सुनवाई जरूरी है।
IAS प्रमोशन पर असर
प्रशासनिक नियमों के अनुसार किसी भी अधिकारी को IAS कैडर में प्रमोट करने के लिए विजिलेंस क्लीयरेंस जरूरी होती है। अब FIR और कानूनी प्रक्रिया फिर से प्रभावी होने के कारण इन अधिकारियों को फिलहाल ‘दागी’ श्रेणी में माना जाएगा। जब तक मामला अदालत में लंबित रहेगा, Union Public Service Commission उनके नाम प्रमोशन के लिए स्वीकार नहीं करेगा।
इस कानूनी प्रक्रिया से प्रभावित अधिकारियों में जगदीप ढांडा, कुलधीर सिंह, सुरेंद्र सिंह, वीणा हुड्डा, जग निवास, कमलेश भादू, वत्सल वशिष्ठ और सरिता मलिक जैसे नाम शामिल हैं।