मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, 2200 आवेदन हुए निरस्त
Major fraud exposed in Chief Minister's Mass Marriage Scheme
अमरोहा। Major fraud exposed in Chief Minister's Mass Marriage Scheme, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के लाभ के लिए बेटियों के दोबारा दुल्हन बनने से पहले ही फर्जीवाड़ा उजागर हो गया। आवेदनों की जांच में सच्चाई सामने आई तो अफसर भी सख्त हो गए। उनके द्वारा 2200 आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। इनमें से करीब 1500 ऐसे आवेदन थे जिनकी शादियां हो चुकी हैं और उन्होंने लाभ पाने को आवेदन कर दिया था।
कुछ ऐसी भी मिली हैं, जिनके द्वारा आवेदन शादी से पहले किया गया था, लेकिन, सामूहिक विवाह की तारीख तय नहीं होने पर स्वजन ने बेटियों की शादी कर दी थी। यह सबकुछ पहली ही जांच में साफ हो गया है। अब दूसरी जांच ब्लाक स्तरीय अधिकारियों के द्वारा कराई जा रही है। तीसरी जांच जनपद स्तरीय अधिकारी करेंगे।
प्रदेश सरकार द्वारा गरीब बेटियों की शादी के लिए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना चलाई जा रही है। इसके तहत सरकार बेटियों की शादी के लिए एक लाख रुपये की आर्थिक मदद करती है। इसमें 60 हजार रुपये सीधे वधू के बैंक खाते में भेजे जाते हैं। 15 हजार रुपये आयोजन (टेंट, भोजन, पंडित या मौलवी, सजावट) पर खर्च होते हैं।
25 हजार रुपये का गृहस्थी का सामान जोड़ों को उपहार स्वरूप दिया जाता है। जिले को इस साल 800 सामूहिक विवाह कराने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। जिसके तहत समाज कल्याण विभाग ने 31 मई तक लोगों से आवेदन पत्र मांगे थे। करीब तीन हजार आवेदन पत्र विभाग को प्राप्त हुए थे।
इसके बाद विभाग ने उनको जांच के लिए ब्लाक व निकाय स्तर पर भेज दिया था। प्रथम जांच में ही फर्जीवाड़ा सामने आ गया। 1500 बेटियों की शादियां हो चुकी थीं, उसके बाद भी उन्होंने लाभ के लिए आवेदन कर दिया। 700 बेटियों के विवाह से पहले आवेदन किए गए थे लेकिन, सामूहिक विवाह कार्यक्रम की तारीख अधिकारी निर्धारित नहीं कर पाए।
इसकी वजह से स्वजन ने निर्धारित तिथियों पर बेटियों की शादी करवा दी और दुल्हन बनकर बेटियां अपने मायके चली गईं। जांच में यह पता चलने के बाद विभाग ने 2200 आवेदन निरस्त कर दिए हैं। करीब 800 आवेदनों की द्विस्तरीय जांच करवाई जा रही है।
यह है योजना का मानक
शासन ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लाभ उठाने के लिए मानक निर्धारित किए हैं। इसके तहत लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए। दोनों का पहला विवाह होना चाहिए। इसके अलावा लाभार्थी परिवार की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। योजना के लाभ के लिए आनलाइन आवेदन किया जाता है।
शादी के एक सप्ताह बाद खाते में पहुंच जाती है धनराशि
शादी करने पर मिलने वाली एक लाख रुपये की धनराशि का पारदर्शी तरीके से बंटवारा किया गया है। इसमें से 15 हजार रुपये आयोजन व 25 हजार रुपये उपहार आदि पर खर्च होते हैं। 60 हजार रुपये वधू के बैंक खाते में भेजे जाते हैं।
विवाह संपन्न होने के बाद लाभार्थियों की सूची जिलाधिकारी द्वारा स्वीकृत की जाती है। इसके बाद उस स्वीकृत सूची को विभागीय पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में महज एक से दो सप्ताह का समय लगता है और धनराशि सुरक्षित तरीके से सीधे लड़की के बैंक खाते में पहुंच जाती है।
आवेदनों की दूसरी जांच चल रही है। 2200 आवेदन पत्र निरस्त किए गए हैं। इनमें सभी की शादियां हो चुकी हैं। जांच में यह साफ होने के बाद आवेदन निरस्तीकरण की कार्रवाई की गई है।
- पंखुरी जैन, जिला समाज कल्याण अधिकारी।