छत्तीसगढ़ में बिजली कंपनी की बड़ी कार्रवाई, 10 हजार से अधिक सरकारी दफ्तरों के काटे कनेक्शन; 51 करोड़ भुगतान के बाद बहाल हुई सप्लाई
Major action by the power company in Chhattisgarh
रायपुर : Major action by the power company in Chhattisgarh, छत्तीसगढ़ में बिजली कंपनी ने राज्य में 10,138 सरकारी दफ्तरों के बिजली कनेक्शन काट दिए। हालांकि बकाया 51 करोड़ रुपये बिल चुकाने के बाद इन्हें वापस जोड़ दिया गया। प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों पर 3,432 करोड़ रुपये से अधिक का बिजली बिल बकाया होने से छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी (सीएसपीडीसीएल) पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है।
अब कंपनी ने बकाया राशि की वसूली के लिए ड्यूज रिकवरी एक्ट के तहत राशि को संबंधित विभागों के नियमित बिजली बिलों में जोड़ने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है।
बिजली कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, बकाया राशि जमा कराने के लिए संबंधित विभागों को कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन भुगतान नहीं होने पर कनेक्शन को काटना पड़ा। इनमें ऐसे करीब 40 कनेक्शन भी शामिल हैं, जिनका वर्तमान में उपयोग नहीं हो रहा था। बिजली कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि जिन परिसरों में नियमित बिजली आपूर्ति जारी है, वहां ड्यूज रिकवरी एक्ट के तहत बकाया राशि को किस्तों या नियमित बिलों में समायोजित कर इसे वसूला जाएगा।
प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे रायपुर, अंबिकापुर, दुर्ग, बिलासपुर, जगदलपुर, महासमुंद, कोरबा, रायगढ़, जांजगीर और राजनांदगांव सहित अन्य सर्कलों में हजारों सरकारी कनेक्शन काटे गए। सरकारी विभागों के साथ-साथ अन्य श्रेणी के बड़े बकायादारों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सबसे अधिक नगरीय प्रशासन विभाग पर बकाया
सबसे अधिक नगरीय प्रशासन विभाग पर 1,674 करोड़ रुपये से अधिक बिजली बिल बकाया है। इसके अतिरिक्त 39 अन्य विभाग भी लंबे समय से कुल 1,758 करोड़ रुपये के बकाया बिजली बिलों का भुगतान नहीं कर रहे हैं।
बिजली कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश विभाग समय पर बजट उपलब्ध नहीं होने का हवाला देते हैं, जबकि कुछ मामलों में आवंटित राशि का उपयोग अन्य मदों में किए जाने से बिजली बिल लंबित रह जाते हैं।
भुगतान मिलने पर जोड़ा गया कनेक्शन
बिजली कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक, कनेक्शन काटने के तत्काल बाद ही अधिकांश विभागों का बकाया बिल का भुगतान होने पर कनेक्शन जोड़ दिया गया है। हर महीने सरकारी विभागों से करीब 550 करोड़ का बिल भुगतान प्राप्त होता है। एक अगस्त से कंपनी सरकारी दफ्तरों में प्री-पेड व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसके लिए विभागों को तीन महीने का अग्रिम बिजली बिल जमा करना अनिवार्य होगा।