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Tuesday, November 13, 2018
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बाढ़ के बाद सूखे का कहर झेलता केरल

बाढ़ के बाद सूखे का कहर झेलता केरल

देश का दक्षिणी राज्य केरल बाढ़ की भीषण विभिषिका से जूझ कर जैसे-तैसे बाहर निकला है। लेकिन एक नयी समस्या ने सरकार और जनता को चिंता में डाल दिया है। कुदरत के ये रंग कितने अनोखे हैं, इसका अहसास प्रत्येक नागरिक कर पा रहा है, लेकिन हालात ऐसे हैं कि कोई कुछ नहीं कर सकता। मालूम हो, बाढ़ की त्रासदी के बाद अब केरल में नदियां एवं कुओं के सूखने की खबरें हैं। कई हिस्सों में भूजल का स्तर गिर रहा है। राज्य सरकार ने बाढ़ के बाद उत्पन्न स्थिति का वैज्ञानिक अध्ययन कराने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने राज्य विज्ञान, तकनीक एवं पर्यावरण परिषद को प्रदेश में बाढ़ के बाद की स्थिति का अध्ययन करने और उत्पन्न समस्या का समाधान सुझाने का निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि पिछले महीने डेंगू का सामना करने के बाद केरल के विभिन्न हिस्सों में पीने के पानी की भारी कमी हो गई है। यहां नदियां तो सूख ही रही हैं, कुओं का पानी भी अचानक सूखने लगा है, इसके अलावा भूजल के स्तर में गिरावट और बड़ी संख्या में भयानक केंचुओं की मौजूदगी ने भी लोगों को परेशान कर दिया है। बाढ़ से प्रभावित रहा वायनाड जिला जैव विविधता का धनी माना जाता है। लेकिन हाल में जिले में बड़ी संख्या में भयानक केंचुओं की मौजूदगी ने किसानों को बेहाल कर दिया है। किसान इसे धरती के तेजी से शुष्क हो जाने और मिट्टी के ढांचे में बदलाव का कारक मानते हैं। मालूम हो पेरियार, भरतपुझा, पंपा और कबानी सहित अधिकांश नदियां बाढ़ के दौरान उफन रही थी। अब इसमें पानी का स्तर असामान्य रूप से नीचे जाने लगा है। कई जिलों से कुओं के सूखने के साथ ही उनके बैठ जाने की भी खबरें मिल रही हैं।

बताया गया है कि राज्य में बाढ़ के कारण कई स्थानों पर भूमि संरचना में भी बदलाव आ गया है। ऊंचाई वाली जगहों पर एक-एक किलोमीटर लंबी दरार पैदा हो गई हैं। यह स्थिति खास तौर से इडुक्की और वायनाड जिले में उत्पन्न हुई है। इन दोनों जिलों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुए थे। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार बाढ़ से प्रदेश को 40000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। देश भर से राज्य को मदद का सिलसिला जारी है, वहीं केरल सरकार ने बाढ़ से प्रभावित हर परिवार को 10000 रुपये का मुआवजा सौंपने का निर्णय लिया है।

केरल एक खूबसूरत प्रदेश है, यहां की कुदरती आबोहवा जहां स्वास्थ्यवद्र्धक मानी जाती थी वहीं देश-दुनिया से भी लोगों को अपनी तरफ खींचती थी, लेकिन बाढ़ की विभिषिका ने सब कुछ तबाह कर दिया, अब प्रदेश ऐसी स्थिति में है, जिसे फिर से अपने पैरों पर खड़ा होने में वक्त लगेगा। पूरा देश केरल के साथ है, लेकिन हमें इसे समझना होगा कि आखिर कुदरत की उपेक्षा करके हम विकास नहीं कर सकते। केरल के संबंध में रिपोर्ट हैं कि यहां विशेषज्ञों ने ताबड़-तोड़ निर्माण और नदियों से छेड़छाड़ से सरकार को आगाह किया था, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। जिसका परिणाम यह हुआ कि कुदरत के कहर ने इसकी खूबसूरती पर ऐसे दाग लगा दिए हैं, जिन्हें दूर करने में कई वर्ष लग जाएंगे। देश अगर तरक्की कर रहा है तो करे लेकिन कुदरत की अनदेखी हमेशा खतरनाक और जानलेवा साबित होगी। संभव है सरकारें तो इसे समझेंगी ही, नागरिक भी इस पर विचार करेंगे।

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