"कानपुर: किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट गिरोह का भंडाफोड़, 8 आरोपी जेल में"

"कानपुर: किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट गिरोह का भंडाफोड़, 8 आरोपी जेल में"

Kanpur: Kidney and Liver Transplant

Kanpur: Kidney and Liver Transplant

Kanpur: Kidney and Liver Transplant, किडनी खरीदने-बेचने व अवैध ट्रांसप्लांट करने वाला गिरोह लिवर ट्रांसप्लांट भी कराता था। पुलिस को गिरोह से जुड़े टेलीग्राम पर दो और ग्रुप मिले हैं, जिसमें एक में लिवर ट्रांसप्लांट का पता चला है। इस नई जानकारी के सामने आने के बाद जांच की दिशा बदल सकती है।

वहीं पुलिस ने किडनी कांड से जुड़े बड़े राजदार नौवें आरोपित बागपत के परवेज सैफी को बुधवार को जेल भेज दिया। उसके पास से 9.05 लाख रुपये बरामद किए गए हैं।

पुलिस की जांच में सामने आया कि इस गिरोह का सरगना गाजियाबाद का डॉ. रोहित चार मोबाइल नंबर रखता था, जिससे वह ऑपरेशन थियेटर (ओटी) की टीमों, किडनी खरीदने-बेचने वालों, दलाल शिवम, नवीन, साहिल व अन्य लोगों से अलग-अलग नंबर से वॉट्सएप काल करता है।

एक नंबर अपनी महिला मित्र के लिए रखता है। फिलहाल उसके सभी नंबरों की सीडीआर निकलवाई है, जिसका विश्लेषण किया जा रहा है।

टेलीग्राम ग्रुप पर मिलती थी जानकारी

डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि पुलिस को टेलीग्राम पर एक ग्रुप की जानकारी मिली थी, जिसमें किडनी डोनर को लेकर जानकारी थी। किडनी डोनर से जुड़े टेलीग्राम के एक ग्रुप में 643 सदस्यों में 585 किडनी एजेंट ग्रुप में भी हैं।

वहीं तीसरे ग्रुप लिवर पार्ट डोनर से 700 से ज्यादा सदस्य जुड़े हैं। जिसमें, अली, अफजाल समेत सभी आरोपित व किडनी बेचने वाले भी हैं। इससे पुलिस यह अंदाजा लगा रही है कि गिरोह लिवर ट्रांसप्लांट भी करा रहा था। हो सकता है कि मानव अंगों की तस्करी और अन्य अंगों का प्रत्यारोपण भी होता हो।

2017 में लूट का मामला है दर्ज

डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि बागपत के सिंघावली थानाक्षेत्र के अमीन नगर देवीगंज निवासी परवेज सैफी पर पहला मुकदमा 2017 में लूट, आपराधिक षड्यंत्र रचने समेत धाराओं में बागपत के ही दोघट थाने में दर्ज हुआ था।

इसके बाद उसके खिलाफ एक के बाद एक सात मुकदमे दर्ज हो गए। वर्ष 2022 में उसे डकैती के आरोप में ढाई साल की जेल भी हुई थी, पर जमानत पर छूटने के बाद वह मेरठ के डा. अफजाल के संपर्क में आ गया। उसके बाद वह डा. अफजाल के साथ किडनी खरीदने-बेचने वाले गिरोह में शामिल हो गया था।

अफजाल का खास बन गया परवेज

हालांकि परिवार वालों व अन्य को दिखाने के लिए वह एक ट्रैवल एजेंसी से जुड़कर बुकिंग पर कार चलाने लगा। कुछ ही समय में परवेज अफजाल का इतना खास बन गया कि एक-एक कर उसके गिरोह के सभी सदस्य उसके साथ शराब पीने लगे।

आहूजा में पारुल के ट्रांसप्लांट के दौरान परवेज अफजाल को भी 10 दिन पहले लेकर आया था। यहां वह दोनों कल्याणपुर के सत्यम होटल में ठहरे थे।

किडनी ट्रांसप्लांट के मिले 22 लाख

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अफजाल को 22 लाख मिले थे, जिसमें 10 लाख रुपये उसने परवेज को दिए थे। उन्हीं 22 लाख रुपये में 500 रुपये के नोटों की गड्डियों के साथ उसने अफजाल के साथ वीडियो बनाया था, जिसके बाद पुलिस ने उसे दबोचा। मंगलवार को पुलिस ने उसे सर्विलांस की मदद से रावतपुर क्षेत्र में रामा डेंटर चौराहे के पास जीटी रोड से गिरफ्तार किया था।

डीसीपी ने बताया कि अब तक की जांच में यह तो स्पष्ट हो गया कि मेरठ का ओटी मैनेजर अली ने ही पारुल का किडनी ट्रांसप्लांट किया था। उस समय उसके साथ डॉ. रोहित, ओटी मैनेजर राजेश, इंचार्ज कुलदीप सिंह राघव, डॉ. अफजाल, दलाल शिवम अग्रवाल समेत आठ लोग थे, जबकि सात लोग अस्पताल परिसर व आसपास थे, जिससे कोई बाहरी व्यक्ति अंदर न आ सके।

हर ट्रांसप्लांट के बाद नया सिमकार्ड इस्तेमाल करता था डॉ. रोहित

डीसीपी ने बताया कि गिरोह के सरगना डॉ. रोहित हर ट्रांसप्लांट के दौरान एक सिमकार्ड नया लेता था और ट्रांसप्लांट होने के बाद तोड़ के फेंक देता था, जबकि अलग-अलग मोबाइल फोन में चार सिमकार्ड हर समय रखता था, जिससे अलग-अलग लोगों से वह बात करता था।

फिलहाल उसके सभी नंबर बंद हैं। उसके नंबरों की सीडीआर निकलवाई गई है। कुछ नए संदिग्ध नंबर मिले हैं, जिसकी जांच सर्विलांस टीम कर रही है।

टीम जल्द नंबरों के आधार पर उन जिलों में जाने की तैयारी कर रही है। वहीं, शिवम के फोन में डिजिलाकर भी है, पर पासवर्ड नहीं होने से पुलिस ने जेल में बयान के दौरान उससे पूछा था, पर उसने भूल जाने की बात कही थी। अब रिमांड पर लेकर उसे खुलवाएगी।

पुलिस ने सभी के नंबरों की निकलवाई है सीडीआर 

पुलिस ने पहले डिजिलाकर खुद खोलने का प्रयास किया था, लेकिन खुल नहीं पाया। पुलिस टीम आहूजा में 29 मार्च की रात मुजफ्फर नगर की पारुल का किडनी ट्रांसप्लांट के बाद कार से लखनऊ निकले पांच लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है।

पारुल के लिए किडनी बिहार के बेगूसराय के आयुष ने गिरोह को बेची थी। दूसरी कार में रहे आरोपितों में दो को पुलिस ने दबोच लिया। उधर, आहूजा व प्रिया अस्पताल का लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया है। पूरे प्रकरण में अब तक डाक्टर दंपती समेत आठ आरोपित जेल भेजे जा चुके हैं, जबकि किडनी बेचने वाले आयुष को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है।