Julana Municipality Chairman Dr. Sanjay Jan

जुलाना नगरपालिका चेयरमैन डॉ. संजय जांगड़ा निलंबित, ACB रिश्वत मामले में सरकार की बड़ी कार्रवाई

undefined

Julana Municipality Chairman Dr. Sanjay Jangra suspended, major government action in ACB bribery cas

हरियाणा के जींद जिले के जुलाना कस्बे से इस वक्त की सबसे बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आई है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते जुलाना नगरपालिका के चेयरमैन डॉ. संजय जांगड़ा को उनके पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई राज्य के Anti Corruption Bureau (ACB) द्वारा दर्ज रिश्वत प्रकरण और चल रही विभागीय जांच के आधार पर की गई है। विभागीय आदेश जारी होते ही स्थानीय प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

मामले की जड़ अगस्त 2025 की उस कार्रवाई से जुड़ी है, जब ACB की टीम ने जाल बिछाकर डॉ. संजय जांगड़ा को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। आरोप था कि एक ठेकेदार के 91 लाख 20 हजार 454 रुपये के लंबित बिल पास करने के बदले में 2 लाख 27 हजार 500 रुपये की रिश्वत मांगी गई। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने योजना बनाकर ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया। 16 अगस्त 2025 को की गई इस कार्रवाई में चेयरमैन को कथित रूप से रिश्वत की राशि स्वीकार करते हुए पकड़ा गया।

गिरफ्तारी के बाद डॉ. जांगड़ा को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इस घटनाक्रम के बाद जुलाना नगरपालिका में प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हुआ। हालांकि सितंबर 2025 में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई थी। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने दोबारा चेयरमैन का कार्यभार संभाल लिया था। उस समय यह तर्क दिया गया था कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय आने तक वे पद पर बने रह सकते हैं।

लेकिन अब राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें पद से निलंबित कर दिया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, भ्रष्टाचार के आरोपों की गंभीरता और प्रारंभिक साक्ष्यों को देखते हुए यह कदम आवश्यक माना गया। प्रशासनिक नियमों के तहत, किसी जनप्रतिनिधि या पदाधिकारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने और प्रथमदृष्टया प्रमाण सामने आने की स्थिति में विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। निलंबन का उद्देश्य निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना और पद के दुरुपयोग की संभावना को रोकना बताया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि निलंबन अंतिम दंड नहीं होता, बल्कि यह एक अंतरिम प्रशासनिक कार्रवाई है। विभागीय जांच पूरी होने और अदालत में चल रहे मुकदमे के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो पद से बर्खास्तगी सहित अन्य कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं। वहीं, यदि अदालत से राहत मिलती है तो स्थिति अलग हो सकती है।

इस घटनाक्रम का स्थानीय राजनीति पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है। जुलाना नगरपालिका क्षेत्र में विकास कार्यों, ठेके और वित्तीय अनुमोदन जैसे मामलों में पारदर्शिता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अब चेयरमैन के निलंबन के बाद विपक्षी दलों ने सरकार से व्यापक जांच की मांग की है। वहीं, समर्थकों का कहना है कि अदालत का अंतिम फैसला आने तक किसी को दोषी नहीं माना जाना चाहिए।

फिलहाल, नगरपालिका के प्रशासनिक कार्यों के सुचारु संचालन के लिए विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। यह देखना अहम होगा कि विभागीय जांच कितनी तेजी से पूरी होती है और अदालत में चल रहा मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है। जुलाना की यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि भ्रष्टाचार के मामलों में राज्य सरकार और जांच एजेंसियां सख्त रुख अपनाने के संकेत दे रही हैं।