बंगाल चुनाव में जेएलकेएम को बड़ा झटका
JLKM suffers major setback in Bengal elections
जमशेदपुर। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) की बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़ी हार हुई है। डुमरी विधायक जयराम महतो की पार्टी जंगल महल क्षेत्र में धमक दिखाने उतरी, लेकिन दो सीटों पर प्रत्याशी उतार पाई और दोनों जगह बुरी तरह हारी। कुड़मी समुदाय ने पार्टी को खारिज कर दिया।
जयराम महतो ने चुनाव घोषणा के साथ ही जयपुर में रैली कर पुरुलिया, बांकुड़ा और झाड़ग्राम के एक दर्जन सीटों पर लड़ने का ऐलान किया था। जिला समितियां और प्रभारी भी घोषित किए। मगर ज्यादातर पदाधिकारियों ने रुचि नहीं दिखाई। कई ने पद छोड़ दिया।
अंत में पार्टी सिर्फ पुरुलिया, जयपुर और बाघमुंडी पर उतर पाई। पुरुलिया के प्रत्याशी ने पार्टी पर आरोप लगाकर चुनाव से हट गए।बंगाल में आजसू के समर्थन से चुनाव लड़ रही भाजपा को इसका सीधा फायदा मिला।
जयपुर में स्वयंभू फैसला महंगा पड़ा
जयपुर सीट पर जेएलकेएम ने दिव्यज्योति सिंह देव को टिकट दिया। जयराम महतो अक्सर कहते रहे कि राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा। लेकिन इस बार उन्होंने खुद राजपरिवार के युवराज को समर्थन दिया। 2021 में निर्दलीय दिव्यज्योति को 35,429 वोट मिले थे, इस बार मात्र 9,152 वोट ही मिले।
भाजपा के बिस्वजीत महतो (अजीत महतो के पुत्र) ने एक लाख से ज्यादा वोट लाकर जीत हासिल की। कुड़मी समुदाय में नाराजगी थी क्योंकि जेएलकेएम ने लोकप्रिय सामाजिक नेता अजीत महतो के बेटे के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा किया। जयराम उन्हें अपना कोई वोट बैंक नहीं दिला सके, उल्टा पिछली बार के मुकाबले उनके वोट 25 प्रतिशत गिर गए।
बाघमुंडी में शर्मनाक प्रदर्शन
बाघमुंडी में जेएलकेएम प्रत्याशी मनोज कुमार महतो को सिर्फ 1,757 वोट मिले, जबकि नोटा को 2,437 वोट पड़े। भाजपा के रहिदास महतो ने यहां भारी मतों से जीत दर्ज की। टीएमसी दूसरे और कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही।
बाघमुंडी सीट पर भी मतदाताओं ने जेएलकेएम को सिरे से नकार दिया। यहां जेएलकेएम प्रत्याशी को मात्र 1,747 वोट मिले, जो नोटा (2,437 वोट) से भी काफी कम थे। इस शर्मनाक प्रदर्शन ने बंगाल में जेएलकेएम के विस्तार की उम्मीदों को करारा झटका दिया है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि जयराम महतो झारखंड में कुड़मी वोट बैंक पर अच्छी पकड़ बना चुके हैं। 2024 झारखंड चुनाव में उनकी पार्टी ने एक सीट जीती और कई जगह वोट काटे।
लेकिन बंगाल में संगठन की कमी, स्थानीय नेताओं का नदारद होना और कुड़मी समुदाय के असंतोष ने पार्टी को झटका दिया। भाजपा ने कुड़मी चेहरे उतारकर जमीन पर मजबूत खेल खेला।
जेएलकेएम की यह हार पार्टी के बंगाल विस्तार के सपने पर पानी फेरती नजर आ रही है। जंगल महल की कुड़मी बहुल सीटों पर स्थानीय मुद्दे, एसटी दर्जे की मांग और विकास अभी भी मुख्य बने रहे। जयराम महतो अब झारखंड पर फोकस बढ़ाएंगे या बंगाल में फिर से प्रयास करेंगे, यह देखना बाकी है।