वैश्विक तेल संकट के बाद अब दुनिया पर 'चीनी संकट' का साया: भारत लगा सकता है निर्यात पर 3 साल का प्रतिबंध, 30 सालों में सबसे कम स्टॉक
After the global oil crisis, the world now faces the shadow of a 'sugar crisis'
नई दिल्ली: After the global oil crisis, the world now faces the shadow of a 'sugar crisis', अमेरिका और इजरायल के ईरान से चले लंबे युद्ध के कारण दुनिया ने बड़ा तेल संकट झेला. पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े और फिर एलपीजी घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत भी बढ़ गई. उसके बाद अब दुनिया में चीनी संकट की आहट है. अल नीनो की वजह से इस साल मॉनसून सुस्त है. गन्ने की कम फसल से चीनी का उत्पादन कम हो सकता है. कम उत्पादन की आशंका और एथेनॉल में इस्तेमाल के कारण भारत कम से कम तीन सालों तक चीनी का निर्यात बंद कर सकता है. भारत में शुगर का स्टॉक 30 सालों में सबसे कम स्तर तक जा सकता है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यात करने वाला देश है, ऐसे में उसके फैसले से दुनिया में चीनी की कीमतों में उछाल आ सकता है.
अल नीनो का असर, एथेनॉल की मांग
भारत में भले ही चीनी की खपत स्थिर हो, लेकिन पेट्रोल में मिलाए जाने वाले एथेनॉल की बढ़ती मांग से गन्ने की मांग बढ़ी है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत कम से कम 3 सीजन तक ज्यादा चीनी निर्यात करने की स्थिति में नहीं होगा. अल नीनो से कमजोर मॉनसून का असर गन्ने का उत्पादन कम होने का खतरा है. इससे दुनिया में चीनी उत्पादन में लाखों टन की कमी की आशंका है.एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के देशों के लिए सप्लाई कम हो जाएगी और कीमतें बढ़ सकती हैं. 2027-28 सीजन में सप्लाई और कम हो सकती है.
तेल के बाद चीनी संकट
- 30 सालों से भी सबसे कम हो सकता है शुगर का स्टॉक
- 3 साल तक चीनी निर्यात पर रोक लगा सकती है सरकार
- 35 लाख टन ही रह जाएगा चीनी का स्टॉक
- 2015 में अल नीनो के कारण गन्ने की कम बुवाई से आया था संकट
- 2016-17 में भारत को दूसरे देशों से चीनी मंगानी पड़ी थी
- 8 लाख टन चीनी निर्यात के बाद भारत ने लगाई एक्सपोर्ट पर रोक
चीनी का स्टॉक महज 35 लाख टन
उद्योगों के अनुमानों के अनुसार, इस सीजन में भारत में 309.5 लाख टन चीनी के उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन अब उत्पादन 279 लाख टन रहने का अनुमान है, जो लगभग 285 लाख टन की वार्षिक खपत से कम है. लिहाजा 1 अक्टूबर को सीजन की शुरुआत में मिलों के पास स्टॉक घटकर लगभग 35 लाख टन ही रह जाएगा. यह 30 सालों से भी ज्यादा समय में सबसे कम है.
भारत चीनी के सबसे बड़े उत्पादकों में एक
भारत दुनिया में चीनी के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है. अगर वो घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरे देशों को निर्यात बंद करता है तो संकट बढ़ेगा. कम बारिश और एथेनॉल से चीनी का वैश्विक कारोबार प्रभावित होगा. शुगर इंडस्ट्री, सरकार के सूत्रों और किसानों ने यह संकेत दिया है. गन्ने के कम उत्पादन और एथेनॉल की बढ़ती मांग से बहुत कम चीनी बचेगी.

भारत में चीनी के उत्पाद काफी लोकप्रिय
शुगर इंडस्ट्री के सूत्रों ने कहा कि इससे चीनी की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा. भारत में चीनी और मिठाइयों की लोकप्रियता है. साथ ही चीनी कीमतों को लेकर सरकारें बहुत फिक्रमंद रहती हैं. खासकर गरीब परिवारों के लिए शक्कर सस्ती कैलोरी का जरिया भी है. ऐसे में सरकार कतई नहीं चाहेगी कि देश में चीनी की किल्लत हो और कीमतें बढ़ें.
जब विदेश से मंगानी पड़ी थी चीनी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में गन्ना संकट के बाद 2016-17 और 2017-18 में चीनी विदेशों से मंगानी पड़ी थी. ऐसा 2015 में अल नीनो के कारण गन्ने की कम बुवाई कम होने से हुआ था. भारत ने 2009 और 2010 में चीनी की भारी खरीद की थी. इससे चीनी के दाम में उस समय के स्तर से 3 गुना तक उछाल आया था. नई दिल्ली केएस कमोडिटीज के डायरेक्टर मोहन नारंग ने कहा कि अल नीनो और एथेनॉल की बढ़ती मांग से भारत से शुगर एक्सपोर्ट खत्म हो जाएगा. आने वाले सालों में भारत में आयात भी कर सकता है.
ब्राजील और थाईलैंड में भी असर
मुंबई की ट्रेडिंग कंपनी MEIR कमोडिटीज इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर राहिल शेख ने कहा, भारत में चीनी की सप्लाई पहले से ही कम है. अल नीनो एक बड़ा खतरा बनकर उभरा है. बारिश कम हुई तो गन्ने की खेती पर बुरा असर पड़ेगा. इससे भारत कुछ सालों तक चीनी बाजार से बाहर हो सकता है. वो घरेलू जरूरतों को पूरा करने पर जोर देगा. चीनी के दो अन्य बड़े उत्पादक ब्राजील और थाईलैंड में भी गन्ने की फसल पर अल नीनो हावी हो सकता है. ब्राजील भी बड़े पैमाने पर गन्ने का इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल कर रहा है. थाईलैंड और क्यूबा में भी कम बारिश से उत्पादन पर संकट है.

चीनी निर्यात पर रोक
भारत ने लगातार 5 सीजन हर साल औसतन 68 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात की है, ये दुनिया में चीनी निर्यात का 10 फीसदी थी. इससे चीनी की कीमतें काबू में रहीं. इस साल भी भारत ने करीब 8 लाख टन चीनी निर्यात की और 30 सितंबर तक निर्यात पर रोक लगा दी. चीनी निर्यात के लिए गन्ना मिलों को सरकार की मंजूरी चाहिए होती है. सरकार और उद्योग के सूत्रों के मुताबिक, ऐसे में सरकार साल दर साल चीनी निर्यात पर अंकुश लगा सकती है. सरकार चाहती है कि शुगर मिलें देश में चीनी की जरूरतों पर ध्यान दें, न कि निर्यात पर.
किसान गन्ने की जगह कम पानी वाली फसलों का रुख कर सकते हैं. इससे 2027-28 सीजन में गन्ने की खेती का रकबा और उपलब्धता कम हो सकती है. गन्ना उगाने वाले इलाकों में सोयाबीन, अरहर और दाल जैसी फसलों को बढ़ावा मिल रहा है. सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति सीमित है.
- प्रकाश नाइकनवारे, नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज के एमडी
11 सालों में सबसे कमजोर मॉनसून की आशंका
अल नीनो की वजह से इस साल भारत में मॉनसून की बारिश पिछले 11 सालों में सबसे कम होने की आशंका है. औसत से कम बारिश और जून में औसत से 40 फीसदी कम बारिश के कारण किसानों ने बुवाई में देरी की है. महाराष्ट्र और कर्नाटक में किसानों ने ये रुख अपनाया है. गन्ने का रकबा कम होने से चीनी उत्पादन भी गिरेगा. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी बड़े पैमाने पर गन्ने की फसल होती है. कुछ हफ्तों में गन्ने के पौधों की मांग में भारी गिरावट आई है.
फ्लेक्स फ्यूल वाहन लॉन्च हुए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के आने से इसमें और उछाल आएगा. भारत ने ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल पर प्रोडक्शन टैक्स भी खत्म कर दिया है. फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए 85% तक एथेनॉल वाला फ्यूल लॉन्च किया है.
एथेनॉल से गन्ना उत्पादन पर जोर
भारत महंगे कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के लिए पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल मिलाने और फ्लेक्स फ्यूल वाहनों पर जोर दे रहा है. इस कारण अगले 15 सालों में एथेनॉल की मांग मौजूदा 12-13 अरब लीटर से बढ़कर लगभग 30 बिलियन लीटर से ज्यादा हो सकती है. गोदावरी बायो रिफाइनरी के चेयरमैन और एमडी समीर सोमैया ने कहा, एथेनॉल की मांग तेजी से बढ़ी है.