आपका बैंक लोन चल रहा तो खबर आपके लिए; RBI ने Repo Rate को लेकर लिया बड़ा फैसला, गवर्नर ने दी जानकारी

RBI Governor Sanjay Malhotra Announced To Not Changed Repo Rate

RBI Governor Sanjay Malhotra Announced To Not Changed Repo Rate

RBI Repo Rate 2026: अगर आपका बैंक लोन चल रहा है और आप हर महीने EMI (किस्त) भर रहे हैं तो यह खबर आपके लिए ही है। वहीं अगर आप बैंक से लोन लेने की भी सोच रहे हैं तो भी ये खबर आपको पढ़ लेनी चाहिए। दरअसल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक बार फिर मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट (ब्याज दर) में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है। आर्थिक मोर्चे पर वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद आरबीआई ने रेपो रेट नहीं बढ़ाया। मसलन RBI ने रेपो रेट में न तो बढ़ोतरी की है और न ही इसमें कोई कटौती की। हालांकि करोड़ों कर्जदार आरबीआई रेपो रेट में कटौती का जरूर इंतजार कर रहे थे।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दी जानकारी

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार सुबह Repo Rate अपरिवर्तित रखने की जानकारी दी। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि, मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का फैसला लिया गया है। MPC के सभी सदस्यों ने आर्थिक मामलों की समीक्षा करते हुए सर्वसम्मति से रेपो रेट में न्यूट्रल रुख बनाए रखने का फैसला किया। रेपो रेट अपनी पुरानी दर 5.25% पर बरकरार रहेगा। इसी तरह रिवर्स रेपो रेट को भी उसके पुराने स्तर 3.35 फीसदी पर ही बरकरार रखा गया है।

रियल GDP ग्रोथ का अनुमान घटकर 6.6%

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, "रियल GDP ग्रोथ का अनुमान अब 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया गया है। "पिछले कुछ महीनों में, ग्लोबल अर्थव्यवस्था में काफ़ी अनिश्चितता रही है, अहम व्यापारिक रास्तों और सप्लाई चेन में रुकावटें आई हैं, बाज़ार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है और बिज़नेस को लेकर सावधानी का माहौल रहा है। उन्होंने कहा, मैं सबसे पहले इस बात पर ज़ोर देना चाहूँगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने ग्लोबल उथल-पुथल के इस दौर में पहले के ऐसे ही दौरों की तुलना में कहीं बेहतर बुनियादी मज़बूती के साथ प्रवेश किया है। हमें भरोसा है कि हम कम से कम नुकसान के साथ इन झटकों का सामना कर लेंगे।"

अगर रेपो रेट में होती कटौती तो...

अगर रेपो रेट बढ़ जाता तो कर्जदारों को महंगाई का झटका लग सकता था। हालांकि अगर घटा दिया जाता तो और राहत भी मिल जाती। बता दें कि आरबीआई की ओर से रेपो रेट (ब्याज दर) में कमी करने से बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है। लोन की महीने की EMI घट जाती है। रेपो रेट (ब्याज दर) घटने से घर, कार और पर्सनल लोन की EMI कम हो जाती है। इसीलिए इस बढ़ती महंगाई के बीच कर्जदार हर महीने जाने वाली EMI में राहत पाने की उम्मीद लगाए बैठे रहते हैं।

आखिरी बार 5 दिसंबर 2025 को घटाया था रेपो रेट

गौरतलब है कि RBI ने 5 दिसंबर 2025 को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट (0.25 प्रतिशत) की कटौती करके इसे 5.50% से 5.25% करने का फैसला लिया था। इससे पहले जून माह में रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की कटौती करके इसे 6.0% से 5.50% करने का फैसला लिया गया था। जबकि इससे पहले फरवरी में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी। इससे पहले अप्रैल 2025 में आरबीआई की ओर से 5 साल बाद रेपो रेट (ब्याज दर) में इतनी ही कटौती की गई थी। यानि आरबीआई ने रेपो रेट 0.25 प्रतिशत कम किया था। तब उस समय रेपो 6.50% से 6.25% हो गया था।

2 महीने में एक बार होती MPC की बैठक

मालूम रहे कि, आरबीआई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक हर 2 महीने में एक बार होती है। बैठक में लोन ब्याज दर, महंगाई और देश की आर्थिक स्थिति समेत अन्य वित्तीय मामलों की समीक्षा की जाती है और इस कड़ी में बदलाव के संबंध में कुछ अहम फैसले भी लिए जाते हैं। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (Monetary Policy Committee) की मीटिंग आरबीआई (Reserve Bank of India) के गवर्नर के नेतृत्व में होती है।

क्या होता है रेपो रेट?

आरबीआई जब बैंकों को कर्ज देता है तो रेपो रेट (RBI Repo Rate) के हिसाब से उस कर्ज पर ब्याज लेता है। वहीं जब बैंकों को आरबीआई से कर्ज महंगा पड़ता है तो वह आगे ग्राहकों को भी कर्ज महंगा देती हैं। इसलिए रेपो रेट कम होने से मतलब है कि बैंक से मिलने वाला लोन सस्ता हो जाता है और अगर बढ़ोत्तरी हो जाती है तो आपका लोन महंगा हो जाता है।

जैसे अगर अभी आरबीआई की तरफ से रेपो रेट में बढ़ोतरी कर दी जाती तो आपकी लोन EMI पर महंगाई का बोझ बढ़ जाता। यानि आपको महीने में फिर ज्यादा ब्याज दर के साथ ईएमआई भरनी होती। जिससे आप बच गए। हालांकि, रेपो रेट में बढ़ोतरी का उन ग्राहकों को फायदा होता है जिन्होंने एफडी (FD) करा रखी है। उनकी एफडी पर ब्याज बढ़ जाता है।

रिवर्स रेपो रेट क्या होता है?

जब बैंकें अपना पैसा आरबीआई में जमा करती हैं तो आरबीआई बैंकों को रिवर्स रेपो रेट (RBI Reverse Repo Rate) के हिसाब से उस पैसे पर ब्याज देता है। बाजार में जब भी बहुत ज्यादा नकदी दिखाई देती है, आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम उसके पास जमा करा दें।

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