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‘रूस में हिंदी की प्रगति में चेलिशेव का योगदान’ विषय पर वेबसंवाद

रूसी और संस्कृत भाषा का उद्गम स्त्रोत एक ही

चंडीगढ़, 04 जुलाई। रूसी और संस्कृत भाषा का उद्गम स्त्रोत एक ही है। यह बात आज रूसी विभाग के अध्यक्ष प्रो. पंकज मालवीय ने हिन्दी विभाग द्वारा आयोजित वेबसंवाद में कही। इस वेबसंवाद का आयोजन हिन्दी विभाग के कही अनकही विचार मंच द्वारा किया गया जिसका विषय ‘रूस में हिंदी की प्रगति में इव्गेनी पित्रोविच चेलिशेव का योगदान’ था।

प्रो. मालवीय ने इव्गेनी पित्रोविच चेलिशेव के योगदान की चर्चा करते हुए बताया कि रूसी और संस्कृत भाषा में बहुत सी समानताएं हैं, चाहे वे पौराणिक कथाएं हों या ईश्वर के स्वरूप की बात हो। चेलिशेव पहले विदेशी विद्वान हैं जिनको भारत के नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि हम आगे भी भाषा के अन्य विभागों के साथ मिलाकर इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने की कोशिश करेंगे। इस कार्यक्रम में देश – विदेश से 60 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया जिनमें शोधार्थियो, विद्यार्थियों के अलावा शिक्षकों, प्रो. नीरजा सूद, डॉ. प्रवीण गोयल एवं डॉ. प्रसून प्रसाद शामिल हैं।

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