पेट्रोल-डीजल और CNG के दाम घटने की उम्मीद, अमेरिका-ईरान डील से भारत को और क्या होंगे फायदे

पेट्रोल-डीजल और CNG के दाम घटने की उम्मीद, अमेरिका-ईरान डील से भारत को और क्या होंगे फायदे

US Iran Peace Deal

US Iran Peace Deal

वाशिंगटन: US Iran Peace Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच हुए एक ऐतिहासिक युद्धविराम समझौते के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने का रास्ता साफ हो गया है. इस फैसले से भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिली है. पिछले कुछ महीनों से जारी तनाव के कारण यह समुद्री मार्ग पूरी तरह ठप था, जिससे भारत में तेल और गैस की सप्लाई पर भारी संकट मंडरा रहा था.

समझौते के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों में 4 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है और यह 84 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है. युद्ध के चरम पर यही कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी.

भारत के लिए क्यों जरूरी है होर्मुज का रास्ता?

होर्मुज जलमार्ग दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है. वैश्विक स्तर पर उपभोग होने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है. भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, जिसमें से आधा हिस्सा सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे खाड़ी देशों से आता है. ये सभी देश इसी रास्ते से भारत को तेल भेजते हैं. इसके अलावा, भारत अपनी जरूरत की 90% एलपीजी (रसोई गैस) और 65% प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के लिए भी इसी रास्ते पर निर्भर है.

युद्ध के दौरान भारत पर क्या असर पड़ा?

फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत में ऊर्जा संकट गहरा गया था. इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ा:

रसोई गैस और एलएनजी की किल्लत: कतर और यूएई से आने वाली गैस रुकने के कारण फैक्ट्रियों और बिजलीघरों में गैस की कटौती करनी पड़ी. होटलों और रेस्टोरेंट को गैस देना बंद कर दिया गया था और आम घरों में सिलेंडर की रीफिलिंग का समय बढ़ा दिया गया था.

महंगाई की मार: चुनाव के कारण सरकार ने मार्च में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये कम की थी. लेकिन चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल-डीजल के दाम 7.50 रुपये प्रति लीटर, सीएनजी 6 रुपये प्रति किलो और घरेलू एलपीजी सिलेंडर 89 रुपये तक महंगा हो गया.

कंपनियों का नुकसान: कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सरकारी तेल कंपनियां लागत से कम दाम पर ईंधन बेच रही थीं, जिससे उन्हें हर दिन लगभग 650 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो रहा था.

भारत की जवाबी तैयारी और दूरगामी रणनीति

संकट को देखते हुए भारत सरकार और तेल रिफाइनरियों ने अपनी रणनीति बदली. भारत ने केवल खाड़ी देशों पर निर्भर रहने के बजाय रूस, अफ्रीका, अमेरिका और लाैटिन अमेरिका जैसे अन्य देशों से कच्चे तेल की खरीदारी बढ़ा दी. साथ ही, पेट्रोल-डीजल की जमाखोरी रोकने के लिए पेट्रोल पंपों से थोक खरीद पर अस्थायी प्रतिबंध भी लगाए गए.

रास्ता खुलने से भारत को क्या फायदे होंगे?

  • कम होगी महंगाई: तेल के दाम गिरने से माल ढुलाई का खर्च घटेगा, जिससे फल, सब्जी, राशन और सीमेंट जैसी बुनियादी चीजें सस्ती होंगी.
  • अर्थव्यवस्था को मजबूती: भारत का आयात बिल कम होगा, जिससे भारतीय रुपया मजबूत होगा और देश का राजकोषीय घाटा कम होगा.
  • व्यापारियों और कंपनियों को राहत: हवाई जहाज, पेट्रोकेमिकल्स, फर्टिलाइजर और लॉजिस्टिक्स जैसे उद्योगों को सीधा फायदा मिलेगा, क्योंकि ये सभी सेक्टर पूरी तरह ऊर्जा की कीमतों पर निर्भर हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्धविराम लागू रहता है, तो भारत में तेल कंपनियों का घाटा पूरी तरह खत्म हो जाएगा और आने वाले दिनों में आम जनता को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है.