हिमाचल के साहिल बने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, गांव में खुशी और गर्व का माहौल
Himachal's Sahil commissioned as a Lieutenant
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। Himachal's Sahil commissioned as a Lieutenant, कहते हैं माटी की खुशबू जब वर्दी में ढल जाए, तो हर गली, हर गांव गर्व से मुस्कुराए। यह शब्द बखूबी चरितार्थ कर दिखाए हैं ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र के रैंखा के मत्याल गांव के रहने वाले बेटे साहिल ने। भारतीय सेना अकादमी, देहरादून से शनिवार को पास आउट होकर साहिल के लेफ्टिनेंट बनने की खबर जैसे ही सामने आई, वैसे ही ज्वालामुखी के रैंखा क्षेत्र के मत्याल गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।
साहिल के पिता रिटायर्ड कैप्टन सुरेश कुमार ने बताया कि साहिल का रविवार को गांव पहुंचने पर स्वागत किया जाएगा। साहिल शुरू से ही अनुशासित, मेहनती और लक्ष्य के प्रति बेहद स्पष्ट सोच रखने वाला रहा है। पढ़ाई के साथ-साथ सेना में जाने का सपना उसके मन में बहुत पहले से था।
किस तरह पाई सफलता
साहिल ने अपनी शुरुआती शिक्षा आरएनटी रैंखा व जमा दो तक की शिक्षा डीएवी देहरा से पूरी की। इसके बाद झंझेड़ी चंडीगढ़ से बीटेक करते करते सेना में भर्ती हो गए। फिर तीन साल सेना में अपनी सेवाएं देने के बाद एसीसी कमीशन क्लीयर किया और आज आईएमए देहरादून से लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया।
उन्होंने यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। भारतीय सेना अकादमी में कड़े प्रशिक्षण के बाद जब वह लेफ्टिनेंट बने, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे परिवार और क्षेत्र की उपलब्धि बन गई।
परिवार की तीसरी पीढ़ी सेना में, दादा बने साहिल के मार्गदर्शक
साहिल के दादा स्व. बर्फी राम उनके मार्गदर्शक रहे हैं। साहिल के दादा भी सेना में सेवाएं दे चुके हैं। यानी देश सेवा की परंपरा इस परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही है। वहीं साहिल के पिता सुरेश कुमार भी सेना से कैप्टन रिटायर हैं। साहिल के चाचा सूबेदार सुभाष चंद भी भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे हैं।
साहिल के पिता सुरेश कुमार ने बताया कि घर में अनुशासन और देशसेवा का माहौल बचपन से ही साहिल को मिला। साहिल की दादी सिमरो देवी व उनकी मां नीलम देवी ने भावुक होते हुए बताया कि बेटे को वर्दी में देखकर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है।
युवाओं के लिए बने प्रेरणा
रैंखा के मत्याल गांव और ज्वालामुखी क्षेत्र में साहिल की कामयाबी आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। लोग उम्मीद जता रहे हैं कि साहिल जैसे युवा न सिर्फ सीमा पर देश की रक्षा करेंगे, बल्कि हिमाचल के युवाओं को भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला देंगे।