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हिमाचल में विधायकों को खाने पर मिलने वाली सब्सिडी खत्म

तपोवन, (धर्मशाला)। लोकसभा की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश के विधायकों को भी विधानसभा की कैंटीन में भोजन करने पर मिलने वाले अनुदान को खत्म करने का निर्णय लिया है।

यह जानकारी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आज विधानसभा में दी । उन्होंने कहा कि यह निर्णय सभी सदस्यों से चर्चा करने के बाद लिया है।

उन्होंने बताया कि अगले सत्र से खाने और नाश्ते पर मिलने वाले अनुदान समाप्त कर दिया जाएगा। विपक्ष और अन्य सदस्यों के साथ बातचीत कर ली है।

उन्होंने बताया कि अगले बजट सत्र में ये अनुदान बंद हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि हिमाचल में विधानसभा सत्र के दौरान विधायकों को 40 रूपये साधा खाना जबकि 50 रूपये चिकन और मीट मिलता था।

ठियोग के एक मात्र सीपीआईएम के विधायक राकेश सिंघा ने इस निर्णय का समर्थन किया और मांग उठाई की जो पिछले सदन में विधायकों का भत्ता बड़ा है, वह भी वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार इस पर विचार करें।

इन्वेस्टर मीट को लेकर विपक्ष का सदन से बर्हिगमन

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन इन्वेस्टर्स मीट पर चर्चा की मांग को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने जोरदार हंगामा किया और सदन का बर्हिगमन किया ।

दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि देने के बाद प्रतिपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने इन्वेस्टर मीट को नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग की । उन्होंने इन्वेस्टर मीट को इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला बताया। इस पर सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक हुई।इस पर सत्तापक्ष की कांग्रेस के साथ तीखी नोकझोंक हुई ।

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए हिमाचल बेचने का आरोप लगाया । नेता विपक्ष ने कहा कि अफसरों ने इन्वेस्टर मीट के रूप में साजिश रची है। उन्होंने कहा जयराम सरकार लाले की दुकान बन कर रह गई है। उन्होंने इन्वेस्टर मीट को भाजपा की रैली करार दिया।

इस पर विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने कहा कि इन्वेस्टर मीट को लेकर विपक्षी सदस्य आशा कुमारी, विक्रमादित्य सिंह और अन्य सदस्यों के सवाल आए है। इसके अलावा नियम 130 के तहत चर्चा मांगी है। इसलिए नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

इससे पहले सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही व्यवस्था को लेकर हंगामा हो गया। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री संसदीय कार्य मंत्री के साथ बैठक करने पहुंचे थे। इस दौरान मुख्य गेट पर सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक लिया। इस व्यवहार से कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। अग्निहोत्री को मुख्यमंत्री ने उठाया और बाद में मामला सुलझ गया। विधानसभा अध्यक्ष ने पुलिस को तलब किया है।

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