भगवान का नाम लेने से पापी व्यक्ति को भी मिल जाता है मोक्ष: कथा व्यास महेश माधव शास्त्री
Katha Vyas Mahesh Madhav Shastri
कडाके की ठंड के बावजूद श्रीमद भागवत कथा की ज्ञान गंगा में डूबे रहे श्रद्धालु
पलवल। दयाराम वशिष्ठ: Katha Vyas Mahesh Madhav Shastri: बघौला के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के प्रागंण में चल रही श्रीमद भागवत कथा सप्ताह के चौथे दिन व्यास महेश माधव शास्त्री जी ने अजामिल मुक्ति, भक्त प्रह्लाद की रक्षा, और भगवान नरसिंह द्वारा हिरण्यकशिपु वध की कथा सुनाई। कडाके की ठंड के बावजूद श्रोतागण ज्ञान की गंगा में डूबे रहे।

श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में मूर्ति स्थापना को लेकर इस सुंदर कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा की खास बात यह भी है कि जो भी इस दौरान कथा में दान आ रहा है, वह सभी मंदिर में दिया जा रहा है।
व्यास श्री महेश माधव शास्त्री ने अजामिल मुक्ति की कथा सुनाते हुए कहा कि मृत्यु के समय भगवान का नाम (नारायण) लेने से पापी व्यक्ति को भी मोक्ष मिल सकता है। पापों में लिप्त अजामिल ने अंत समय में अपने पुत्र नारायण को पुकारा, जिससे विष्णुदूतों ने यमदूतों से उसकी आत्मा को बचाकर उसे वैकुंठ धाम पहुँचाया, जो नाम जप की शक्ति और भगवान की क्षमाशीलता को सिद्ध करता है। नरसिंह अवतार यह सिखाता है कि जब-जब भक्त पर विपत्ति आती है, भगवान किसी न किसी रूप में रक्षा के लिए अवश्य आते हैं। यह शक्ति, अडिग विश्वास और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। व्यास जी ने कथा के दौरान श्रोताओं को बुजुर्गों का सम्मान देने का संदेश दिया। कहा कि हमें बच्चों को खिलौना नहीं, अपितु शिक्षा और संस्कार देने की जरूरत है। बुजुर्गों को प्रणाम करके उनका आर्शीवाद लेना चाहिए। इसी तरह जीवन को सफल बनाने के लिए पुत्र को पिता के, शिष्य को गुरू के, सेवक को स्वामी के और पत्नी को पति के अवश्य पैर छूने चाहिए। कथा के दौरान उन्होंने संगीतमई भजनों से श्रोताओं को ज्ञान की गंगा में डुबाए रखा।
भगवान वामन की झांकी को देख भाव विभोर हुए श्रोतागण
कथा के दोरान भगवान वामन की झांकी को देख श्रोतागण भावविभोर हो उठे। पंडित गोबिंदराम ने पियूष बालक की यह सुंदर झांकी तैयार की, जिसे देख श्रोतागण वामन अवतार भगवान के पैर छूने के लिए उमड पडे। व्यास महेश माधव शास्त्री जी ने बताया कि भगवान वामन विष्णु के दशावतारों में से पांचवें अवतार हैं, जो एक बौने ब्राह्मण बालक के रूप में प्रकट हुए, जिनका मुख्य उद्देश्य अहंकारी दैत्य राजा बलि से तीन पग भूमि माँगकर उसके अहंकार का नाश करना और देवताओं का खोया हुआ स्थान वापस दिलाना था, जिसमें उन्होंने एक पग में पृथ्वी, दूसरे में स्वर्ग नापकर, तीसरे पग के लिए बलि के सिर का उपयोग किया और उसे पाताल लोक भेज दिया.